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39 लोगों की रुकी सर्जरी
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कोरोना संक्रमण की आपदा को देखते हुए सरकार ने 17 अप्रैल को इमरजेंसी सर्जरी को छोड़कर सभी सर्जरी पर रोक लगा दी थी। सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में सिर्फ गर्भवतियों की ही डिलीवरी हो रही है। हर रोज औसतन 6 से 7 गर्भवतियों की सर्जरी से डिलीवरी हो रही है। कोरोना के कारण सिविल अस्पताल में 39 लोगों की सर्जरी रुकी हुई है। डॉक्टरों को सर्जरी के लिए सरकार के आदेशों का इंतजार है।
सिविल अस्पताल में 17 अप्रैल से पहले नेत्र रोग विशेषज्ञों ने 22 लोगों को मोतियाबिंद के ऑपरेशन के लिए चिह्नित किया था, तीन रोगियों के कान के परदे का ऑपरेशन, 6 हड्डी के रोगियों की सर्जरी और छह पथरी के रोगियों की सर्जरी अभी रुकी हुई है।
आंखों व कानों की ओपीडी भी 15 दिन से बंद
सरकार ने सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में ओपीडी का समय छह घंटे से घटाकर तीन घंटे कर दिया है। सुबह आठ से 11 बजे तक ओपीडी होती है। सिविल अस्पताल में मुख्य रूप से दो आई सर्जन हैं। एक सर्जन को आइसोलेशन वार्ड इंचार्ज बनाया गया है। जबकि दूसरे सर्जन को प्रशासनिक कार्य सौंपा गया है। इसलिए 15 दिन से आंखों की जांच भी नहीं हो रही है। ऐसे में मोतियाबिंद के रोगियों की पहचान भी नहीं की जा रही है। दूसरी ओर कान, नाक गला विशेषज्ञ एक डॉक्टर भी कोरोना संक्रमित हैं, जबकि दूसरे विशेषज्ञ का कोविड अस्पताल में तबादला कर दिया गया था। इसलिए इस रोग के रोगियों की भी ओपीडी नहीं हो रही है। सिविल अस्पताल में हर माह 60 से अधिक लोगों का मोतियाबिंद के ऑपरेशन होते हैं। जबकि फरवरी में 52 लोगों की सर्जरी एक सर्जन ने की थी।
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सिविल अस्पताल में 17 अप्रैल से पहले नेत्र रोग विशेषज्ञों ने 22 लोगों को मोतियाबिंद के ऑपरेशन के लिए चिह्नित किया था, तीन रोगियों के कान के परदे का ऑपरेशन, 6 हड्डी के रोगियों की सर्जरी और छह पथरी के रोगियों की सर्जरी अभी रुकी हुई है।
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आंखों व कानों की ओपीडी भी 15 दिन से बंद
सरकार ने सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में ओपीडी का समय छह घंटे से घटाकर तीन घंटे कर दिया है। सुबह आठ से 11 बजे तक ओपीडी होती है। सिविल अस्पताल में मुख्य रूप से दो आई सर्जन हैं। एक सर्जन को आइसोलेशन वार्ड इंचार्ज बनाया गया है। जबकि दूसरे सर्जन को प्रशासनिक कार्य सौंपा गया है। इसलिए 15 दिन से आंखों की जांच भी नहीं हो रही है। ऐसे में मोतियाबिंद के रोगियों की पहचान भी नहीं की जा रही है। दूसरी ओर कान, नाक गला विशेषज्ञ एक डॉक्टर भी कोरोना संक्रमित हैं, जबकि दूसरे विशेषज्ञ का कोविड अस्पताल में तबादला कर दिया गया था। इसलिए इस रोग के रोगियों की भी ओपीडी नहीं हो रही है। सिविल अस्पताल में हर माह 60 से अधिक लोगों का मोतियाबिंद के ऑपरेशन होते हैं। जबकि फरवरी में 52 लोगों की सर्जरी एक सर्जन ने की थी।
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