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पुरानी पुस्तकों के भरोसे नया शिक्षण सत्र शुरू
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New academic session started on the basis of old books
- फोटो : Kaithal
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कैथल। नए शैक्षणिक सत्र में शिक्षा ग्रहण करने के लिए स्कूली विद्यार्थियों को पुस्तकों की कमी खल रही है। एससीईआरटी की पुस्तकें स्कूलों में अभी तक उपलब्ध नहीं हो पाई हैं। ऐसे में बच्चों की शिक्षा पुरानी पुस्तकों के सहारे रेंग रही है। दो वर्ष से स्कूलों में बच्चों की मांग के अनुरूप पुस्तकें उपलब्ध नहीं हो पाई हैं। हालांकि बीते सत्र में जनवरी माह में कुछ सरकारी स्कूलों में एससीईआरटी की पुस्तकें उपलब्ध हो पाई थीं लेकिन वे भी बच्चों को सत्र के अंत में मिली। अब फिर से विद्यार्थियों को नए सत्र के लिए या तो पुरानी पुस्तकों से काम चलाना पड़ रहा है या फिर उन्हें निजी प्रकाशकों की पुस्तकों का सहारा लेना पड़ रहा है। पुरानी पुस्तकों की तलाश भी अभिभावकों की मजबूरी बनी है।
खुद खरीदें तो 30 प्रतिशत अतिरिक्त देना पड़ रहा दाम
एससीईआरटी की पुस्तकें तो उपलब्ध हैं नहीं, ऐसे में अगर विद्यार्थी एनसीईआरटी की या निजी प्रकाशकों की पुस्तकें लें तो उनके दाम भी बीते वर्षों की अपेक्षा इस बार 30 प्रतिशत तक ज्यादा हो गए हैं। जो पुस्तकें स्कूलों में विद्यार्थियों को मुफ्त में उपलब्ध हो सकती हैं, उनके लिए लोगों को हजारों रुपये कीमत चुकानी पड़ रही है।
अभिभावकों के संगठनों ने लिखा विभाग के अधिकारियों को पत्र
नए सत्र में बच्चों को जल्द से जल्द पुस्तकें उपलब्ध करवाने के लिए अभिभावकों के संगठनों ने विभाग के उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा है। पत्र में मांग की गई है कि पुस्तकें एनसीईआरटी या फिर एससीईआरटी की लगवाई जाएं और जल्द से जल्द नई पुस्तकें स्कूलों में भिजवाई जाएं।
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स्टूडेंट्स-पैरेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन के सचिव गुरमीत गुलाटी ने बताया कि करीब दो माह का समय बीतने के बावजूद अधिकारियों की ओर से पत्र का कोई जवाब नहीं दिया गया है। उनका कहना है कि जब तक पुस्तकें स्कूलों में नहीं पहुंचेंगी तब तक पीछे वे भी नहीं हटेंगे। भले ही इसके लिए न्यायपालिका की शरण लेनी पड़े। निजी प्रकाशकों की पुस्तकों का भी संगठन विरोध कर रहा है।
हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ के प्रदेश प्रवक्ता मास्टर सतबीर गोयत का कहना है कि दो साल से स्कूलों में बच्चों को समय पर पुस्तकें नहीं मिल पाई हैं। कोरोना काल में तो फिर भी जैसे-तैसे काम चल गया, लेकिन अब नियमित कक्षाओं में पुस्तकें ही नहीं होंगी तो बच्चे क्या पढ़ेंगे और शिक्षक क्या पढ़ाएंगे? विभाग अगर वास्तव में शिक्षा को मजबूत करना चाहता है तो सबसे पहले पूरी पाठ्य सामग्री स्कूलों में उपलब्ध करवाए। सरकारी और निजी स्कूलों में पुस्तकों को लेकर किए जा रहे दोहरे व्यवहार से भी निजात दिलाए।
इस संबंध में जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी चंद्रकला रापड़िया ने कहा कि बीते सत्रों में कोरोना महामारी के चलते विद्यार्थियों के सामने पुस्तकों की समस्या आई। जनवरी माह में बच्चों को पुस्तकें उपलब्ध करवा दी गई थीं। फिलहाल पुरानी पुस्तकें वापस लेकर नए विद्यार्थियों को उपलब्ध करवाई जा रही हैं। नई पुस्तकों के बारे में भी विभाग से पत्राचार जारी है। जल्द से जल्द स्कूलों में पुस्तकें मंगवाने का प्रयास है।
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खुद खरीदें तो 30 प्रतिशत अतिरिक्त देना पड़ रहा दाम
एससीईआरटी की पुस्तकें तो उपलब्ध हैं नहीं, ऐसे में अगर विद्यार्थी एनसीईआरटी की या निजी प्रकाशकों की पुस्तकें लें तो उनके दाम भी बीते वर्षों की अपेक्षा इस बार 30 प्रतिशत तक ज्यादा हो गए हैं। जो पुस्तकें स्कूलों में विद्यार्थियों को मुफ्त में उपलब्ध हो सकती हैं, उनके लिए लोगों को हजारों रुपये कीमत चुकानी पड़ रही है।
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अभिभावकों के संगठनों ने लिखा विभाग के अधिकारियों को पत्र
नए सत्र में बच्चों को जल्द से जल्द पुस्तकें उपलब्ध करवाने के लिए अभिभावकों के संगठनों ने विभाग के उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा है। पत्र में मांग की गई है कि पुस्तकें एनसीईआरटी या फिर एससीईआरटी की लगवाई जाएं और जल्द से जल्द नई पुस्तकें स्कूलों में भिजवाई जाएं।
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स्टूडेंट्स-पैरेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन के सचिव गुरमीत गुलाटी ने बताया कि करीब दो माह का समय बीतने के बावजूद अधिकारियों की ओर से पत्र का कोई जवाब नहीं दिया गया है। उनका कहना है कि जब तक पुस्तकें स्कूलों में नहीं पहुंचेंगी तब तक पीछे वे भी नहीं हटेंगे। भले ही इसके लिए न्यायपालिका की शरण लेनी पड़े। निजी प्रकाशकों की पुस्तकों का भी संगठन विरोध कर रहा है।
हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ के प्रदेश प्रवक्ता मास्टर सतबीर गोयत का कहना है कि दो साल से स्कूलों में बच्चों को समय पर पुस्तकें नहीं मिल पाई हैं। कोरोना काल में तो फिर भी जैसे-तैसे काम चल गया, लेकिन अब नियमित कक्षाओं में पुस्तकें ही नहीं होंगी तो बच्चे क्या पढ़ेंगे और शिक्षक क्या पढ़ाएंगे? विभाग अगर वास्तव में शिक्षा को मजबूत करना चाहता है तो सबसे पहले पूरी पाठ्य सामग्री स्कूलों में उपलब्ध करवाए। सरकारी और निजी स्कूलों में पुस्तकों को लेकर किए जा रहे दोहरे व्यवहार से भी निजात दिलाए।
इस संबंध में जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी चंद्रकला रापड़िया ने कहा कि बीते सत्रों में कोरोना महामारी के चलते विद्यार्थियों के सामने पुस्तकों की समस्या आई। जनवरी माह में बच्चों को पुस्तकें उपलब्ध करवा दी गई थीं। फिलहाल पुरानी पुस्तकें वापस लेकर नए विद्यार्थियों को उपलब्ध करवाई जा रही हैं। नई पुस्तकों के बारे में भी विभाग से पत्राचार जारी है। जल्द से जल्द स्कूलों में पुस्तकें मंगवाने का प्रयास है।