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सात राइस मिलों पर 18500 एमटी सीएमआर चावल बकाया

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 01 Sep 2020 02:51 AM IST
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18500 mt cmr rice outstanding on seven rice mills
राइस मिलर्स दोबारा दी गई मोहलत में भी खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग को पूरा सीएमआर का चावल नहीं लौटा सके हैं। करनाल के सात राइस मिलों पर सोमवार को अंतिम दिन तक 18500 मीट्रिक टन चावल बकाया रह गया है। अब विभाग की ओर से दो राइस मिलर्स के संचालक और गारंटर के खिलाफ गबन के आरोप में एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी है। साथ ही अन्य पांच राइस मिलों की प्रापर्टी को अटैच करके उनकी नीलामी की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। हालांकि अभी राइस मिलर्स को उम्मीद हैं कि विभाग उन्हें तीसरी बार भी कुछ समय और देगा।
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करनाल जिले के 313 राइस मिलों ने हरियाणा सरकार के माध्यम से केंद्र सरकार का धान लिया था, जिसका 67 प्रतिशत चावल 30 जून तक वापस करना था। कोरोना संकटकाल के कारण करनाल के राइस मिलर्स को 15 जुलाई तक का समय दिया गया था लेकिन 15 जुलाई तक 108 राइस मिलों पर 116580 मीट्रिक टन चावल बकाया रह गया था। इस पर विभाग ने वेरिफिकेशन कराकर कार्रवाई शुरू की तो खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के अनुरोध पर केंद्र सरकार ने दूसरी बार राइस मिलर्स को 31 अगस्त तक का समय दिया था। इस अवधि में करीब 98.50 प्रतिशत तो चावल की आपूर्ति कर दी गई, लेकिन अंतिम दिन तक भी सात राइस मिलर्स पर 18500 मीट्रिक टन चावल शेष रह गया है। इसमें करनाल के मोदीराम एंड संस को 6332 मीट्रिक टन धान दिया गया, जिसका 67 फीसदी 4242 मीट्रिक टन चावल देना था, जिसमें से 31 अगस्त तक मिल ने 2821 मीट्रिक टन चावल ही दिया है, अभी 1421 मीट्रिक टन चावल बकाया है। मिल के मालिक सपट्टर सिंह राणा, उनके भाई पूरन सिंह, गारंटर शक्ति सिंह राणा के खिलाफ विभाग ने एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी कर ली है। इसी तरह कुंजपुरा के भारत राइस मिल को 509 मीट्रिक टन चावल दिया है, जबकि इन पर अभी 889 मीट्रिक टन चावल बाकी है। इसमें सुभाष चंद्र गुप्ता के पुत्र संजय गुप्ता, गौरव, अरविंद कुमार व विजय कुमार पार्टनर हैं। इनके खिलाफ भी एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी है। इसके अलावा घरौड़ा के तीन राइस मिलों पर सीएमआर चावल बकाया है। इसमें जय हनुमान राइस एंड जनरल मिल्स पर 46980 क्विंटल, एसएसजी फूड्स पर 49450 क्विंटल, जैक्शन इंडस्ट्री पर 14500 क्विंटल चावल बकाया रह गया है। इसके अलावा नीलोखेड़ी के दो राइस मिल्स में शांति एग्रो फूड्स पर 27750 क्विंटल, एवरग्रीन ओवरसीज पर 10150 क्विंटल चावल बकाया है। इन पांचों राइस मिलों की संपत्तियां पहले ही विभाग ने अटैच कर रखी है। जिसमें विभाग अटैच संपत्ति की नीलामी करके बकाया चावल की कीमत वसूल करने की कार्रवाई कर सकता है। इसस अब राइस मिलर्स में खलबली मच गई है।
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-31 अगस्त की तय सीमा तक सात राइस मिलों पर 18.50 हजार मीट्रिक टन सीएमआर चावल बकाया रह गया है। इसमें करनाल के मोदीराम एंड संस व कुंजपुरा के भारत राइस मिल के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। चावल की कीमत की भी वसूली होगी। इसके अलावा घरौड़ा के तीन व नीलोखेड़ी के दो राइस मिलों की संपत्ति पहले से ही विभाग के पास अटैच है, उसकी नीलामी करके चावल की कीमत की वसूली की कार्रवाई जल्द शुरू की जाएगी।
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-निशांत राठी, जिला खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति नियंत्रक करनाल।
-राइस मिलर्स की समस्याओं को खाद्य एवं आपूर्ति विभाग भी समझ रहा है, ज्यादातर चावल दे दिया है। चंद राइस मिलों पर कुछ बकाया है। उसके लिए यह प्रयास किया जा रहा है कि सरकार कुछ और समय दे दे। विभाग ने भी इसके लिए केंद्र सरकार से सिफारिश की है। उम्मीद है कि केंद्र सरकार से कुछ और समय मिल जाएगा। समय बढ़ जाता है तो चावल देने में अमसर्थ रहे राइस मिलों पर कार्रवाई भी नहीं होगी और सरकार को चावल भी मिल जाएगा।
-विनोद गोयल, वरिष्ठ उप प्रधान-हरियाणा राइस मिलर्स एसोसिएशन।
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