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Kaithal News: रेत की कला से दिखाई गौरव गाथा
Thu, 18 Dec 2025 12:26 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Thu, 18 Dec 2025 12:26 AM IST
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कलाकृति का प्रदर्शन करते कलाकार।
- फोटो : जामों-भादर मार्ग पर विस्फोट के बाद पड़ा सिलिंडर।
संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। वीर बाल दिवस के उपलक्ष्य में राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, जाखौली अड्डा में बुधवार को एक भव्य सैंड आर्ट शो (रेत कला प्रदर्शनी) तथा जिला स्तरीय निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में चारों साहिबजादों—बाबा अजीत सिंह, बाबा जुझार सिंह, बाबा जोरावर सिंह और साहिबजादा बाबा फतेह सिंह की अद्वितीय शहादत को अनूठे और भावपूर्ण तरीके से श्रद्धांजलि दी गई। कलाकार ने अपनी रेत की कला से गौरव गाथा दिखाई।
सैंड आर्ट शो के माध्यम से चारों छोटे साहिबजादों की वीर गाथा और सर्वोच्च बलिदान को इतने जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया कि दर्शक भाव-विह्वल हो उठे। यह आयोजन सूचना, जनसंपर्क एवं भाषा विभाग, शिक्षा विभाग तथा कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग ने किया था। एनसीबी प्रोडक्शन के सैंड आर्टिस्ट सर्वम पटेल द्वारा प्रस्तुत इस शो में साहिबजादों के जीवन के महत्वपूर्ण अध्यायों को क्रमबद्ध और कलात्मक ढंग से उकेरा गया।
हल्के संगीत और मार्मिक कथन के साथ कलाकार ने रेत के कणों को आकार देते हुए गुरु गोबिंद सिंह महाराज के चारों शूरवीर पुत्रों की पूरी यात्रा को सामने जीवंत कर दिया। शो की शुरुआत उस भावनात्मक क्षण से हुई जब छोटे साहिबजादे और उनकी दादी माता गुजरी मुगल सेना से संघर्ष के दौरान गुरु साहिब से बिछड़ गए थे। इसके बाद सरहिंद के ठंडे बुर्ज में माता गुजरी और साहिबजादों की कैद का दृश्य सैंड आर्ट के माध्यम से प्रस्तुत किया गया, जिसे देखकर दर्शकों की आंखें नम हो गईं।
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जिला शिक्षा अधिकारी सुरेश कुमार ने कहा कि सैंड आर्ट शो से चारों साहिबजादों की संपूर्ण शौर्यगाथा का प्रेरणादायक चित्रण किया गया है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के दिशा-निर्देश पर प्रदेशभर में ऐसे शो आयोजित कर साहिबजादों के बलिदान को जन-जन तक पहुँचाने का सफल प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस विषय पर खंड एवं जिला स्तर पर चार भाषाओं में निबंध प्रतियोगिता करवाई जा रही है, जिसके बाद प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिता भी आयोजित की जाएगी। इस अवसर पर अधीक्षक सुरेश कौशिक, सहायक सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी अमित कौशिक, राहुल शर्मा, सुशील कुमार, कुशल कुमार और विनोद आर्य उपस्थित रहे।
मार्मिक दृश्य…
शो का सबसे भावुक दृश्य वह था, जब छोटे साहिबजादों को बार-बार इस्लाम कबूल करने के लिए दबाव और धमकियां दी गईं, लेकिन दोनों ने निडर होकर “बोले सो निहाल, सत श्री अकाल” का उद्घोष करते हुए अपने धर्म और साहस पर अडिग रहने का परिचय दिया।
मात्र 9 और 7 वर्ष की आयु में दोनों साहिबजादों को जीवित दीवार में चिनवा कर शहीद कर दिया गया- यह दृश्य दर्शकों की आत्मा को झकझोर गया। इसके अतिरिक्त, बाबा अजीत सिंह और बाबा जुझार सिंह मुगलों के साथ युद्ध करते हुए शहीद हुए, लेकिन अत्याचारियों के सामने झुके बिना वीरगति को प्राप्त हुए।
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कैथल। वीर बाल दिवस के उपलक्ष्य में राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, जाखौली अड्डा में बुधवार को एक भव्य सैंड आर्ट शो (रेत कला प्रदर्शनी) तथा जिला स्तरीय निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में चारों साहिबजादों—बाबा अजीत सिंह, बाबा जुझार सिंह, बाबा जोरावर सिंह और साहिबजादा बाबा फतेह सिंह की अद्वितीय शहादत को अनूठे और भावपूर्ण तरीके से श्रद्धांजलि दी गई। कलाकार ने अपनी रेत की कला से गौरव गाथा दिखाई।
सैंड आर्ट शो के माध्यम से चारों छोटे साहिबजादों की वीर गाथा और सर्वोच्च बलिदान को इतने जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया कि दर्शक भाव-विह्वल हो उठे। यह आयोजन सूचना, जनसंपर्क एवं भाषा विभाग, शिक्षा विभाग तथा कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग ने किया था। एनसीबी प्रोडक्शन के सैंड आर्टिस्ट सर्वम पटेल द्वारा प्रस्तुत इस शो में साहिबजादों के जीवन के महत्वपूर्ण अध्यायों को क्रमबद्ध और कलात्मक ढंग से उकेरा गया।
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हल्के संगीत और मार्मिक कथन के साथ कलाकार ने रेत के कणों को आकार देते हुए गुरु गोबिंद सिंह महाराज के चारों शूरवीर पुत्रों की पूरी यात्रा को सामने जीवंत कर दिया। शो की शुरुआत उस भावनात्मक क्षण से हुई जब छोटे साहिबजादे और उनकी दादी माता गुजरी मुगल सेना से संघर्ष के दौरान गुरु साहिब से बिछड़ गए थे। इसके बाद सरहिंद के ठंडे बुर्ज में माता गुजरी और साहिबजादों की कैद का दृश्य सैंड आर्ट के माध्यम से प्रस्तुत किया गया, जिसे देखकर दर्शकों की आंखें नम हो गईं।
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जिला शिक्षा अधिकारी सुरेश कुमार ने कहा कि सैंड आर्ट शो से चारों साहिबजादों की संपूर्ण शौर्यगाथा का प्रेरणादायक चित्रण किया गया है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के दिशा-निर्देश पर प्रदेशभर में ऐसे शो आयोजित कर साहिबजादों के बलिदान को जन-जन तक पहुँचाने का सफल प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस विषय पर खंड एवं जिला स्तर पर चार भाषाओं में निबंध प्रतियोगिता करवाई जा रही है, जिसके बाद प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिता भी आयोजित की जाएगी। इस अवसर पर अधीक्षक सुरेश कौशिक, सहायक सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी अमित कौशिक, राहुल शर्मा, सुशील कुमार, कुशल कुमार और विनोद आर्य उपस्थित रहे।
मार्मिक दृश्य…
शो का सबसे भावुक दृश्य वह था, जब छोटे साहिबजादों को बार-बार इस्लाम कबूल करने के लिए दबाव और धमकियां दी गईं, लेकिन दोनों ने निडर होकर “बोले सो निहाल, सत श्री अकाल” का उद्घोष करते हुए अपने धर्म और साहस पर अडिग रहने का परिचय दिया।
मात्र 9 और 7 वर्ष की आयु में दोनों साहिबजादों को जीवित दीवार में चिनवा कर शहीद कर दिया गया- यह दृश्य दर्शकों की आत्मा को झकझोर गया। इसके अतिरिक्त, बाबा अजीत सिंह और बाबा जुझार सिंह मुगलों के साथ युद्ध करते हुए शहीद हुए, लेकिन अत्याचारियों के सामने झुके बिना वीरगति को प्राप्त हुए।