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मार्केट में ऑक्सी मीटर नहीं मिल रहा..पहले कीमतें बढ़ीं अब उपलब्ध ही नहीं
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कोरोना महामारी में जहां दिल्ली सहित बड़े शहरों से स्वास्थ्य क्षेत्र में प्रयोग होने वाले उपकरणों की आपूर्ति प्रभावित हुई है। वहीं कुछ लोगों द्वारा स्टॉक होने से ये लोगों की पहुंच से दूर हो रहे हैं। कई उपकरणों की कीमतों में भी बढ़ोत्तरी बताई जा रही है।
ऑक्सीमीटर की भारी कमी-शहर में ऑक्सीमीटर की भारी कमी बनी हुई है। कोरोना संकट में लोगों को ऑक्सीजन का स्तर मापने के लिए इस यंत्र का प्रयोग किया जाता है। हालांकि किसी अस्पताल में ऑक्सीमीटर की कमी अभी तक सामने नहीं आई है। लेकिन लोगों द्वारा घरों में खुद ऑक्सीजन स्तर जांचने के लिए इस उपकरण की खरीद की जा रही है। लेकिन यह मार्केट में लगभग न के बराबर ही उपलब्ध है।
एक कैमिस्ट ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पहले तो इस उपकरण के 800 से बढ़ाकर रेट करीब 2000 हो गए। अब यह मार्केट में उपलब्ध ही नहीं हैं।
इसी प्रकार से एक अन्य कैमिस्ट ने बताया कि ऑक्सीजन पाइप व ऑक्सीजन फ्लो मीटर मार्केट में या तो उपलब्ध ही नहीं हैं। वहीं थर्मामीटर, ग्लब्ज, स्टीमर की कीमतों पहले से ज्यादा बढ़ गई हैं।
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एक अन्य कैमिस्ट ने बताया कि दो तरह के टीके उपलब्ध होने के बावजूद एक तरह से उनकी कमी घोषित की गई है। जबकि ये उपलब्ध भी हैं और इनकी कीमतों में भी पीछे से कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है।
इस संबंध में शहर में कैमिस्ट प्रदीप कुमार ने कहा कि दिल्ली से माल आना बंद हो गया है। वहां लॉकडाउन है। जिस कारण कई तरह के उपकरणों की मार्केट में कमी बनी हुई है। जिले में किसी भी उपकरण की कालाबाजारी नहीं हो रही है। ऑक्सीमीटर सहित कई तरह के उपकरण बाजार में उपलब्ध ही नहीं हैं। ग्लब्ज आदि की कीमतों में कोई बढ़ोत्तरी नहीं हुई है।
कैमिस्ट एसोसिएशन के चेयरमैन धर्मबीर ने कहा कि महामारी के दौर में किसी भी कैमिस्ट को कालाबाजारी नहीं करनी चाहिए। मानवता की सेवा का यह समय है। ऐसे में पहले की तरह से उपकरणों की कीमतें रखें और जितनी हो सके लोगों की सेवा करें।
डीसी सुजान सिंह यादव ने कहा कि किसी भी अस्पताल में ऑक्सीमीटर की कमी नहीं हैं। फिर भी यदि किसी दुकानदार द्वारा कालाबाजारी किए जाने की बात सामने आई तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। जिले में जीवन रक्षा के आवश्यक उपकरण उपलब्ध हैं। ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं हैं।
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ऑक्सीमीटर की भारी कमी-शहर में ऑक्सीमीटर की भारी कमी बनी हुई है। कोरोना संकट में लोगों को ऑक्सीजन का स्तर मापने के लिए इस यंत्र का प्रयोग किया जाता है। हालांकि किसी अस्पताल में ऑक्सीमीटर की कमी अभी तक सामने नहीं आई है। लेकिन लोगों द्वारा घरों में खुद ऑक्सीजन स्तर जांचने के लिए इस उपकरण की खरीद की जा रही है। लेकिन यह मार्केट में लगभग न के बराबर ही उपलब्ध है।
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एक कैमिस्ट ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पहले तो इस उपकरण के 800 से बढ़ाकर रेट करीब 2000 हो गए। अब यह मार्केट में उपलब्ध ही नहीं हैं।
इसी प्रकार से एक अन्य कैमिस्ट ने बताया कि ऑक्सीजन पाइप व ऑक्सीजन फ्लो मीटर मार्केट में या तो उपलब्ध ही नहीं हैं। वहीं थर्मामीटर, ग्लब्ज, स्टीमर की कीमतों पहले से ज्यादा बढ़ गई हैं।
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एक अन्य कैमिस्ट ने बताया कि दो तरह के टीके उपलब्ध होने के बावजूद एक तरह से उनकी कमी घोषित की गई है। जबकि ये उपलब्ध भी हैं और इनकी कीमतों में भी पीछे से कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है।
इस संबंध में शहर में कैमिस्ट प्रदीप कुमार ने कहा कि दिल्ली से माल आना बंद हो गया है। वहां लॉकडाउन है। जिस कारण कई तरह के उपकरणों की मार्केट में कमी बनी हुई है। जिले में किसी भी उपकरण की कालाबाजारी नहीं हो रही है। ऑक्सीमीटर सहित कई तरह के उपकरण बाजार में उपलब्ध ही नहीं हैं। ग्लब्ज आदि की कीमतों में कोई बढ़ोत्तरी नहीं हुई है।
कैमिस्ट एसोसिएशन के चेयरमैन धर्मबीर ने कहा कि महामारी के दौर में किसी भी कैमिस्ट को कालाबाजारी नहीं करनी चाहिए। मानवता की सेवा का यह समय है। ऐसे में पहले की तरह से उपकरणों की कीमतें रखें और जितनी हो सके लोगों की सेवा करें।
डीसी सुजान सिंह यादव ने कहा कि किसी भी अस्पताल में ऑक्सीमीटर की कमी नहीं हैं। फिर भी यदि किसी दुकानदार द्वारा कालाबाजारी किए जाने की बात सामने आई तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। जिले में जीवन रक्षा के आवश्यक उपकरण उपलब्ध हैं। ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं हैं।