फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Karnal News ›   कारगिल शहीदों का यह कैसा सम्मान, शहीदों के नाम पर लाइब्रेरी में लटक रहे ताले

कारगिल शहीदों का यह कैसा सम्मान, शहीदों के नाम पर लाइब्रेरी में लटक रहे ताले

Wed, 26 Jul 2017 12:07 AM IST
Updated Wed, 26 Jul 2017 12:07 AM IST
विज्ञापन
कारगिल शहीदों का यह कैसा सम्मान, शहीदों के नाम पर लाइब्रेरी में लटक रहे ताले
अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन

इंद्री/बल्ला (करनाल )।
देश की सरहदों की रक्षा करते हुए प्राण गंवाने वाले जिले के शहीदों को बदलती सरकारें वक्त के साथ भूल गई हैं। यही कारण है इन शहीदों के नाम पर इंद्री और बल्ला में लाइब्रेरी तो बना दी गई, लेकिन आज तक उनमें एक भी किताबें नहीं पहुंची। कारगिल युद्घ के दौरान शहीद हुए इंद्री के शहीद सिपाही प्रवेश कुमार के नाम पर बने लाइब्रेरी में अब आंगनबाड़ी केंद्र चल रहा है। सरकारें इन शहीदों को भले ही भूल गई हो, लेकिन जिले के लोग अपने इन वीर सपूतों पर आज भी नाज करते हैं। यही कारण है कि इन शहीदों के नाम से ही आज इनके गांव की पहचान है।
इंद्री के मुखाला गांव के ग्रामीणों व हल्का वासियों को शहीद प्रवेश कुमार की शहादत पर आज भी नाज है। किसान पिता रामेश्वर दास की आंखें आज भी अपने बेटे को याद में नम हो जाती हैं। शहीद प्रवेश 1996 में सिपाही के पद पर सेना में भर्ती हुए थे। 1999 में जब कारगिल का युद्घ शुरू हुआ तो वे अपनी बटालियन के साथ दुश्मनों से मोर्चा लेने सीमा पर पहुंच गई। जहां पर वे अपने सीनियर की रक्षा करते हुुए 6 जून को शहीद हो गए। उस दिन को याद कर पिता रामेश्वर दास ने कहा कि जब बेटे की शहादत की खबर मिली तो दुख के साथ खुशी भी हुई कि मेरा बेटा देश की हिफाजत करते हुए शहीद हो गया। उन्होंने कहा कि तत्कालीन सरकार ने उस समय शहीद प्रवेश कुमार के नाम पर एक सड़क व एक लाइब्रेरी का निर्माण तो करवा दिया, लेकिन गांव में खोली गई इस लाइब्रेरी में आज तक किताबें नहीं पहुंची। अब तो लाइब्रेरी के भवन में आंगनबाड़ी केंद्र चलाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि शहीद के परिवार को सरकार की ओर से गैस एजेंसी दी गई लेकिन वो भी अपने हल्के की बजाए यहां से 50 किलोमीटर दूर निसिंग क्षेत्र में दी गई है। जिसके कारण परिवार अब निसिंग में रहने के लिए मजबूर है। सरकार की इस अनदेखी से ग्रामीणों में रोष है। ग्रामीणों ने बताया कि घोषणा में सरकार द्वारा शहीद परिवार को करनाल में एक दुकान दी जानी थी जो अभी नहीं दी गई। इसके अलावा सरकार द्वारा गांव में स्टेडियम और जिम खोलने का आश्वासन भी दिया गया था।
विज्ञापन

---------------------------------
सरकार की अनदेखी से शहीद परिवार में गुस्सा
कारगिल में शहीद हुए बल्ला गांव के शहीद गुलाब सिंह 21 जून 1999 में ब्रास सेक्टर में हुए बम ब्लास्ट में चार जवानों के साथ शहीद हुए थे। आज भी ग्रामीणों की आंखें जहां शहीद को याद कर नम हो जाती हैं, वहीं सरकार की अनदेखी से गुस्सा भी है। शहीद के पिता नंद लाल मान ने एवं माता मेहरो देवी ने बताया कि शहादत के बाद गांव में शहीद गुलाब की प्रतिमा लगाई गई। जिसको लगे 18 साल गुजर गए, लेकिन आज तक यहां पर न तो कोई प्रशासनिक अधिकारी पहुंचा और न ही नेता। उन्होंने बताया कि शहीद गुलाब के नाम से बनी लाइब्रेरी में बनने के बाद से ताला लटक रहा है। यहां पर आज तक कोई किताब नहीं आई। जिसके कारण ग्रामीणों को इस लाइब्रेरी का लाभ नहीं मिल पाया। माता मेहरो देवी ने बताया कि शहीद गुलाब सिंह के नाम पर करनाल मार्केट कमेटी की ओर से दी गई दुकान पर आज तक शहीद परिवार को कब्जा नहीं मिल पाया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed