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हड़ताल के विरोध में आई सीजीसी, एसडीएम को सौंपा ज्ञापन
Updated Thu, 18 Oct 2018 12:12 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। सिटीजंस ग्रीवेंसीज कमेटी ने हरियाणा रोडवेज कर्मचारियों द्वारा रखी गई हड़ताल को लेकर एसडीएम से मुलाकात की। मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन एसडीएम को सौंपा गया।
इस मौके पर चेयरमैन एसएम कुमार ने कहा कि हरियाणा रोडवेज निम्न एवं मध्यम वर्ग के आम नागरिकों के लिए परिवहन का एक आवश्यक साधन है। लाखों विद्यार्थी एवं अन्य यात्री प्रतिदिन इन बसों में यात्रा करते हैं। वर्तमान में किसी भी रूट पर जरूरत के अनुरूप बसें नहीं चल पा रही हैं, जिस कारण यात्रियों को बसों की छतों पर बैठकर यात्रा करनी पड़ती है। इसी ओवर लोडिंग की वजह से कुछ दिन पूर्व मुगल माजरा के समीप दुर्घटना हो चुकी है, जिसमें अभी तक चार लोग अपनी जान गंवा चुके हैं और 50 लोग घायल हुए। ज्ञापन में कहा गया कि यदि सरकार अनुबंध आधार पर अधिक बसें चलाती है तो आम जनता के लिए हितकारी ही है।
यह वर्तमान कर्मचारियों की भलाई में क्यों नहीं है जनता कर्मचारियों से यह पूछना चाहती है। कहा गया कि हड़ताल के दौरान गरीबों, महिलाओं और अशक्तजनों की परेशानियों को देखकर ऐसा लगता है कि प्रजातंत्र में जनता द्वारा चुने गए जनसेवक तथा जनता के टैक्स के धन से तन वाह पाने वाले कर्मचारियों को आम नागरिकों के मौलिक अधिकारों की परवाह नहीं है। सीजीसी ने रोडवेज कर्मचारियों से हड़ताल रखने की बजाय अपने विरोध का वैकल्पिक मार्ग खोजने का आह्वान किया है। इस अवसर पर संदीप लाठर, सचिव प्रो. एसके शर्मा, ओपी सचदेवा, संजय बतरा, केएल विरमानी और सोमदत्त सैनी मौजूद रहे।
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करनाल। सिटीजंस ग्रीवेंसीज कमेटी ने हरियाणा रोडवेज कर्मचारियों द्वारा रखी गई हड़ताल को लेकर एसडीएम से मुलाकात की। मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन एसडीएम को सौंपा गया।
इस मौके पर चेयरमैन एसएम कुमार ने कहा कि हरियाणा रोडवेज निम्न एवं मध्यम वर्ग के आम नागरिकों के लिए परिवहन का एक आवश्यक साधन है। लाखों विद्यार्थी एवं अन्य यात्री प्रतिदिन इन बसों में यात्रा करते हैं। वर्तमान में किसी भी रूट पर जरूरत के अनुरूप बसें नहीं चल पा रही हैं, जिस कारण यात्रियों को बसों की छतों पर बैठकर यात्रा करनी पड़ती है। इसी ओवर लोडिंग की वजह से कुछ दिन पूर्व मुगल माजरा के समीप दुर्घटना हो चुकी है, जिसमें अभी तक चार लोग अपनी जान गंवा चुके हैं और 50 लोग घायल हुए। ज्ञापन में कहा गया कि यदि सरकार अनुबंध आधार पर अधिक बसें चलाती है तो आम जनता के लिए हितकारी ही है।
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यह वर्तमान कर्मचारियों की भलाई में क्यों नहीं है जनता कर्मचारियों से यह पूछना चाहती है। कहा गया कि हड़ताल के दौरान गरीबों, महिलाओं और अशक्तजनों की परेशानियों को देखकर ऐसा लगता है कि प्रजातंत्र में जनता द्वारा चुने गए जनसेवक तथा जनता के टैक्स के धन से तन वाह पाने वाले कर्मचारियों को आम नागरिकों के मौलिक अधिकारों की परवाह नहीं है। सीजीसी ने रोडवेज कर्मचारियों से हड़ताल रखने की बजाय अपने विरोध का वैकल्पिक मार्ग खोजने का आह्वान किया है। इस अवसर पर संदीप लाठर, सचिव प्रो. एसके शर्मा, ओपी सचदेवा, संजय बतरा, केएल विरमानी और सोमदत्त सैनी मौजूद रहे।
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