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मुंह पका और खुर पका बीमारी ने बढ़ाई पशुपालकों की चिंता
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पशुओं में फैल रही मुंह खुर की बीमारी ने पशुपालकों की चिंता बढ़ा दी है। पशुओं के मुंह में छाले और खुरों में खून आने व जकड़न जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं।
पशुपालकों का कहना है कि ये बीमारी कई साल बाद पशुओं में देखने में आई है। मुंह पका खुर पका से बचाव के लिए टीके लगे भी काफी समय बीत चुका है। ऐसे में विभाग को चाहिए कि जिन स्थानों में यह बीमारी पशुओं में देखने को मिल रही है, वहां टीमें भेजकर जांच करवाई जाए। पशुओं को बीमारी से बचाने के लिए टीके लगाए जाएं।
पशुपालन विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले में इस समय 3 लाख 73 हजार 430 पशु हैं। मार्च माह में इनमें से 3 लाख 40 हजार पशुओं का टीकाकरण किया गया था। उस समय जो पशु निर्धारित आयु से कम थे, ज्यादातर उन्हीं को टीके नहीं लग पाए थे। या फिर बाद में खरीदे गए पशुओं का भी टीकाकरण नहीं हो पाया हैै। काफी अन्य पशु भी टीकाकरण से वंचित रह गए थे, जिनमें बीमारी सामने आ रही है।
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गांव भानपुरा निवासी पशुपालक जय भगवान, सूबे सिंह व बिलासा राम ने बताया कि उनके गांव में साल से भी ज्यादा समय से पशुओं को मुंह पका खुर पका से बचाव के टीके नहीं लग पाए हैं। गांव में काफी संख्या में पशु बीमारी की चपेट में हैं। पशु चिकित्सकों के अनुसार ये बीमारी एक से दूसरे पशु में संपर्क के कारण भी फैलने की संभावना है। ऐसे में उन्हें डर सता रहा है कि कहीं ठीक-ठाक पशु भी बीमार न हो जाएं। उन्होंने अधिकारियों से गांव में जांच करने की मांग की है।
पशुपालन विभाग के उप निदेशक डॉ. मंगल सिंह ने कहा कि जल्द ही गांवों में चिकित्सकों की टीम को भेजकर जांच की जाएगी। उन्होंने बताया कि फिलहाल जिले में यह बीमारी ज्यादा नहीं है। जिन स्थानों पर दिक्कत है, वहां पशुओं का इलाज और टीकाकरण करवाया जाएगा। उन्होंने बताया कि विभाग के पास पर्याप्त मात्रा में वैक्सीन उपलब्ध हैं।
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पशुपालकों का कहना है कि ये बीमारी कई साल बाद पशुओं में देखने में आई है। मुंह पका खुर पका से बचाव के लिए टीके लगे भी काफी समय बीत चुका है। ऐसे में विभाग को चाहिए कि जिन स्थानों में यह बीमारी पशुओं में देखने को मिल रही है, वहां टीमें भेजकर जांच करवाई जाए। पशुओं को बीमारी से बचाने के लिए टीके लगाए जाएं।
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पशुपालन विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले में इस समय 3 लाख 73 हजार 430 पशु हैं। मार्च माह में इनमें से 3 लाख 40 हजार पशुओं का टीकाकरण किया गया था। उस समय जो पशु निर्धारित आयु से कम थे, ज्यादातर उन्हीं को टीके नहीं लग पाए थे। या फिर बाद में खरीदे गए पशुओं का भी टीकाकरण नहीं हो पाया हैै। काफी अन्य पशु भी टीकाकरण से वंचित रह गए थे, जिनमें बीमारी सामने आ रही है।
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गांव भानपुरा निवासी पशुपालक जय भगवान, सूबे सिंह व बिलासा राम ने बताया कि उनके गांव में साल से भी ज्यादा समय से पशुओं को मुंह पका खुर पका से बचाव के टीके नहीं लग पाए हैं। गांव में काफी संख्या में पशु बीमारी की चपेट में हैं। पशु चिकित्सकों के अनुसार ये बीमारी एक से दूसरे पशु में संपर्क के कारण भी फैलने की संभावना है। ऐसे में उन्हें डर सता रहा है कि कहीं ठीक-ठाक पशु भी बीमार न हो जाएं। उन्होंने अधिकारियों से गांव में जांच करने की मांग की है।
पशुपालन विभाग के उप निदेशक डॉ. मंगल सिंह ने कहा कि जल्द ही गांवों में चिकित्सकों की टीम को भेजकर जांच की जाएगी। उन्होंने बताया कि फिलहाल जिले में यह बीमारी ज्यादा नहीं है। जिन स्थानों पर दिक्कत है, वहां पशुओं का इलाज और टीकाकरण करवाया जाएगा। उन्होंने बताया कि विभाग के पास पर्याप्त मात्रा में वैक्सीन उपलब्ध हैं।