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आउटसोर्सिंग कर्मचारी : रोडवेज में ड्राइवर लगने पर जुड़ा रिश्ता जो दस दिन बाद हटाने पर टूट गया
Updated Tue, 06 Nov 2018 12:23 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। परिवहन विभाग द्वारा आउटसोर्सिंग के कर्मचारियों हटाया से जहां कर्मचारी बेरोजगार हुए हैं तो वहीं एक कर्मचारी का रिश्ता भी टूट गया जो दस दिन ही चला। कैथल के गांव पाडला निवासी पवन ने बताया कि वह दसवीं पास है और उसके पास ड्राइविंग लाइसेंस भी है।
रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल होने पर वह सीधी भर्ती में 20 अक्तूबर को आउटसोर्सिंग पॉलिसी वन के तहत भर्ती हो गया। नौकरी लगने की खुशी में घर वालों में लड्डू भी बांटे और खुशी मनाई। जब इस बात का रिश्तेदारों को पता चला तो दो दिन बाद 22 अक्तूबर को लड़की का बात उसे देखने भी आया और उसका रिश्ता तय हो गया। घर में खुशी का माहौल था हर कोई खुश था लेकिन घर में यह खुशी दस दिन ही रही, क्योंकि रोडवेज के कर्मचारी हड़ताल खत्म कर बसों पर वापस लौट गए तो परिवहन विभाग ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया। यह सुनते ही घर के सदस्यों को बाहरी धक्का लगा लेकिन जब इस बात को लड़की के पिता को पता चला तो उसने फोन कर रिश्ता भी तोड़ दिया। अब वह नौकरी की तलाश में धक्के खा रहा है। इतना ही नहीं सिरसा की तीन लड़कियां भी आज घर पर बैठी हुई हैं जो रोडवेज में कंडक्टर लगी थी।
सीएम ने लगवाया था शुगर मिल में, नौकरी छोड़ लगा था कंडक्टर, अब खा रहा है धक्के
गांव शेखपुरा के जागीर ने बताया कि उसकी पांच बेटियां हैं। नौकरी ना होने के कारण वह उन्हें पढ़ा नहीं पा रहा था। इस लिए पिछले साल सीएम के खुले दरबार में उसने नौकरी की गुहार लगाई थी, सीएम के कहने पर उसे शुगर मिल में पर्ची काटने की नौकरी मिल गई थी। कुछ दिन पहले जब उसे पता चला की रोडवेज में खुली भर्ती है तो उसने वह नौकरी छोड़कर यहां कंडक्टर की नौकरी की। सोचा था कि यहां से घर का गुजार अच्छे से हो जाएगा लेकिन सरकार ने कुछ ही दिनों में उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया। आज वह बेरोजगार है और घर का गुजारा करना भी मुश्किल हो गया है क्योंकि बेटियों की शादी भी करनी है।
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पत्नी के नहीं है हाथ, नौकरी के चक्कर में बेच दिया था दुकान का सामान
कैथल के गांव सीवन निवासी अकबर अली ने बताया कि उसकी पत्नी शीला को करंट लगने पर उसके दोनों हाथ चले गए। उसके पास तीन लड़कियां व एक लड़का है। वह लुहार का काम करता था। रोडवेज में कंडक्टर लगने पर उसने दुकान का सारा सामान बेच दिया। लेकिन अब वह बेरोजगार है दुकान भी दोबारा नहीं चला सकता।
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करनाल। परिवहन विभाग द्वारा आउटसोर्सिंग के कर्मचारियों हटाया से जहां कर्मचारी बेरोजगार हुए हैं तो वहीं एक कर्मचारी का रिश्ता भी टूट गया जो दस दिन ही चला। कैथल के गांव पाडला निवासी पवन ने बताया कि वह दसवीं पास है और उसके पास ड्राइविंग लाइसेंस भी है।
रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल होने पर वह सीधी भर्ती में 20 अक्तूबर को आउटसोर्सिंग पॉलिसी वन के तहत भर्ती हो गया। नौकरी लगने की खुशी में घर वालों में लड्डू भी बांटे और खुशी मनाई। जब इस बात का रिश्तेदारों को पता चला तो दो दिन बाद 22 अक्तूबर को लड़की का बात उसे देखने भी आया और उसका रिश्ता तय हो गया। घर में खुशी का माहौल था हर कोई खुश था लेकिन घर में यह खुशी दस दिन ही रही, क्योंकि रोडवेज के कर्मचारी हड़ताल खत्म कर बसों पर वापस लौट गए तो परिवहन विभाग ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया। यह सुनते ही घर के सदस्यों को बाहरी धक्का लगा लेकिन जब इस बात को लड़की के पिता को पता चला तो उसने फोन कर रिश्ता भी तोड़ दिया। अब वह नौकरी की तलाश में धक्के खा रहा है। इतना ही नहीं सिरसा की तीन लड़कियां भी आज घर पर बैठी हुई हैं जो रोडवेज में कंडक्टर लगी थी।
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सीएम ने लगवाया था शुगर मिल में, नौकरी छोड़ लगा था कंडक्टर, अब खा रहा है धक्के
गांव शेखपुरा के जागीर ने बताया कि उसकी पांच बेटियां हैं। नौकरी ना होने के कारण वह उन्हें पढ़ा नहीं पा रहा था। इस लिए पिछले साल सीएम के खुले दरबार में उसने नौकरी की गुहार लगाई थी, सीएम के कहने पर उसे शुगर मिल में पर्ची काटने की नौकरी मिल गई थी। कुछ दिन पहले जब उसे पता चला की रोडवेज में खुली भर्ती है तो उसने वह नौकरी छोड़कर यहां कंडक्टर की नौकरी की। सोचा था कि यहां से घर का गुजार अच्छे से हो जाएगा लेकिन सरकार ने कुछ ही दिनों में उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया। आज वह बेरोजगार है और घर का गुजारा करना भी मुश्किल हो गया है क्योंकि बेटियों की शादी भी करनी है।
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कैथल के गांव सीवन निवासी अकबर अली ने बताया कि उसकी पत्नी शीला को करंट लगने पर उसके दोनों हाथ चले गए। उसके पास तीन लड़कियां व एक लड़का है। वह लुहार का काम करता था। रोडवेज में कंडक्टर लगने पर उसने दुकान का सारा सामान बेच दिया। लेकिन अब वह बेरोजगार है दुकान भी दोबारा नहीं चला सकता।