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Kaithal News: कुत्तों के काटने की रफ्तार तेज, रोकथाम सुस्त, लोगों की सुरक्षा रामभरोसे

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 27 Oct 2026 12:34 AM IST
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Dog bite incidents are on the rise, preventive measures are sluggish, and public safety is left to fate.
जिला नागरिक अस्पताल में मरीज का टीकाकरण करते हुए स्टाफ नर्स सविता। संवाद
विक्रम पूनिया
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कैथल। शहर में आवारा कुत्तों का आतंक बढ़ता जा रहा है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2026 के शुरुआती नौ महीनों में ही कुत्तों के काटने के 3122 मामले सामने आ चुके हैं। यह आंकड़ा वर्ष 2025 के पूरे साल में दर्ज 2910 और वर्ष 2024 के 3102 मामलों से भी अधिक है। इसके बावजूद आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए नगर परिषद ठोस व्यवस्था नहीं कर पाई है।
शहर में आवारा कुत्तों के लिए न तो शेल्टर होम बन पाया और न ही उन्हें पकड़ने व उनका टीकाकरण करने की मुहिम आगे बढ़ सकी। नगर परिषद की ओर से कई बार टेंडर जारी करने के बावजूद एजेंसी नहीं मिलने से व्यवस्था अधर में है। वहीं, नागरिक अस्पताल में प्रतिदिन 15 से 20 लोग जानवरों के काटने के बाद एंटी-रेबीज टीका लगवाने पहुंच रहे हैं। इनमें लगभग 90 प्रतिशत मामले कुत्तों के काटने के होते हैं जबकि शेष 10 प्रतिशत में बंदर, चूहे और बिल्ली के काटने वाले मरीज शामिल हैं। मरीजों को एंटी-रेबीज टीके की चार खुराक दी जाती हैं। पहली खुराक काटने के तुरंत बाद, दूसरी तीसरे दिन, तीसरी सातवें दिन और चौथी 28वें दिन दी जाती है। निर्धारित समय पर टीके लगवाने के लिए मरीजों को अस्पताल पहुंचना पड़ता है।
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नौ माह में ही पिछले दो वर्षों के आंकड़े पीछे छूटे
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 में जनवरी में 311, फरवरी में 348, मार्च में 361, अप्रैल में 341, मई में 355, जून में 308, जुलाई में 286, अगस्त में 225 और सितंबर में 287 मामले सामने आए। इन नौ महीनों में कुल 3122 मामले दर्ज किए गए। मार्च में सबसे अधिक 361 मामले आए जबकि अगस्त में सबसे कम 225 मामले दर्ज हुए। वर्ष 2025 के मुकाबले इस साल सितंबर तक 212 और वर्ष 2024 के मुकाबले 20 अधिक मामले सामने आ चुके हैं।
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शिकायतों के बाद एजेंसी का टेंडर रद्द
आवारा कुत्तों की समस्या के समाधान के लिए नगर परिषद ने जनवरी में एक एजेंसी को काम सौंपा था। एजेंसी ने सर्वे के बाद कुत्तों को पकड़ने का काम भी शुरू कर दिया था, लेकिन कुत्तों को पकड़ने, उनके रखरखाव और टीकाकरण में कथित लापरवाही की शिकायतें मिलने के बाद काम रुकवा दिया गया। इसके बाद परिषद ने एजेंसी का टेंडर रद्द कर दिया। अब नए सिरे से कई बार टेंडर आमंत्रित करने के बावजूद कोई एजेंसी काम लेने के लिए तैयार नहीं है।
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प्रति कुत्ता दर आधी होने से एजेंसियां नहीं दिखा रहीं रुचि
नगर परिषद के अधिकारियों के अनुसार, पहले एजेंसी को प्रति कुत्ता 1600 से 1650 रुपये दिए जा रहे थे, लेकिन अब सरकार की ओर से मानक दर 800 रुपये प्रति कुत्ता तय की गई है। उनका कहना है कि कई बार टेंडर आमंत्रित करने के बावजूद एजेंसियां रुचि नहीं दिखा रही हैं। जनवरी में किए गए सर्वे के अनुसार, कैथल शहर में करीब आठ हजार और पूरे जिले में लगभग 12 हजार आवारा कुत्ते होने का अनुमान लगाया गया था। इतनी बड़ी संख्या के बावजूद शेल्टर होम और टीकाकरण की व्यवस्था नहीं होने से लोगों की चिंता बढ़ रही है।

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कुत्ते पकड़ने, नियमानुसार टीकाकरण करने व शेल्टर में रखने की एक प्रक्रिया है। इसी प्रक्रिया के तहत कईं बार टेंडर लगाया जा चुका है। कोई भी एजेंसी इसमें दिलचस्पी नहीं दिखा रही है।
- संदीप सोलंकी, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद, कैथल।
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