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आढ़ती एसोसिएशन के चुनाव में किया गया वायदा टूटा
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कैथल। नई अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन के चुनाव में प्रमुख मुद्दा गेहूं के सीजन में उठान में आढ़तियों से अवैध वसूली न होने देने का था। गेहूं खरीद सीजन के अंतिम दिनों में यह दावा पूरी तरह से टूटता नजर आ रहा है। आढ़तियों का कहना है कि मंडी में उनको अपनी-अपनी दुकान से गेहूं के उठान के लिए तीन से चार रुपये प्रति कट्टे की रिश्वत देनी पड़ रही है। उनके आरोप हैं कि कुछ चुनिंदा आढ़ती अपने -अपने गेहूं उठवा गए। बाकी मंडी को लूट के हवाले कर दिया गया है।
आढ़ती एसोसिएशन के निवर्तमान प्रधान कृष्ण बंसल ने कहा कि मंडी में कई दिनों से रुपये-दो रुपये करके रिश्वत वसूली जा रही थी। अब यह सरेआम तीन से चार रुपये प्रति कट्टा तक पहुंच गई है। आढ़तियों को मजबूरन अपनी-अपनी दुकान से गेहूं उठवाने के लिए रिश्वत देनी पड़ रही है। क्योंकि उनकी सुनवाई करने वाला कोई नहीं है। प्रधान के गुट में शामिल कुछ प्रमुख आढ़तियों ने सांठ - गांठ करके अपनी-अपनी दुकानों का माल तो उठवा दिया है। बाकि आढ़ती रिश्वत देकर अपना गेहूं उठवाने को मजबूर हैं।
आढ़ती बीरभान जैन ने कहा कि तंबू लगाकर गेटपास की व्यवस्था की गई थी। कुछ बड़े आढ़ती हैं, वे तंबू लगने से पहले ही गेटपास ले गए। मिली भगत करके अपना माल उठवा गए। बाद में तंबू ही उखाड़ दिया गया। जो चार से पांच हजार कट्टों वाले आढ़ती हैं, उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही। वे चार से पांच रुपये प्रति कट्टा रिश्वत देने को मजबूर हैं। क्योंकि लू के कारण गेहूं सूख रहा है। जिससे आढ़तियों को नुकसान हो रहा है। एसोसिएशन की व्यवस्था पूरी तरह से फेल है।
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आढ़ती एसोसिएशन के निवर्तमान प्रधान कृष्ण बंसल ने कहा कि मंडी में कई दिनों से रुपये-दो रुपये करके रिश्वत वसूली जा रही थी। अब यह सरेआम तीन से चार रुपये प्रति कट्टा तक पहुंच गई है। आढ़तियों को मजबूरन अपनी-अपनी दुकान से गेहूं उठवाने के लिए रिश्वत देनी पड़ रही है। क्योंकि उनकी सुनवाई करने वाला कोई नहीं है। प्रधान के गुट में शामिल कुछ प्रमुख आढ़तियों ने सांठ - गांठ करके अपनी-अपनी दुकानों का माल तो उठवा दिया है। बाकि आढ़ती रिश्वत देकर अपना गेहूं उठवाने को मजबूर हैं।
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आढ़ती बीरभान जैन ने कहा कि तंबू लगाकर गेटपास की व्यवस्था की गई थी। कुछ बड़े आढ़ती हैं, वे तंबू लगने से पहले ही गेटपास ले गए। मिली भगत करके अपना माल उठवा गए। बाद में तंबू ही उखाड़ दिया गया। जो चार से पांच हजार कट्टों वाले आढ़ती हैं, उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही। वे चार से पांच रुपये प्रति कट्टा रिश्वत देने को मजबूर हैं। क्योंकि लू के कारण गेहूं सूख रहा है। जिससे आढ़तियों को नुकसान हो रहा है। एसोसिएशन की व्यवस्था पूरी तरह से फेल है।
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