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Kaithal News: स्क्वाड्रन लीडर महेश चंद्र के स्मारक का अनावरण
Sat, 19 Jul 2025 12:07 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sat, 19 Jul 2025 12:07 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, कैथल में शुक्रवार को शहीद स्क्वाड्रन लीडर महेश चंद्र गुलाटी के स्मारक का अनावरण किया गया। यह वही विद्यालय है जहां से उन्होंने शिक्षा की शुरुआत की थी।
बाद में उन्होंने अहमदाबाद से एमएससी के रूप में अपनी उच्च शिक्षा पूरी की और आरकेएसडी कॉलेज में प्रोफेसर के रूप में सेवा दी। इसके बाद उनका मन मातृभूमि की सेवा की ओर मुड़ा और उन्होंने वायुसेना की वर्दी धारण की। नगर परिषद अध्यक्ष सुरभि गर्ग ने स्मारक का अनावरण किया। इस मौके पर नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी दीपक कुमार भी उपस्थित रहे।
शहीद महेश गुलाटी ने वायुसेना में रहते हुए 20 वर्षों तक देश की सेवा की। 22 मार्च 1986 को वह काला दिवस बन गया जब लद्दाख में भीषण बर्फीली आंधी, कोहरा और धुंध के बीच उन्होंने पठानकोट एयरबेस से लेह-लद्दाख के लिए एक इमरजेंसी उड़ान भरी। उन्हें जब यह जानकारी मिली कि हमारे सैनिक सीमाओं पर भूखे-प्यासे, गोला-बारूद की कमी के बीच डटे हुए हैं, तो वे अपने कर्तव्य के आगे किसी प्रोटोकॉल की परवाह किए बिना उड़ान पर निकल पड़े। उन्होंने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।
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शहीदों के कारण हम खुली हवा में सांस ले रहे ः सुरभि गर्ग
स्मारक अनावरण पर अध्यक्ष सुरभि गर्ग ने कहा कि मैं स्वयं को गर्वित महसूस करती हूं कि मुझे ऐसे शूरवीर योद्धा के स्मारक का अनावरण करने का सौभाग्य मिला। यह स्मारक नई पीढ़ी को राष्ट्र सेवा की प्रेरणा देता रहेगा।
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कैथल। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, कैथल में शुक्रवार को शहीद स्क्वाड्रन लीडर महेश चंद्र गुलाटी के स्मारक का अनावरण किया गया। यह वही विद्यालय है जहां से उन्होंने शिक्षा की शुरुआत की थी।
बाद में उन्होंने अहमदाबाद से एमएससी के रूप में अपनी उच्च शिक्षा पूरी की और आरकेएसडी कॉलेज में प्रोफेसर के रूप में सेवा दी। इसके बाद उनका मन मातृभूमि की सेवा की ओर मुड़ा और उन्होंने वायुसेना की वर्दी धारण की। नगर परिषद अध्यक्ष सुरभि गर्ग ने स्मारक का अनावरण किया। इस मौके पर नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी दीपक कुमार भी उपस्थित रहे।
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शहीद महेश गुलाटी ने वायुसेना में रहते हुए 20 वर्षों तक देश की सेवा की। 22 मार्च 1986 को वह काला दिवस बन गया जब लद्दाख में भीषण बर्फीली आंधी, कोहरा और धुंध के बीच उन्होंने पठानकोट एयरबेस से लेह-लद्दाख के लिए एक इमरजेंसी उड़ान भरी। उन्हें जब यह जानकारी मिली कि हमारे सैनिक सीमाओं पर भूखे-प्यासे, गोला-बारूद की कमी के बीच डटे हुए हैं, तो वे अपने कर्तव्य के आगे किसी प्रोटोकॉल की परवाह किए बिना उड़ान पर निकल पड़े। उन्होंने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।
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शहीदों के कारण हम खुली हवा में सांस ले रहे ः सुरभि गर्ग
स्मारक अनावरण पर अध्यक्ष सुरभि गर्ग ने कहा कि मैं स्वयं को गर्वित महसूस करती हूं कि मुझे ऐसे शूरवीर योद्धा के स्मारक का अनावरण करने का सौभाग्य मिला। यह स्मारक नई पीढ़ी को राष्ट्र सेवा की प्रेरणा देता रहेगा।