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ग्रामीण आजीविका मशन से दस हजार महिलाएं बनी सशक्त, बोली आज हम किसी की मोहताज नहीं हैं
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अमर उजाला ब्यूरो
करनाल। गांव में महिलाओं को अपने अधिकारों रोजगार सामाजिक और आर्थिक स्थिति से निपटने के लिए हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ने करीब दस हजार महिलाओं को सशक्त करने का काम किया है। महिलाओं ने गांव को खुले में शौच मुक्त करना और पॉलिथीन मुक्त अभियान में अपना अहम योगदान दिया है। महिलाओं का कहना है की इस संगठन से जुड़कर साहूकारों के कर्ज से मुक्ति मिली है और अपना रोजगार करने में सफलता हासिल की है।
2014 में हुई थी मिशन की शुरुआत
सरकार की ओर से हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन जून 2014 में शुरू किया गया था, जिसमें महिलाओं को सशक्त करने के लिए घरौंडा और मूनक में ग्रामीण आजीविका मिशन खंड प्रबंधक कार्यक्रम की इंचार्ज कविता को जिम्मेवारी सौंपी गई थी। उन्होंने इस कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए गांव-गांव जाकर इस मिशन की स्कीमों के बारे में जानकारी दी और महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ने का काम किया।
घरौंडा व मूनक में बनाये 930 स्वयं समूह
घरौंडा व मूनक क्षेत्र में 930 स्वयं समूह बनाये गए हैं, जिसमें लगभग दस हजार महिलाएं जुड़ चुकी हैं। इनके गांव में ग्राम स्तर पर ग्राम संगठन बनाए गए हैं। इस संगठन में गांव की महिलाएं सामाजिक व आर्थिक समस्याएं लेकर आती हैं। ग्रुप से जुड़ी महिलाएं इनकी समस्याओं का समाधान करने पर मंथन करती हैं और ज्यादातर का निदान अपने स्तर पर कर देती हैं। जिन समस्याओं का समाधान नहीं होता उनको क्लस्टर फेडरेशन में रखती हैं। क्षेत्र में इस तरह से चार फेडरेशन बनाए गए हैं। अगर वहां भी समाधान नहीं होता तो एडीसी के संज्ञान में मामला भेज कर हल किया जाता है।
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रोजगार की बने साधन स्वयं सहायता समूह
इंचार्ज कविता ने बताया की महिलाओं को बैंकों से बिना ब्याज के लोन दिलवाए जाते हैं और उनके परिवार के मुखिया को आजीविका कमाने के लिए कोई न कोई साधन मुहैया करवाया जाता है। गरीब परिवार की महिला को ग्रामीण आजीविका एक्सप्रेस योजना के तहत छह गाड़ियां दिलवाई गईं, जिसमें तीन टाटा मैजिक और तीन ऑटो शामिल हैं। परिवार के मुखिया इन वाहनों को चलाकर अपने परिवार की आजीविका कमा रहे हैं। सरकार की तरफ से पांच साल तक किस्त जमा करवाने की सुविधा दी जा रही है।
क्या कहती है महिलाएं?
स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिला सीमा, मिनाक्षी, सरिता, पूजा, स्वर्ण व अन्य ने बताया कि जब से वे ग्रुप में शामिल हुई है उन्हें अपने अधिकारों को साथ साथ सामाजिक व आर्थिक स्थिति का काफी ज्ञान हो गया है। वे पहले गांव में साहूकारों से कर्ज लेकर अपना कार्य शुरू करती थीं, लेकिन अब वे बैंकों से सीधा लोन लेकर अपने कारोबारों को बढ़ावा दे रही है। आज वे किसी की मोहताज नहीं है। उन्होंने बताया कि उनको संगठन से जुड़कर जन प्रतिनिधि बनने का भी मौका मिला है।
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करनाल। गांव में महिलाओं को अपने अधिकारों रोजगार सामाजिक और आर्थिक स्थिति से निपटने के लिए हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ने करीब दस हजार महिलाओं को सशक्त करने का काम किया है। महिलाओं ने गांव को खुले में शौच मुक्त करना और पॉलिथीन मुक्त अभियान में अपना अहम योगदान दिया है। महिलाओं का कहना है की इस संगठन से जुड़कर साहूकारों के कर्ज से मुक्ति मिली है और अपना रोजगार करने में सफलता हासिल की है।
2014 में हुई थी मिशन की शुरुआत
सरकार की ओर से हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन जून 2014 में शुरू किया गया था, जिसमें महिलाओं को सशक्त करने के लिए घरौंडा और मूनक में ग्रामीण आजीविका मिशन खंड प्रबंधक कार्यक्रम की इंचार्ज कविता को जिम्मेवारी सौंपी गई थी। उन्होंने इस कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए गांव-गांव जाकर इस मिशन की स्कीमों के बारे में जानकारी दी और महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ने का काम किया।
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घरौंडा व मूनक में बनाये 930 स्वयं समूह
घरौंडा व मूनक क्षेत्र में 930 स्वयं समूह बनाये गए हैं, जिसमें लगभग दस हजार महिलाएं जुड़ चुकी हैं। इनके गांव में ग्राम स्तर पर ग्राम संगठन बनाए गए हैं। इस संगठन में गांव की महिलाएं सामाजिक व आर्थिक समस्याएं लेकर आती हैं। ग्रुप से जुड़ी महिलाएं इनकी समस्याओं का समाधान करने पर मंथन करती हैं और ज्यादातर का निदान अपने स्तर पर कर देती हैं। जिन समस्याओं का समाधान नहीं होता उनको क्लस्टर फेडरेशन में रखती हैं। क्षेत्र में इस तरह से चार फेडरेशन बनाए गए हैं। अगर वहां भी समाधान नहीं होता तो एडीसी के संज्ञान में मामला भेज कर हल किया जाता है।
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रोजगार की बने साधन स्वयं सहायता समूह
इंचार्ज कविता ने बताया की महिलाओं को बैंकों से बिना ब्याज के लोन दिलवाए जाते हैं और उनके परिवार के मुखिया को आजीविका कमाने के लिए कोई न कोई साधन मुहैया करवाया जाता है। गरीब परिवार की महिला को ग्रामीण आजीविका एक्सप्रेस योजना के तहत छह गाड़ियां दिलवाई गईं, जिसमें तीन टाटा मैजिक और तीन ऑटो शामिल हैं। परिवार के मुखिया इन वाहनों को चलाकर अपने परिवार की आजीविका कमा रहे हैं। सरकार की तरफ से पांच साल तक किस्त जमा करवाने की सुविधा दी जा रही है।
क्या कहती है महिलाएं?
स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिला सीमा, मिनाक्षी, सरिता, पूजा, स्वर्ण व अन्य ने बताया कि जब से वे ग्रुप में शामिल हुई है उन्हें अपने अधिकारों को साथ साथ सामाजिक व आर्थिक स्थिति का काफी ज्ञान हो गया है। वे पहले गांव में साहूकारों से कर्ज लेकर अपना कार्य शुरू करती थीं, लेकिन अब वे बैंकों से सीधा लोन लेकर अपने कारोबारों को बढ़ावा दे रही है। आज वे किसी की मोहताज नहीं है। उन्होंने बताया कि उनको संगठन से जुड़कर जन प्रतिनिधि बनने का भी मौका मिला है।