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पानीपत में ब्लैक फंगस के 50 मरीज पर पुष्टि दो की
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पिछले 16 दिनों में पानीपत में ब्लैक फंगस के 50 संदिग्ध केस आ चुके हैं। इनका इलाज खानपुर मेडिकल कॉलेज में उपचार चल रहा है। स्वास्थ्य विभाग के पास खानपुर मेडिकल कॉलेज से रोगियों की स्टेटस रिपोर्ट नहीं भेजी जा रही है, इसलिए स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड में अब तक ब्लैक फंगस के दो ही कंफर्म रोगी हैं। यही नहीं ब्लैक फंगस के संदिग्ध तीन लोगों की मौत हुई है, लेकिन इनकी पुष्टि नहीं की गई है।
पानीपत सिविल अस्पताल में ब्लैक फंगस को पहचाने के लिए कमेटी काम कर रही है, लेकिन सरकारी अस्पताल में उपचार की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में मरीजों को निजी अस्पतालों में जेब ढीली करनी पड़ रही है और विभिन्न समस्याओं का भी सामना करना पड़ रहा है। सबसे अधिक समस्या दवा को लेकर है। फिलहाल निजी अस्पतालों में दाखिल ब्लैक फंगस के तीन रोगियों को चंडीगढ़ में बनी डॉक्टरों की कमेटी के अनुसार दवा उपलब्ध कराई जा रही है जो नाकाफी साबित हो रही है। राहत की बात ये है कि अब तक ऐसे कोई मामला नहीं मिला है जिसमें ब्लैक फंगस के प्रभाव के कारण किसी की आंखें निकालनी पड़ी हो।
ब्लैक फंगस के इंजेक्शन मिलने की प्रक्रिया जटिल, लोग खा रहे हैं धक्के-
ब्लैक फंगस के इंजेक्शन उपलब्ध कराने के लिए मुख्यालय स्तर पर पांच डॉक्टरों की अलग और तीन डॉक्टरों की सलाहकार के तौर पर कमेटी बनाई गई है। जब सिविल सर्जन कार्यालय कोई ब्लैक फंगस का रोगी पहुंचता है तो उसकी डिटेल चेक करने के बाद मुख्यालय में ई-मेल की जाती है। वहां तीन डॉक्टरों की कमेटी मरीज की स्थिति की जांच करती है और फिर पांच डॉक्टरों की कमेटी को बताया जाता है कि रोगी को इंजेक्शन की जरूरत है या नहीं। इसके बाद इंजेक्शन उपलब्ध कराए जाते हैं।
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- राहत की बात ये कि रिकवरी रेट बेहतर
जिले के लिए राहत की बात ये है कि ब्लैक फंगस के संदिग्ध रोगियों का रिकवरी रेट बेहतर है। अब तक खानपुर 50 संदिग्ध रोगियों को रेफर किया गया है इनकी हालत गंभीर नहीं है। इनमें से 12 रोगी ठीक हो चुके हैं।
खानपुर मेडिकल कॉलेज में हो रहा है रोगियों का इलाज- डॉ. सुनील
सिविल अस्पताल में ब्लैक फंगस के रोगियों का इलाज फिलहाल संभव नहीं है। रोगियों को खानपुर मेडिकल कॉलेज रेफर किया जा रहा है, जो भी रोगी इंजेक्शन के लिए आते हैं, कमेटी जांच करने के बाद इंजेक्शन उपलब्ध कराती है। जिले में कंफर्म रोगियों की डिटेल खानपुर मेडिकल कॉलेज से नहीं मिल रही है।
- डॉ. सुनील संदुजा, डिप्टी सिविल सर्जन, पानीपत
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पानीपत सिविल अस्पताल में ब्लैक फंगस को पहचाने के लिए कमेटी काम कर रही है, लेकिन सरकारी अस्पताल में उपचार की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में मरीजों को निजी अस्पतालों में जेब ढीली करनी पड़ रही है और विभिन्न समस्याओं का भी सामना करना पड़ रहा है। सबसे अधिक समस्या दवा को लेकर है। फिलहाल निजी अस्पतालों में दाखिल ब्लैक फंगस के तीन रोगियों को चंडीगढ़ में बनी डॉक्टरों की कमेटी के अनुसार दवा उपलब्ध कराई जा रही है जो नाकाफी साबित हो रही है। राहत की बात ये है कि अब तक ऐसे कोई मामला नहीं मिला है जिसमें ब्लैक फंगस के प्रभाव के कारण किसी की आंखें निकालनी पड़ी हो।
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ब्लैक फंगस के इंजेक्शन मिलने की प्रक्रिया जटिल, लोग खा रहे हैं धक्के-
ब्लैक फंगस के इंजेक्शन उपलब्ध कराने के लिए मुख्यालय स्तर पर पांच डॉक्टरों की अलग और तीन डॉक्टरों की सलाहकार के तौर पर कमेटी बनाई गई है। जब सिविल सर्जन कार्यालय कोई ब्लैक फंगस का रोगी पहुंचता है तो उसकी डिटेल चेक करने के बाद मुख्यालय में ई-मेल की जाती है। वहां तीन डॉक्टरों की कमेटी मरीज की स्थिति की जांच करती है और फिर पांच डॉक्टरों की कमेटी को बताया जाता है कि रोगी को इंजेक्शन की जरूरत है या नहीं। इसके बाद इंजेक्शन उपलब्ध कराए जाते हैं।
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- राहत की बात ये कि रिकवरी रेट बेहतर
जिले के लिए राहत की बात ये है कि ब्लैक फंगस के संदिग्ध रोगियों का रिकवरी रेट बेहतर है। अब तक खानपुर 50 संदिग्ध रोगियों को रेफर किया गया है इनकी हालत गंभीर नहीं है। इनमें से 12 रोगी ठीक हो चुके हैं।
खानपुर मेडिकल कॉलेज में हो रहा है रोगियों का इलाज- डॉ. सुनील
सिविल अस्पताल में ब्लैक फंगस के रोगियों का इलाज फिलहाल संभव नहीं है। रोगियों को खानपुर मेडिकल कॉलेज रेफर किया जा रहा है, जो भी रोगी इंजेक्शन के लिए आते हैं, कमेटी जांच करने के बाद इंजेक्शन उपलब्ध कराती है। जिले में कंफर्म रोगियों की डिटेल खानपुर मेडिकल कॉलेज से नहीं मिल रही है।
- डॉ. सुनील संदुजा, डिप्टी सिविल सर्जन, पानीपत