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आढ़तियों की हड़ताल समाप्त, किसानों ने ली राहत
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आढ़ति पिछले चार दिन से जारी आढ़तियों की हड़ताल मंगलवार को खुल गई। सोमवार को चंडीगढ़ में सीएम व डिप्टी सीएम के साथ हुई बैठक के बाद आढ़तियों ने नई अनाज मंडी के श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर में बैठक की। जहां जिला आढ़ती एसोसिएशन के अध्यक्ष अश्वनी शोरेवाला व मंडी के प्रधान कृष्ण मित्तल ने बताया कि सरकार ने उनकी मांग स्वीकार कर मार्केट कमेटी फीस को 4 प्रतिशत से कम करके 1 प्रतिशत कर दिया है। इसीलिए अब हड़ताल खोली जा रही है। हड़ताल समाप्त होने के बाद से अनाज मंडी में एक सप्ताह से पड़ा किसानों का धान तुरंत बिकना शुरू हो गया और किसानों ने राहत की सांस ली।
विदित रहे की प्रदेश की मंडियों के अनुसार कैथल की अनाज मंडी और मंडी से बाहर एक टैक्स की मांग को लेकर आढ़ती अनिश्चितकालीन हड़ताल पर थे। मंडी में किसान अपनी फसल को लेकर मंडी में पिछले लगभग एक सप्ताह से बैठे हुए थे। हड़ताल के कारण धान न बिकने पर किसानों को अपनी फसल की रखवाली करनी पड़ रही थी। प्रदेश में चल रही हड़ताल को समाप्त करने के लिये आढ़तियों को मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने बुलाया था। मुख्यमंत्री के बुलावे पर कैथल से जिला अनाज मंडी प्रधान अश्वनी शोरेवाला एक प्रतिनिधि मंडल के साथ चंडीगढ़ गए और मुख्यमंत्री को लागू इन तीन अध्यादेशों से पड़ने वाले प्रभाव पर विस्तार से बताया। इन अध्यादेशों से प्रदेश में मंडियां समाप्त हो जाएंगी, क्योंकि बाहर किसानों से सीधा खरीद करने वाले लोगों पर कोई टैैक्स नहीं है, जबकि मंडी के अंदर से खरीद करने वाले को मार्केट फीस के रूप में 4 प्रतिशत टैक्स देना होगा। जिससे खरीद करने वाले मंडी से बाहर से खरीद कर मंडी टैक्स को बचायेंगे। उन्होंने कहा कि आढ़ती से किसान एडवांस में ही फसल की अदायगी लेते हैं। फसल की अदायगी सीधे तौर पर किसान पर छोड़ देना चाहिए कि वह अपनी फसल की अदायगी सीधी या आढ़ती के माध्यम से लेगा। मंडी के आढ़तियों को भी सीधे तौर पर व्यापार करने की इजाजत मिले। मंडी या मंडी से बाहर न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम किसानों की फसल न बिके। इस पर मुख्यमंत्री से सभी मांगों पर आश्वासन देते हुये तुरंत मार्केट फीस व एचआरडीएफ फीस जो पहले दो-दो प्रतिशत कुल 4 प्रतिशत फीस थी, उसे कम करके आधा-आधा कुल एक प्रतिशत कर दी है। जिस पर मंडी से चार दिनों से चल रही हड़ताल को वापस ले लिया और किसानों की फसल देखते ही बिक गई।
कैथल मंडी प्रधान कृष्ण मितल, जय किशन मान, बिरभान, श्याम लाल सरपंच, कृष्ण शर्मा चंदाना, जसमेर ढांडा आदि मंडी के अनेक आढ़ती उपस्थित थे। वहीं मार्केट कमेटी सचिव दीपक कुमार ने कहा कि करीब 12 हजार बोरी की खरीदी गई है। सरकारी खरीद अभी एक अक्तूबर से होनी है। इसीलिए इस समय निजी खरीद की जा रही है।
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विदित रहे की प्रदेश की मंडियों के अनुसार कैथल की अनाज मंडी और मंडी से बाहर एक टैक्स की मांग को लेकर आढ़ती अनिश्चितकालीन हड़ताल पर थे। मंडी में किसान अपनी फसल को लेकर मंडी में पिछले लगभग एक सप्ताह से बैठे हुए थे। हड़ताल के कारण धान न बिकने पर किसानों को अपनी फसल की रखवाली करनी पड़ रही थी। प्रदेश में चल रही हड़ताल को समाप्त करने के लिये आढ़तियों को मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने बुलाया था। मुख्यमंत्री के बुलावे पर कैथल से जिला अनाज मंडी प्रधान अश्वनी शोरेवाला एक प्रतिनिधि मंडल के साथ चंडीगढ़ गए और मुख्यमंत्री को लागू इन तीन अध्यादेशों से पड़ने वाले प्रभाव पर विस्तार से बताया। इन अध्यादेशों से प्रदेश में मंडियां समाप्त हो जाएंगी, क्योंकि बाहर किसानों से सीधा खरीद करने वाले लोगों पर कोई टैैक्स नहीं है, जबकि मंडी के अंदर से खरीद करने वाले को मार्केट फीस के रूप में 4 प्रतिशत टैक्स देना होगा। जिससे खरीद करने वाले मंडी से बाहर से खरीद कर मंडी टैक्स को बचायेंगे। उन्होंने कहा कि आढ़ती से किसान एडवांस में ही फसल की अदायगी लेते हैं। फसल की अदायगी सीधे तौर पर किसान पर छोड़ देना चाहिए कि वह अपनी फसल की अदायगी सीधी या आढ़ती के माध्यम से लेगा। मंडी के आढ़तियों को भी सीधे तौर पर व्यापार करने की इजाजत मिले। मंडी या मंडी से बाहर न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम किसानों की फसल न बिके। इस पर मुख्यमंत्री से सभी मांगों पर आश्वासन देते हुये तुरंत मार्केट फीस व एचआरडीएफ फीस जो पहले दो-दो प्रतिशत कुल 4 प्रतिशत फीस थी, उसे कम करके आधा-आधा कुल एक प्रतिशत कर दी है। जिस पर मंडी से चार दिनों से चल रही हड़ताल को वापस ले लिया और किसानों की फसल देखते ही बिक गई।
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कैथल मंडी प्रधान कृष्ण मितल, जय किशन मान, बिरभान, श्याम लाल सरपंच, कृष्ण शर्मा चंदाना, जसमेर ढांडा आदि मंडी के अनेक आढ़ती उपस्थित थे। वहीं मार्केट कमेटी सचिव दीपक कुमार ने कहा कि करीब 12 हजार बोरी की खरीदी गई है। सरकारी खरीद अभी एक अक्तूबर से होनी है। इसीलिए इस समय निजी खरीद की जा रही है।
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