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बसंत आता है तो प्रकृति सुधरती है और संत आता है तो लोग सुधर जाते है : आचार्य बसंत

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 30 Sep 2026 12:09 AM IST
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When spring arrives, nature is rejuvenated; when a saint arrives, people are transformed: Acharya Basant.
कलायत में कथा सुनाते आचार्य बसंत। संवाद
कलायत। श्री कपिल मुनि मंदिर परिसर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन कथा व्यास आचार्य बसंत जी महाराज ने श्रद्धालुओं को भक्त ध्रुव और प्रह्लाद की कथा सुनाई। कथा व्यास ने श्रद्धालुओं को कथा के माध्यम से लोगों को भक्त व भगवान के बीच के रिश्ते के बारे में समझाया। उन्होंने कहा कि अगर हम दृढ़ इच्छा व साफ मन से भगवान की भक्ति करते हैं तो भगवान हर परिस्थिति में हमारी सहायता करते हैं। उन्होंने कहा कि बसंत आता है तो प्रकृति सुधर जाती है और संत आता है तो लोग सुधर जाते हैं।
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कथा के माध्यम से उन्होंने विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से बताया कि किस तरह से भक्ति के आगे भगवान झुकते हैं। उन्होंने कहा कि बालक ध्रुव ने अपमान को कमजोरी नहीं बनने दिया और दृढ़ संकल्प व भक्ति से परम पद पाया। भरत प्रसंग से मोह-माया से सावधान रहने और भारतवर्ष की महिमा बताते हुए मानव जीवन को दुर्लभ बताया। अजामिल प्रसंग की व्याख्या करते हुए भगवान की महिमा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भगवान का स्मरण और सत्संग जीवन में आध्यात्मिक चेतना का संचार करता है।
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आचार्य बसंत ने कहा कि कुसंग से बचना और सत्संग को अपनाना अत्यंत आवश्यक है। सत्संग मनुष्य के भीतर से अहंकार, क्रोध, लोभ और नकारात्मकता को दूर कर उसे धर्म, सेवा, विनम्रता और भगवान की भक्ति के मार्ग पर अग्रसर करता है। आपके जीवन में आपको सद्गुरु मिल जाए तो समझ लेना कि अब ये गोविंद का इशारा है कि गुरु तो आ गए हैं अब गोविंद भी आने वाले हैं। इसलिए जब जीवन में सद्गुरु मिल जाए तो समझ लेना अब प्रभु बहुत प्रसन्न हैं और हम पर भी कृपा बरसने लगी है। श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन नारद जी के पूर्वजन्म की कथा भी सुनाई गई। उन्होंने कहा कि हर सनातनी माता-पिता को अपने बच्चों को सनातन का ज्ञान देना बहुत जरूरी है। हर घर में बच्चों को गीता और रामायण का पाठ पढ़ाया और सिखाया जाए ताकि उनके जीवन में संस्कार, अनुशासन और सच्चे मूल्यों की नींव मजबूत हो सके।
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आचार्य बसंत ने कहा कि किस्मत वाले लोगों को सत्संग सुनने को मिलता है। सत्संग में सुनी बातों को हमें अपने जीवन में लागू करना चाहिए। उन्होंने बताया कि पहले एक ही वेद था लेकिन वेद व्यास जी ने चार वेद लिखे। पहले के समय एक ओम शब्द के उच्चारण से सभी सवालों के जवाब मिल जाते थे लेकिन कलयुग के आने पर बाकी वेद लिखे गए। उन्होंने कहा कि इनमें चार बातों को लिखा गया है। पहली धर्म कैसे किया जाए। दूसरी मोक्ष कैसे मिले, तीसरी हमें वही काम करना चाहिए जिससे संतुष्टि मिले और चौथी संत और बसंत दोनों एक जैसे आते है। बसंत आता है तो प्रकृति सुधर जाती है और संत आता है तो लोग सुधर जाते हैं। कथा के दौरान भजनों पर श्रद्धालु झूम कर नाचे।

कलायत में कथा सुनाते आचार्य बसंत। संवाद

कलायत में कथा सुनाते आचार्य बसंत। संवाद

कलायत में कथा सुनाते आचार्य बसंत। संवाद

कलायत में कथा सुनाते आचार्य बसंत। संवाद

कलायत में कथा सुनाते आचार्य बसंत। संवाद

कलायत में कथा सुनाते आचार्य बसंत। संवाद

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