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Kaithal News: रील की लत बच्चों को बना रही तनावग्रस्त
Mon, 09 Feb 2026 12:55 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Mon, 09 Feb 2026 12:55 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। सोशल मीडिया की बढ़ती लत का सबसे बड़ा कारण अब बच्चों और युवाओं में रील बनाने की आदत को माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि रील बनाने के बाद लाइक, शेयर और व्यूज की संख्या जानने की जिज्ञासा बच्चों को बार-बार मोबाइल देखने पर मजबूर कर रही है। अपेक्षित प्रतिक्रिया न मिलने पर बच्चे बेचैनी, चिड़चिड़ापन और मानसिक तनाव महसूस करने लगते हैं। इसका सीधा असर उनकी पढ़ाई और एकाग्रता पर पड़ रहा है।
नागरिक अस्पताल के मॉनिटरिंग एंड इवैल्यूएशन ऑफिसर, डिपार्टमेंट ऑफ साइकेट्री, डॉ. विनय गुप्ता ने बताया कि अभिभावकों को बच्चों में रील बनाने की आदत को प्रोत्साहित नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि शुरुआत में यह केवल शौक लगता है, लेकिन धीरे-धीरे यह आदत लत में बदल जाती है। सोशल मीडिया पर समय अधिक देने से बच्चों की पढ़ाई, पारिवारिक संबंध और सामाजिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं।
डॉ. गुप्ता ने कहा कि रील बनाने की लत बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के साथ-साथ समय प्रबंधन और जिम्मेदारियों पर भी नकारात्मक प्रभाव डालती है। उन्होंने अभिभावकों को सलाह दी कि बच्चों के डिजिटल व्यवहार पर नजर रखें और उन्हें सोशल मीडिया का संतुलित और सीमित उपयोग करना सिखाएं।
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विशेषज्ञों के अनुसार, यदि कोई बच्चा सोशल मीडिया के कारण मानसिक दबाव, तनाव या लत महसूस कर रहा है, तो वह मानस हेल्पलाइन 14416 पर संपर्क कर सकता है। यह सेवा 24 घंटे, सातों दिन उपलब्ध है और निशुल्क परामर्श व उपचार की सुविधा प्रदान करती है।
अभिभावकों की भूमिका अहम ः अनामिका
अभिभावक अनामिका ने बताया कि माता-पिता को बच्चों के डिजिटल व्यवहार पर लगातार नजर रखनी चाहिए। रील बनाना शुरुआत में केवल मनोरंजन लगता है, लेकिन धीरे-धीरे यह आदत बन जाती है। बच्चों को यह समझाना जरूरी है कि सोशल मीडिया पर मिलने वाले लाइक या शेयर उनकी योग्यता का पैमाना नहीं होते। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया की लत रोकने के लिए परिवार का सहयोग जरूरी है। घर पर बच्चों के समय का सही प्रबंधन करें और उन्हें डिजिटल प्लेटफॉर्म का जिम्मेदार और सुरक्षित उपयोग सिखाएं।
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कैथल। सोशल मीडिया की बढ़ती लत का सबसे बड़ा कारण अब बच्चों और युवाओं में रील बनाने की आदत को माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि रील बनाने के बाद लाइक, शेयर और व्यूज की संख्या जानने की जिज्ञासा बच्चों को बार-बार मोबाइल देखने पर मजबूर कर रही है। अपेक्षित प्रतिक्रिया न मिलने पर बच्चे बेचैनी, चिड़चिड़ापन और मानसिक तनाव महसूस करने लगते हैं। इसका सीधा असर उनकी पढ़ाई और एकाग्रता पर पड़ रहा है।
नागरिक अस्पताल के मॉनिटरिंग एंड इवैल्यूएशन ऑफिसर, डिपार्टमेंट ऑफ साइकेट्री, डॉ. विनय गुप्ता ने बताया कि अभिभावकों को बच्चों में रील बनाने की आदत को प्रोत्साहित नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि शुरुआत में यह केवल शौक लगता है, लेकिन धीरे-धीरे यह आदत लत में बदल जाती है। सोशल मीडिया पर समय अधिक देने से बच्चों की पढ़ाई, पारिवारिक संबंध और सामाजिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं।
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डॉ. गुप्ता ने कहा कि रील बनाने की लत बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के साथ-साथ समय प्रबंधन और जिम्मेदारियों पर भी नकारात्मक प्रभाव डालती है। उन्होंने अभिभावकों को सलाह दी कि बच्चों के डिजिटल व्यवहार पर नजर रखें और उन्हें सोशल मीडिया का संतुलित और सीमित उपयोग करना सिखाएं।
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विशेषज्ञों के अनुसार, यदि कोई बच्चा सोशल मीडिया के कारण मानसिक दबाव, तनाव या लत महसूस कर रहा है, तो वह मानस हेल्पलाइन 14416 पर संपर्क कर सकता है। यह सेवा 24 घंटे, सातों दिन उपलब्ध है और निशुल्क परामर्श व उपचार की सुविधा प्रदान करती है।
अभिभावकों की भूमिका अहम ः अनामिका
अभिभावक अनामिका ने बताया कि माता-पिता को बच्चों के डिजिटल व्यवहार पर लगातार नजर रखनी चाहिए। रील बनाना शुरुआत में केवल मनोरंजन लगता है, लेकिन धीरे-धीरे यह आदत बन जाती है। बच्चों को यह समझाना जरूरी है कि सोशल मीडिया पर मिलने वाले लाइक या शेयर उनकी योग्यता का पैमाना नहीं होते। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया की लत रोकने के लिए परिवार का सहयोग जरूरी है। घर पर बच्चों के समय का सही प्रबंधन करें और उन्हें डिजिटल प्लेटफॉर्म का जिम्मेदार और सुरक्षित उपयोग सिखाएं।