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Kaithal News: फिजिक्स, केमिस्ट्री, गणित व बायोलॉजी संग भारतीय ज्ञान परंपरा भी पढ़ेंगे विद्यार्थी
Sat, 06 May 2023 12:48 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sat, 06 May 2023 12:48 AM IST
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कैथल। फिजिक्स, केमिस्ट्री बायोलॉजी, गणित या अन्य आधुनिक विषय पढ़ने वाले विद्यार्थी अब कॉलेजों में विभिन्न विषयों में समृद्ध भारतीय ज्ञान परंपरा की भी पढ़ाई करेंगे। कैथल के महर्षि संस्कृत विश्वविद्यालय ने हमारे ऋषि-मुनियों द्वारा रचित प्राचीन ग्रंथों, पुराणों व अन्य पुस्तकों से ऐसी जानकारी जुटाई है, जिसमें फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी या गणित से संबंधित विषयों को हजारों साल पहले स्पष्ट कर दिया गया था।
दरअसल, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के पाठ्यक्रम में भारतीय ज्ञान परंपरा को पढ़ाने की दिशा में महर्षि संस्कृत विश्वविद्यालय ने कदम बढ़ाया है। इसके लिए नौ प्रारूप (मॉड्यूल) तैयार किए गए हैं, जिन पर तीन दिनों तक कैथल के संस्कृत विश्वविद्यालय में देश भर के विद्वान चर्चा करेंगे। इसके बाद इन सभी प्रारूपों को देश के सभी विश्वविद्यालयों में भेजा जाएगा, ताकि वहां अलग-अलग विषयों के साथ इसकी महत्ता अनुसार उच्च शिक्षा में बच्चों को पढ़ाया जा सके। इसका उद्देश्य है कि भारत में हजारों साल पहले सामने आ चुके ज्ञान से विद्यार्थियों को अवगत करवाना है, ताकि उन्हें गर्व हो कि जो थ्योरी वे अंग्रेजी विद्वानों के नाम से पढ़ रहे हैं, ऐसी थ्योरी भारतीय विद्वान, हमारे ऋषि-मुनि हजारों साल पहले लिखकर जा चुके हैं।
इस संबंध में बातचीत के दौरान विश्वविद्यालय के उप-कुलपति प्रो. रमेश चंद्र भारद्वाज और शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास से डॉ. संजय स्वामी ने विस्तृत जानकारी दी। प्रो. रमेश भारद्वाज ने कहा कि न्यास और विश्वविद्यालय ने मिलकर राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2023 के उच्च शिक्षा में क्रियान्वयन के लिए इस दिशा में काम किया है। भारतीय ज्ञान परंपरा के चयनित नौ विषयों पर पाठ्यक्रम विकसित किया है।
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यूजीसी से किया जाएगा तालमेल-
प्रो. रमेश चंद्र भारद्वाज और डा. संजय स्वामी ने बताया कि जो नौ प्रारूप तैयार किए गए हैं, पहले तो ये देशभर के विश्वविद्यालयों को भेजे जाएंगे। विद्वान इन पर विचार करेंगे। इसके बाद यूजीसी से संपर्क कर पूरे देश के विश्वविद्यालयों में इन्हें पढ़ाया जाएगा। इसके लिए पुस्तकें लिखी जाएंगी। इसका मकसद भारतीय ज्ञान परंपरा के उस प्राचीन ज्ञान को बच्चों को उपलब्ध करवाना है, जिसे आज का आधुनिक ज्ञान कहकर प्रचारित किया जाता है, जबकि हमारे पास यह हजारों साल से उपलब्ध है। हम इसे अब तक सहेज नहीं पाए थे।
ये विषय हैं-
1. भारत की वैज्ञानिक परंपरा का इतिहास
2. भारतीय तकनीकी ज्ञान-ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में
3. भारतीय राजनीतिक विज्ञान
4. भारतीय भाषाओं का अंत: संबंध
5. भारत में रसायन विज्ञान
6. भारतीय खगोल भौतिकी विज्ञान
7. भारतीय गणित परंपरा
8. शुल्वसूत्रों पर आधारित ज्यामितीय गणित
9. प्राचीन भूगोल विज्ञान
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संवाद-
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कैथल। फिजिक्स, केमिस्ट्री बायोलॉजी, गणित या अन्य आधुनिक विषय पढ़ने वाले विद्यार्थी अब कॉलेजों में विभिन्न विषयों में समृद्ध भारतीय ज्ञान परंपरा की भी पढ़ाई करेंगे। कैथल के महर्षि संस्कृत विश्वविद्यालय ने हमारे ऋषि-मुनियों द्वारा रचित प्राचीन ग्रंथों, पुराणों व अन्य पुस्तकों से ऐसी जानकारी जुटाई है, जिसमें फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी या गणित से संबंधित विषयों को हजारों साल पहले स्पष्ट कर दिया गया था।
दरअसल, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के पाठ्यक्रम में भारतीय ज्ञान परंपरा को पढ़ाने की दिशा में महर्षि संस्कृत विश्वविद्यालय ने कदम बढ़ाया है। इसके लिए नौ प्रारूप (मॉड्यूल) तैयार किए गए हैं, जिन पर तीन दिनों तक कैथल के संस्कृत विश्वविद्यालय में देश भर के विद्वान चर्चा करेंगे। इसके बाद इन सभी प्रारूपों को देश के सभी विश्वविद्यालयों में भेजा जाएगा, ताकि वहां अलग-अलग विषयों के साथ इसकी महत्ता अनुसार उच्च शिक्षा में बच्चों को पढ़ाया जा सके। इसका उद्देश्य है कि भारत में हजारों साल पहले सामने आ चुके ज्ञान से विद्यार्थियों को अवगत करवाना है, ताकि उन्हें गर्व हो कि जो थ्योरी वे अंग्रेजी विद्वानों के नाम से पढ़ रहे हैं, ऐसी थ्योरी भारतीय विद्वान, हमारे ऋषि-मुनि हजारों साल पहले लिखकर जा चुके हैं।
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इस संबंध में बातचीत के दौरान विश्वविद्यालय के उप-कुलपति प्रो. रमेश चंद्र भारद्वाज और शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास से डॉ. संजय स्वामी ने विस्तृत जानकारी दी। प्रो. रमेश भारद्वाज ने कहा कि न्यास और विश्वविद्यालय ने मिलकर राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2023 के उच्च शिक्षा में क्रियान्वयन के लिए इस दिशा में काम किया है। भारतीय ज्ञान परंपरा के चयनित नौ विषयों पर पाठ्यक्रम विकसित किया है।
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यूजीसी से किया जाएगा तालमेल-
प्रो. रमेश चंद्र भारद्वाज और डा. संजय स्वामी ने बताया कि जो नौ प्रारूप तैयार किए गए हैं, पहले तो ये देशभर के विश्वविद्यालयों को भेजे जाएंगे। विद्वान इन पर विचार करेंगे। इसके बाद यूजीसी से संपर्क कर पूरे देश के विश्वविद्यालयों में इन्हें पढ़ाया जाएगा। इसके लिए पुस्तकें लिखी जाएंगी। इसका मकसद भारतीय ज्ञान परंपरा के उस प्राचीन ज्ञान को बच्चों को उपलब्ध करवाना है, जिसे आज का आधुनिक ज्ञान कहकर प्रचारित किया जाता है, जबकि हमारे पास यह हजारों साल से उपलब्ध है। हम इसे अब तक सहेज नहीं पाए थे।
ये विषय हैं-
1. भारत की वैज्ञानिक परंपरा का इतिहास
2. भारतीय तकनीकी ज्ञान-ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में
3. भारतीय राजनीतिक विज्ञान
4. भारतीय भाषाओं का अंत: संबंध
5. भारत में रसायन विज्ञान
6. भारतीय खगोल भौतिकी विज्ञान
7. भारतीय गणित परंपरा
8. शुल्वसूत्रों पर आधारित ज्यामितीय गणित
9. प्राचीन भूगोल विज्ञान
संवाद-