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Kaithal News: पूंडरी के स्कूल में बारिश में टपकती हैं छतें, पांच साल से टूटी चहारदीवारी, फरल में शेड के नीचे पढ़ने को मजबूर बच्चे

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 27 Aug 2026 12:17 AM IST
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Roofs drip rain in schools in Poondri, children forced to study under sheds in Faral toothy for five years
गांव फरल के स्कूल में कमरों की कमी के चलते शेड के नीचे बैठकर पढ़ाई करते छात्र। संवाद
पूंडरी। पूंडरी क्षेत्र के दो स्कूलों की स्थिति चिंताजनक है। राजकीय मॉडल संस्कृति प्राथमिक विद्यालय कैथली गेट पूंडरी में 128 विद्यार्थियों के लिए चार शिक्षक हैं, जबकि यहां सात शिक्षकों की जरूरत है। बारिश में स्कूल के कई कमरों की छतों से पानी टपकता है। इतना ही नहीं स्कूल में 2 साल से बच्चों को दिए जा रहे मिड डे मील के रुपये नहीं आए हैं और यह बोझ शिक्षक उठाने को मजबूर हैं। वहीं राजकीय प्राथमिक विद्यालय फरल में 162 से अधिक बच्चों के लिए महज दो कमरे हैं। कमरों की कमी के कारण बच्चे शेड के नीचे बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं।
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दोनों स्कूलों में शिक्षकों, भवन और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं सामने आई हैं। पूंडरी स्कूल के मुख्य शिक्षक राजेश बिहान ने बताया कि हुडा आवासीय क्षेत्र की तरफ स्कूल की चहारदीवारी करीब पांच वर्ष पहले ढह गई थी, जिसे अब तक ठीक नहीं करवाया गया। चहारदीवारी नहीं होने के कारण लावारिस पशु स्कूल परिसर में प्रवेश कर जाते हैं। इससे बच्चों की सुरक्षा के लिए भी चिंता बनी रहती है। स्कूल में सफाई कर्मचारी होने के बावजूद सफाई व्यवस्था ठीक नहीं है। छात्राओं और स्टाफ के लिए अलग शौचालय उपलब्ध नहीं है। वहीं विद्यार्थियों के लिए लगाए गए दोनों स्मार्ट डिजिटल बोर्ड भी खराब पड़े हैं।
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128 बच्चों पर चार शिक्षक, सात की जरूरत
कैथली गेट स्थित राजकीय मॉडल संस्कृति प्राथमिक विद्यालय में 128 विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। इनमें 87 लड़के और 41 लड़कियां हैं। कुछ दिन पहले तक यहां महज दो शिक्षक कार्यरत थे। हाल ही में खंड शिक्षा अधिकारी पूंडरी की ओर से दो महिला शिक्षकों की नियुक्ति के बाद शिक्षकों की संख्या चार हुई है। स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या के अनुपात में कम से कम सात शिक्षकों की जरूरत है।
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बारिश में टपकती हैं छतें, दीवारों में दरारें
पूंडरी में स्कूल में कमरों की संख्या पर्याप्त है लेकिन बारिश के दौरान लगभग सभी कमरों की छतों से पानी टपकता है। कई कमरों की छतों में दरारें भी दिखाई देती हैं। इससे बारिश के दिनों में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने के साथ शिक्षकों को भी परेशानी होती है। अभिभावकों ने भवन की मरम्मत करवाने की मांग की है।

फरल में 162 से अधिक बच्चों के लिए सिर्फ दो कमरे
राजकीय प्राथमिक विद्यालय फरल की स्थिति भी चिंताजनक है। स्कूल में 162 से अधिक विद्यार्थी पढ़ रहे हैं लेकिन उनके लिए केवल दो कमरे उपलब्ध हैं। इनमें स्कूल कार्यालय और अन्य सामान भी रखा जाता है। कमरों की कमी के कारण बच्चों को शेड के नीचे बैठकर पढ़ाई करनी पड़ रही है। बारिश के दौरान छोटे बच्चों को यहां पढ़ने में और अधिक परेशानी होती है। मुख्य शिक्षक मांगे राम ने बताया कि स्कूल में सात अध्यापक कार्यरत हैं। स्कूल के पास दो डिजिटल बोर्ड भी हैं लेकिन पुराने कमरों को ढहाए जाने के बाद कमरों की कमी हो गई है। शिक्षा विभाग को समस्या से अवगत करवाया जा चुका है। नए कमरे बनने के बाद समस्या का समाधान होने की उम्मीद है। स्कूल में पेयजल और शौचालय की व्यवस्था है।


दो माह से मिड-डे मील की राशि नहीं
स्कूल प्रबंधन कमेटी के अध्यक्ष प्रीतम ने बताया कि करीब दो महीने से मिड-डे मील में खाना पकाने और सब्जी आदि के खर्च की राशि नहीं आई है। इसके बावजूद शिक्षक अपनी ओर से खर्च कर बच्चों को भोजन उपलब्ध करवा रहे हैं। स्कूल में चपरासी और सफाई कर्मचारी नहीं होने के कारण अध्यापकों को ही सफाई व्यवस्था भी संभालनी पड़ रही है।

गांव फरल के स्कूल में कमरों की कमी के चलते शेड के नीचे बैठकर पढ़ाई करते छात्र। संवाद

गांव फरल के स्कूल में कमरों की कमी के चलते शेड के नीचे बैठकर पढ़ाई करते छात्र। संवाद

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