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Kaithal News: बालू के जलघर के टैंकों में गंदगी, चारदीवारी नहीं होने से हादसे का खतरा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 27 Oct 2026 12:07 AM IST
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Risk of accidents due to filth in the water storage tanks at Balu and the absence of a boundary wall.
बालू जलघर के एसएस टैंक के हाल। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
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कलायत। गांव बालू स्थित जलघर के एसएस टैंकों में गंदगी और परिसर में सुरक्षा के इंतजामों की कमी को लेकर ग्रामीणों ने चिंता जताई है। ग्रामीणों के अनुसार, टैंकों में प्लास्टिक की बोतलें, पॉलिथीन, घास-फूस और काई दिखाई दे रही है। वहीं, जलघर की चारदीवारी नहीं होने से हादसे का खतरा बना हुआ है।
ग्रामीणों ने संबंधित विभाग से जलघर का निरीक्षण करवाने, टैंकों की सफाई कराने और चारदीवारी बनवाने की मांग की है। ग्रामीण गुरुदेव सिंह, संदीप, सुनील, अशोक और प्रदीप सहित अन्य लोगों ने बताया कि जलघर परिसर में चारदीवारी नहीं होने से सुरक्षा संबंधी चिंता बनी रहती है। उनका कहना है कि यहां पहले भी हादसा हो चुका है, लेकिन इसके बावजूद चारदीवारी का निर्माण नहीं कराया गया। ऐसे में परिसर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाने चाहिए, ताकि किसी अप्रिय घटना से बचा जा सके।
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टैंकों में कचरा और काई दिखने से सफाई पर सवाल
ग्रामीण गुरुदेव सिंह ने बताया कि जलघर के एसएस टैंकों में प्लास्टिक की बोतलें, पॉलिथीन, घास-फूस और काई दिखाई दे रही है। इससे टैंकों की सफाई और रखरखाव को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जलघर पेयजल आपूर्ति से जुड़ा महत्वपूर्ण परिसर है। इसलिए यहां नियमित सफाई और उचित रखरखाव सुनिश्चित किया जाना चाहिए, ताकि पानी की गुणवत्ता को लेकर लोगों की चिंताएं दूर हो सकें। ग्रामीणों ने कहा कि सरकार स्वच्छ पेयजल उपलब्ध करवाने पर जोर देती है। ऐसे में जलघर की व्यवस्था दुरुस्त रखना जरूरी है। उन्होंने विभाग से टैंकों की सफाई करवाने के साथ परिसर की सुरक्षा के लिए चारदीवारी बनाने की मांग की है।
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छह माह में होती है एसएस टैंक की सफाई : विभाग
इस संबंध में जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग, कलायत के कनिष्ठ अभियंता रवि पूनिया ने बताया कि नहर से आने वाला पानी सबसे पहले एसएस टैंक में जमा होता है। इसके बाद पानी को पांच चरणों की प्रक्रिया से गुजारा जाता है और क्लोरीन मिलाने के बाद ही पेयजल के रूप में सप्लाई किया जाता है। एसएस टैंक में पानी शुरुआती भंडारण के लिए रखा जाता है। इसमें बड़े कण रह सकते हैं और मौसम के कारण काई भी जमा हो सकती है। उन्होंने बताया कि एसएस टैंक की सफाई छह माह में एक बार विभाग की ओर से करवाई जाती है। विभाग अब टैंक की सफाई का कार्य दोबारा शुरू करवाने जा रहा है।
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