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Kaithal News: राजयोगिनी दादी हृदयमोहिनी की बताईं शिक्षाएं

Sun, 16 Mar 2025 12:51 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Sun, 16 Mar 2025 12:51 AM IST
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Teachings of Rajyogini Dadi Hridaymohini
संवाद न्यूज एजेंसी
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कलायत। प्रजापति ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय में दादी गुलजार, दादी जानकी और दादी चंद्रमणी का स्मृति दिवस मनाया गया। इस मौके पर आश्रम प्रमुख बहन रेखा ने राजयोगिनी दादी हृदयमोहिनी की शिक्षाएं बताईं।

उन्होंने कहा कि तीनों ही दादियों ने मार्च मास में ही शरीर छोड़ा था। स्मृति दिवस पर तीनों दादियों को श्रद्धांजलि दी गई और श्रद्धालुओं ने सहभोज का आनंद लिया। आश्रम प्रभारी रेखा बहन ने कहा कि सामान्य जीवन में स्वयं खुश रहना और सभी का स्वागत करना एक स्वस्थ जीवन की निशानी है।
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उन्होंने कहा कि इस सृष्टि में कुछ भी स्थायी नहीं है। हम इस सृष्टि में एक मेहमान के तौर पर आए हैं। इसके अलावा उन्होंने राजयोगिनी दादी हृदयमोहिनी की ओर से दी गई अनमोल शिक्षाओं से भी श्रद्धालुओं को रूबरू करवाया।
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उन्होंने बताया कि दादी हृदयमोहिनी जी के बचपन का नाम शोभा था। बाद में बाबा ने आपको हृदयमोहिनी व गुलजार नाम दिए। जब नौ वर्ष की थीं तब संस्था के साकार संस्थापक ब्रह्मा बाबा की ओर से खोले गए ओम निवास बोर्डिंग स्कूल में दाखिला लिया।

बचपन से ही विशेष योग साधना के चलते दादीजी का व्यक्तित्व इतना दिव्य हो गया था कि उनके संपर्क में आने वाले लोगों को उनकी तपस्या और साधना की अनुभूति होती थी। रेखा बहन ने कहा कि दादीजी कहती थीं कि जीवन में परेशान होने के लिए केवल मात्र पांच शब्द हैं। क्यों, क्या, कौन, कब और कैसे। ये ही पांच शब्द हमें पूरा जीवन परेशान करते हैं।

क्यों, कहां और व्यर्थ संकल्पों की क्यूं चालू हो जाती है। इसने ये कहा, उसने ये कहा और मन में व्यर्थ संकल्प चालू हो जाते हैं, क्योंकि जो बीत चुका वह हमारे हाथ में नहीं है।


उन्होंने शिविर में प्रभु भक्ति के रहस्यों से अवगत करवाया और भक्ति में प्रेम की अनुभूति कैसे हो इसके बारे में भी व्याख्यान दिया। कार्यक्रम की समाप्ति पर उपस्थित सभी श्रद्धालुओं ने एक साथ बैठ कर भोजन ग्रहण किया।
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