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Kaithal News: सुख-समृद्धि की कामना, दंगल भी
Tue, 19 Sep 2023 01:13 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Tue, 19 Sep 2023 01:13 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। नरड़ गांव में जाहर वीर गोगा माड़ी पर वार्षिक मेले का आयोजन किया। इसमें नरड़ गांव सहित आसपास के ग्रामीणों ने गोगा पीर की पूजा अर्चना की और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए कामना की। इसके बाद कुश्ती में पहलवानों ने अपना दमखम दिखाया।
गौरतलब है कि नरड़ गांव में गोगा पीर का हर वर्ष मेला लगता है। यहां पर आसपास के ग्रामीण गोगा पीर की छड़ी लेकर पहुंचते हैं। जो गोगा पीर मंदिर में स्थापित की जाती है। यहां पर पूरे गांव के लोग गेहूं, प्याज, पूड़े से अन्य पूजा सामग्री के गोगा पीर की पूजा अर्चना करते हैं। पूजा अर्चना के बाद गांव में कुश्ती व कबड्डी करवाई जाती है। इसमें जिलेभर से पहलवान भाग लेते हैं और अपने अपने भार वर्ग में युवाओं के साथ कुश्ती करते हैं। कुश्ती के बाद दोनों युवाओं को सम्मानित किया जाता है।
ग्रामीण दीपक, बलिंद्र, सतपाल, वकील, सुनील, पवन, सोनू ने बताया कि नरड़ गांव में हर वर्ष गोगा मेडी मेला लगाया जा है। नरड़ गांव में सन 1969 में गोगा पीर की माड़ी बनी थी, जिसमें आसपास के गांव के महिला व पुरुष पूजा अर्चना के लिए आते हैं। उन्होंने बताया कि धधरेड़ा के बाद गांव में गोगा माड़ी की मान्यता है। जिस प्रकार राजस्थान के धधरेड़ा में गोगा पीर की पूजा-अर्चना होती है, उसी प्रकार गांव में भी दिन में दो बार गोगा पीर की पूजा की जाती है। उन्होंने कहा कि ऐसी मान्यता है प्राचीन समय में जाहर वीर गोगा जी ने नरड़ गांव में एक रात्रि ठहराव किया था। उसी दिन से नरड़ गांव में जाहर वीर गोगा की पूजा अर्चना करनी शुरू कर दी थी। जिसके बाद ग्रामीणों ने माड़ी बनाने की प्रक्रिया शुरू की और सन 1969 में माड़ी बनाई। जिसमें लोग श्रद्धा से पूजा अर्चना करते हैं और वर्ष में एक बार धूमधाम से मेले का आयोजन किया जाता है।
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कैथल। नरड़ गांव में जाहर वीर गोगा माड़ी पर वार्षिक मेले का आयोजन किया। इसमें नरड़ गांव सहित आसपास के ग्रामीणों ने गोगा पीर की पूजा अर्चना की और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए कामना की। इसके बाद कुश्ती में पहलवानों ने अपना दमखम दिखाया।
गौरतलब है कि नरड़ गांव में गोगा पीर का हर वर्ष मेला लगता है। यहां पर आसपास के ग्रामीण गोगा पीर की छड़ी लेकर पहुंचते हैं। जो गोगा पीर मंदिर में स्थापित की जाती है। यहां पर पूरे गांव के लोग गेहूं, प्याज, पूड़े से अन्य पूजा सामग्री के गोगा पीर की पूजा अर्चना करते हैं। पूजा अर्चना के बाद गांव में कुश्ती व कबड्डी करवाई जाती है। इसमें जिलेभर से पहलवान भाग लेते हैं और अपने अपने भार वर्ग में युवाओं के साथ कुश्ती करते हैं। कुश्ती के बाद दोनों युवाओं को सम्मानित किया जाता है।
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ग्रामीण दीपक, बलिंद्र, सतपाल, वकील, सुनील, पवन, सोनू ने बताया कि नरड़ गांव में हर वर्ष गोगा मेडी मेला लगाया जा है। नरड़ गांव में सन 1969 में गोगा पीर की माड़ी बनी थी, जिसमें आसपास के गांव के महिला व पुरुष पूजा अर्चना के लिए आते हैं। उन्होंने बताया कि धधरेड़ा के बाद गांव में गोगा माड़ी की मान्यता है। जिस प्रकार राजस्थान के धधरेड़ा में गोगा पीर की पूजा-अर्चना होती है, उसी प्रकार गांव में भी दिन में दो बार गोगा पीर की पूजा की जाती है। उन्होंने कहा कि ऐसी मान्यता है प्राचीन समय में जाहर वीर गोगा जी ने नरड़ गांव में एक रात्रि ठहराव किया था। उसी दिन से नरड़ गांव में जाहर वीर गोगा की पूजा अर्चना करनी शुरू कर दी थी। जिसके बाद ग्रामीणों ने माड़ी बनाने की प्रक्रिया शुरू की और सन 1969 में माड़ी बनाई। जिसमें लोग श्रद्धा से पूजा अर्चना करते हैं और वर्ष में एक बार धूमधाम से मेले का आयोजन किया जाता है।
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