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Kaithal News: जिला नागरिक अस्पताल में मनाया विश्व थैलेसीमिया दिवस
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जिला नागरिक अस्पताल में आयोजित कार्यक्रम में मौजूद कर्मचारी। संवाद
कैथल। थैलेसीमिया पखवाड़ा के तहत जिला नागरिक अस्पताल में लोगों को जागरूक करने के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में रोहतक से विशेषज्ञों की टीम पहुंची और लोगों को थैलेसीमिया बीमारी, उसके लक्षण, कारण और बचाव के उपायों के बारे में जानकारी दी।
इस मौके पर जिला नागरिक अस्पताल के चिकित्सक डॉ़ अनिल अग्रवाल ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग का उद्देश्य लोगों को इस गंभीर बीमारी के प्रति जागरूक करना और समय रहते जांच के लिए प्रेरित करना है।
उन्होंने कहा कि थैलेसीमिया पखवाड़ा 8 मई से शुरू हुआ है। इसके तहत विभिन्न स्तरों पर जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर भी लोगों को बीमारी के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
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विशेषज्ञ ने बताया कि थैलेसीमिया एक आनुवंशिक बीमारी है जिसमें शरीर में खून की कमी होने लगती है। इस बीमारी से पीड़ित मरीजों को नियमित अंतराल पर खून चढ़ाने की आवश्यकता पड़ती है। कई गंभीर मरीजों को हर 15 दिन में रक्त चढ़ाना पड़ता है जिससे शरीर में खून का स्तर सामान्य बना रहे और स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं से बचा जा सके।
विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर जांच और जागरूकता के जरिये इस बीमारी को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। विवाह से पहले और गर्भावस्था के दौरान थैलेसीमिया जांच कराने से इस बीमारी की रोकथाम में मदद मिल सकती है।
थैलेसीमिया के प्रमुख लक्षण
शरीर में लगातार खून की कमी होना
कमजोरी और जल्दी थकान महसूस होना
चेहरा पीला पड़ना
बच्चों की शारीरिक वृद्धि धीमी होना
बार-बार चक्कर आना
सांस फूलना
भूख कम लगना
पेट का बढ़ना
गंभीर मामलों में हड्डियों के आकार में बदलाव
बचाव के लिए जरूरी टेस्ट
थैलेसीमिया को रोकने के लिए शादी से पहले और गर्भावस्था के दौरान जांच बेहद जरूरी मानी जाती है।
इसमें सीबीसी से खून की कमी और लाल रक्त कोशिकाओं की स्थिति पता चलती है।
एचबी इलेक्ट्रोफोरेसिस थैलेसीमिया कैरियर या बीमारी की पहचान के लिए सबसे महत्वपूर्ण जांच है।
एचपीएलसी टेस्ट :
हीमोग्लोबिन के प्रकार और थैलेसीमिया की सटीक जांच के लिए जेनेटिक टेस्ट की सलाह दी जाती है। यह टेस्ट परिवार में थैलेसीमिया का इतिहास होने पर कराया जाता है।
प्रेग्नेंसी में प्रसवपूर्व जांच
गर्भ में बच्चे में थैलेसीमिया की जांच के लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार यदि विवाह से पहले लड़का-लड़की दोनों थैलेसीमिया कैरियर जांच करवा लें, तो इस बीमारी को अगली पीढ़ी तक पहुंचने से काफी हद तक रोका जा सकता है।
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इस मौके पर जिला नागरिक अस्पताल के चिकित्सक डॉ़ अनिल अग्रवाल ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग का उद्देश्य लोगों को इस गंभीर बीमारी के प्रति जागरूक करना और समय रहते जांच के लिए प्रेरित करना है।
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उन्होंने कहा कि थैलेसीमिया पखवाड़ा 8 मई से शुरू हुआ है। इसके तहत विभिन्न स्तरों पर जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर भी लोगों को बीमारी के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
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विशेषज्ञ ने बताया कि थैलेसीमिया एक आनुवंशिक बीमारी है जिसमें शरीर में खून की कमी होने लगती है। इस बीमारी से पीड़ित मरीजों को नियमित अंतराल पर खून चढ़ाने की आवश्यकता पड़ती है। कई गंभीर मरीजों को हर 15 दिन में रक्त चढ़ाना पड़ता है जिससे शरीर में खून का स्तर सामान्य बना रहे और स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं से बचा जा सके।
विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर जांच और जागरूकता के जरिये इस बीमारी को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। विवाह से पहले और गर्भावस्था के दौरान थैलेसीमिया जांच कराने से इस बीमारी की रोकथाम में मदद मिल सकती है।
थैलेसीमिया के प्रमुख लक्षण
शरीर में लगातार खून की कमी होना
कमजोरी और जल्दी थकान महसूस होना
चेहरा पीला पड़ना
बच्चों की शारीरिक वृद्धि धीमी होना
बार-बार चक्कर आना
सांस फूलना
भूख कम लगना
पेट का बढ़ना
गंभीर मामलों में हड्डियों के आकार में बदलाव
बचाव के लिए जरूरी टेस्ट
थैलेसीमिया को रोकने के लिए शादी से पहले और गर्भावस्था के दौरान जांच बेहद जरूरी मानी जाती है।
इसमें सीबीसी से खून की कमी और लाल रक्त कोशिकाओं की स्थिति पता चलती है।
एचबी इलेक्ट्रोफोरेसिस थैलेसीमिया कैरियर या बीमारी की पहचान के लिए सबसे महत्वपूर्ण जांच है।
एचपीएलसी टेस्ट :
हीमोग्लोबिन के प्रकार और थैलेसीमिया की सटीक जांच के लिए जेनेटिक टेस्ट की सलाह दी जाती है। यह टेस्ट परिवार में थैलेसीमिया का इतिहास होने पर कराया जाता है।
प्रेग्नेंसी में प्रसवपूर्व जांच
गर्भ में बच्चे में थैलेसीमिया की जांच के लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार यदि विवाह से पहले लड़का-लड़की दोनों थैलेसीमिया कैरियर जांच करवा लें, तो इस बीमारी को अगली पीढ़ी तक पहुंचने से काफी हद तक रोका जा सकता है।

जिला नागरिक अस्पताल में आयोजित कार्यक्रम में मौजूद कर्मचारी। संवाद