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Kaithal News: सूरजकुंड डेरे के काली माता मंदिर में कल से शुरू होगा मेला

Mon, 20 Mar 2023 02:35 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Mon, 20 Mar 2023 02:35 AM IST
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Mela will start from tomorrow at Kali Mata Temple of Surajkund Dera
कैथल। सूरजकुंड डेरे के काली माता मंदिर में चैत्र नवरात्र पर्व के उपलक्ष्य में दो दिवसीय विश्व प्रसिद्ध मेला मंगलवार से शुरू होगा। इस मेले को लेकर मंदिर में तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है। मंदिर परिसर को भव्य लाइटों से सजाया गया है। जबकि परिसर के बाहर बाजार सजने लगे हैं। बच्चों के झूले इत्यादि भी लगा दिए हैं। मेले में राजस्थान, यूपी, पंजाब व उत्तराखंड सहित अन्य राज्यों से काफी श्रद्धालु पहुंचते हैं।
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मान्यता है कि सूरजकुंड तीर्थ डेरा परिसर में स्थित काली माता का मंदिर बाजीगर समाज की कुल देवी मंदिर है। इस मेले सबसे अधिक संख्या बाजीगर समाज के लोग ही मां काली की पूजा-अर्चना करने के लिए पहुंचते हैं। मंदिर के महंत रमनपुरी ने कहा कि मंदिर परिसर में सभी तैयारियां पूरी कर ली गई है। इस मेले में एक लाख से अधिक श्रद्घालुओं के पहुंचने का अनुमान है। इसमें 200 से अधिक सेवादार दो दिन तक सेवा में तैनात रहेंगे। जबकि 50 महिला व पुरुष पुलिस कर्मचारी सुरक्षा व्यवस्था के तहत तैनात रहेंगे।
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मंदिर का यह है इतिहास-
मंदिर के महंत रमनपुरी ने बताया कि डेरे में स्थित काली माता का मंदिर काफी प्राचीन है। इसकी काफी मान्यता है। रमनपुरी ने बताया कि आजादी से पहले बाजीगर समाज के बुजुर्ग कलवा पीर महाकाली के परम भक्त होते थे। वह लाहौर में रहते थे। सैकड़ों वर्ष पहले की बात है कि एक समय वह मां काली की आराधना कर रहे थे। उस समय जब वे रात के समय सोए तो मां काली ने उन्हें सपने में दर्शन दिए। दर्शन देकर कहा कि उन्हें सुबह एक बकरा दिखेगा। उस बकरे के साथ चलना। जहां पर भी यह बकरा जाकर रुक जाए तो वहां पर ही मेरा मंदिर बनाकर पूजा-अर्चना करना। माता की बताई गई बातों के अनुसार बकरा सूर्यकुंड डेरे में आकर रूका। इसके बाद से ही कलवा पीर यहां पर आकर बस गए। इस समय भी कलवा पीर की समाधि बनी है और उनका धुना लगा है। तभी से लेकर बाजीगर समाज की कुल देवी का मंदिर यहां पर ही बन गया। आजादी से पहले पाकिस्तान में रहने वाले बाजीगर समाज के लोग भी यहां पर नवरात्र में पूजा-अर्चना करने के लिए पहुंचते थे। रमनपुरी ने बताया कि बाजीगर समाज में माता काली के मंदिर में माथा टेकने के बाद ही समाज के युवा व युवतियां अपने दांपत्य जीवन की शुरूआत करते हैं।
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