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Kaithal News: मंदिरों में लगे मां के जयकारे

Wed, 10 Apr 2024 02:48 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Wed, 10 Apr 2024 02:48 AM IST
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Mother's praise in temples
संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल। चैत्र नवरात्र पर्व की मंगलवार को शुरूआत हो गई। इस पर्व के पहले दिन जिलेभर के दुर्गा मंदिरों में सुबह से श्रद्धालुओं की भीड़ जुटना शुरू हो गई थी। मंदिरों में मां के जयकारे गूंजते रहे। श्रद्धालु सुबह से ही मंदिरों में पहुंच गए थे। श्रद्धालुओं ने शहर के बड़ी देवी मंदिर, कोठी देवी मंदिर ढांड रोड स्थित बालाजी शक्ति धाम मंदिर, मोता गेट स्थित मंदिर व शहर के विभिन्न मंदिरों में माता रानी के समक्ष ज्योत जलाई व नारियल चुनरी चढ़ाकर मन्नतें मांगी।

बड़ी देवी मंदिर में महंत गंगा पुरी, महंत भारद्धाज पुरी व मुकेश पुरी ने अलसुबह श्रद्धालुओं पवित्र ज्योत घर में प्रज्जवलित करने के लिए दी। वहीं, मंदिर के सेवादार रमेश, राजबीर, सोनू व राहुल ने श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया। बता दें कि नवदुर्गा की उपासना का 17 अप्रैल को महानवमी के साथ समापन होगा। इन नौ दिन में हर दिन हर दिन मां अपने अलग-अलग स्वरूपों में आकर आपको वरदान देती है । चैत्र नवरात्र में पूरे नौ दिन तक श्रद्धालु उपवास रखते हैं। इसके बाद कन्या पूजन से अपना व्रत खोलते हैं। पहले दिन श्रद्धालुओं ने मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना कर मनोकामना मांगी।
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चैत्र नवरात्र देवी उपासना कुछ खास चीजों के बगैर अधूरी मानी जाती है। इसमें मां दुर्गा की प्रतिमा, चौकी पर बिछाने के लिए लाल कपड़ा, बंदनवार, शक्कर, सिंदूर, पान, सुपारी, लौंगए बताशा, हल्दी की गांठ, नैवेध जावित्री, सोलह श्रृंगार बिंदी, चूड़ी, तेल, कंघी, शीशा आदि। पीसी हुई हल्दी,आसन, कमलगट्टा, शहद, नारियल जटा वाला, सूखा नारियल, दीपक, घी, अगरबत्ती, वस्त्र, दही, पंचमेवा, गंगाजल, नवग्रह पूजन के लिए अक्षत, चौकी, मौली, रोली और पूजा की थाली आदि कई सामग्री शामिल हैं।
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राजौंद के मंदिरों में लगा रहा श्रद्धालुओं का तांता

राजौंद। मंगलवार को शुरू हुए प्रथम नवरात्र पर नगर के मंदिरों में श्रद्धालुओं का तांता लगा। सुबह चार बजे से ही दुर्गा मंदिर, भद्रकाली मंदिर, प्राचीन शिव मंदिर, गांव में स्थित बाबा बहादुर बण मंदिर में भक्तों ने पहुंचकर पूजा अर्चना कर मां जगदंबे भवानी से मंगल कामना की प्रार्थना की। नवरात्र के पावन अवसर पर मंदिरों को खूब सजाया गया है। पहले दिन मंदिरों में श्रद्धालुओं की काफी भीड़ जुटी। आचार्य जीवन शास्त्री ने बताया कि घोर तपस्या के बाद पार्वती ने हिमालय की पुत्री बनना स्वीकार किया था। संवाद
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