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...तो इस बार सड़कों पर नहीं बिखरेगा गेहूं
ब्यूरो कैथल
Updated Thu, 26 Jan 2017 12:06 AM IST
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शहर की तीसरी अनाज मंडी
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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अनाज मंडी में जगह की कमी के चलते इस बार सड़कों पर अनाज डालने की जरूरत नहीं रहेगी। यदि सब कुछ सही रहा तो दो माह बाद आने वाले गेहूं के सीजन में तीसरी अनाज मंडी तैयार हो जाएगी। करीब 62 एकड़ में 25 करोड़ रुपये की लागत से मंडी को तैयार करने का काम जोर-शोर से चल रहा है।
हर छह माह बाद होती है परेशानी, सड़कों पर डालना पड़ता है अनाज
शहर में इस समय दो अनाज मंडियां है। पुरानी अनाज मंडी काफी तंग है। जिस कारण मंडी के बाहर भी अनाज डालना पड़ता है। वहीं नई अनाज मंडी में करीब 772 के आस-पास आढ़ती हैं। जहां धान व गेहूं के सीजन में अनाज को मॉडल टाउन, जींद रोड, रेलवे की ओर जाने वाले रोड, रामनगर सहित आस-पास की सड़कों पर डालना पड़ता है। जिससे अनाज के खराब होने एवं चोरी होने की आशंका बनी रहती है। आढ़तियों व किसानों सहित मंडी में काम करने वाले मजदूरों को इससे काफी दिक्कतें होती हैं। वहीं खरीद एजेंसियों के अधिकारियों के लिए भी खरीद के समय मौके पर जाकर अनाज का निरीक्षण करने में परेशानी आती है। इसके अलावा शहर में जाम के चलते भी लोगों को काफी परेशानी होती है। लंबे समय से तीसरी अनाज मंडी की मांग की जा रही थी। जो इस सीजन में आकर पूरा होने की उम्मीद है।
तेजी से चल रहा है काम
जींद रोड पर ड्रेन से पहले ही नगर परिषद की जगह में तीसरी अनाज मंडी का निर्माण किया जा रहा है। मार्केटिंग बोर्ड के जेई रोहित कुमार ने कहा कि उम्मीद है कि गेहूं के सीजन से पहले इस मंडी में गेहूं डालने की जगह बन जाएगी। इस पर तेजी से काम चल रहा है। बरसात या फिर कोई अन्य बड़ी अड़चन नहीं आई तो काम लगभग पूरा हो जाएगा।
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62 एकड़ में किया जा रहा है कार्य
तीसरी अनाज मंडी के लिए कुल 89 एकड़ जमीन अधिग्रहित की गई है, जिसमें से 62 एकड़ में मंडी विकसित की जा रही है। इस कार्य पर करीब 25 करोड़ रुपये खर्च किया जा रहा है। जिसमें 6 बड़ी कॉमन प्लिंथ और दुकानों के सामने की 22 व्यक्तिगत प्लिंथ तैयार की जा रही है। जिसमें अनाज डाला जा सकेगा। इसके अलावा सड़कें, सीवरेज, पीने के पानी व शुलभ शौचालय का निर्माण किया जा रहा है।
40 लाख क्विंटल से ज्यादा अनाज की आवक होती है साल में
शहर में इस समय मौजूद दोनों ही मंडियों में साल भर में करीब 40 लाख क्विंटल से ज्यादा अनाज की आवक होती है। जिसमें लगभग 25 लाख क्विंटल धान व करीब 16 लाख क्विंटल गेहूं की आवक होती है। जिसे डालने के लिए लगभग 22 से 23 एकड़ में बनी नई अनाज मंडी व लगभग 6 एकड़ में बनी पुरानी अनाज मंडी में जगह काफी कम पड़ती है। दोनों अनाज मंडियों में लगभग 712 आढ़ती रजिस्टर्ड हैं। वहीं तीसरी नई अनाज मंडी में 62 एकड़ की जगह यदि अनाज डालने के लिए मिल जाएगी तो जाम से भी मुक्ति मिल सकेगी।
दोनों अनाज मंडियों में धान डालने के लिए जगह काफी कम है। बताया यह जा रहा है कि तीसरी अनाज मंडी में काम चल रहा है। यदि यह समय से पूरा हो जाता है तो सीजन में काफी राहत मिलेगी।
अश्विनी शोरेवाला, अध्यक्ष, आढ़ती एसोसिएशन, नई अनाज मंडी, कैथल।
मार्केटिंग बोर्ड द्वारा तीसरी अनाज मंडी में काम काफी तेजी से किया जा रहा है। उम्मीद है कि सीजन तक यहां गेहूं डालने लायक जगह हो जाएगी। जिससे काफी राहत मिल सकेगी।
सुल्तान सिंह, सचिव, मार्केट कमेटी, कैथल।
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हर छह माह बाद होती है परेशानी, सड़कों पर डालना पड़ता है अनाज
शहर में इस समय दो अनाज मंडियां है। पुरानी अनाज मंडी काफी तंग है। जिस कारण मंडी के बाहर भी अनाज डालना पड़ता है। वहीं नई अनाज मंडी में करीब 772 के आस-पास आढ़ती हैं। जहां धान व गेहूं के सीजन में अनाज को मॉडल टाउन, जींद रोड, रेलवे की ओर जाने वाले रोड, रामनगर सहित आस-पास की सड़कों पर डालना पड़ता है। जिससे अनाज के खराब होने एवं चोरी होने की आशंका बनी रहती है। आढ़तियों व किसानों सहित मंडी में काम करने वाले मजदूरों को इससे काफी दिक्कतें होती हैं। वहीं खरीद एजेंसियों के अधिकारियों के लिए भी खरीद के समय मौके पर जाकर अनाज का निरीक्षण करने में परेशानी आती है। इसके अलावा शहर में जाम के चलते भी लोगों को काफी परेशानी होती है। लंबे समय से तीसरी अनाज मंडी की मांग की जा रही थी। जो इस सीजन में आकर पूरा होने की उम्मीद है।
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तेजी से चल रहा है काम
जींद रोड पर ड्रेन से पहले ही नगर परिषद की जगह में तीसरी अनाज मंडी का निर्माण किया जा रहा है। मार्केटिंग बोर्ड के जेई रोहित कुमार ने कहा कि उम्मीद है कि गेहूं के सीजन से पहले इस मंडी में गेहूं डालने की जगह बन जाएगी। इस पर तेजी से काम चल रहा है। बरसात या फिर कोई अन्य बड़ी अड़चन नहीं आई तो काम लगभग पूरा हो जाएगा।
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62 एकड़ में किया जा रहा है कार्य
तीसरी अनाज मंडी के लिए कुल 89 एकड़ जमीन अधिग्रहित की गई है, जिसमें से 62 एकड़ में मंडी विकसित की जा रही है। इस कार्य पर करीब 25 करोड़ रुपये खर्च किया जा रहा है। जिसमें 6 बड़ी कॉमन प्लिंथ और दुकानों के सामने की 22 व्यक्तिगत प्लिंथ तैयार की जा रही है। जिसमें अनाज डाला जा सकेगा। इसके अलावा सड़कें, सीवरेज, पीने के पानी व शुलभ शौचालय का निर्माण किया जा रहा है।
40 लाख क्विंटल से ज्यादा अनाज की आवक होती है साल में
शहर में इस समय मौजूद दोनों ही मंडियों में साल भर में करीब 40 लाख क्विंटल से ज्यादा अनाज की आवक होती है। जिसमें लगभग 25 लाख क्विंटल धान व करीब 16 लाख क्विंटल गेहूं की आवक होती है। जिसे डालने के लिए लगभग 22 से 23 एकड़ में बनी नई अनाज मंडी व लगभग 6 एकड़ में बनी पुरानी अनाज मंडी में जगह काफी कम पड़ती है। दोनों अनाज मंडियों में लगभग 712 आढ़ती रजिस्टर्ड हैं। वहीं तीसरी नई अनाज मंडी में 62 एकड़ की जगह यदि अनाज डालने के लिए मिल जाएगी तो जाम से भी मुक्ति मिल सकेगी।
दोनों अनाज मंडियों में धान डालने के लिए जगह काफी कम है। बताया यह जा रहा है कि तीसरी अनाज मंडी में काम चल रहा है। यदि यह समय से पूरा हो जाता है तो सीजन में काफी राहत मिलेगी।
अश्विनी शोरेवाला, अध्यक्ष, आढ़ती एसोसिएशन, नई अनाज मंडी, कैथल।
मार्केटिंग बोर्ड द्वारा तीसरी अनाज मंडी में काम काफी तेजी से किया जा रहा है। उम्मीद है कि सीजन तक यहां गेहूं डालने लायक जगह हो जाएगी। जिससे काफी राहत मिल सकेगी।
सुल्तान सिंह, सचिव, मार्केट कमेटी, कैथल।