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कईं खिलाड़ियों को तरास चुुकी हैं मुफलिसी में चमकीं रीता
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कैथल। जिले में कई महिला खिलाड़ी ऐसी हैं, जिन्होंने खेल के साथ-साथ पढ़ाई की है और अच्छा मुकाम हासिल किया है। इन्हीं महिलाओं में एक वुशु की सरकारी प्रशिक्षक रीता रानी भी हैं। रीता रानी ने 1996 से खेल प्रशिक्षण आरंभ किया। लगातार अभ्यास करते हुए कराटे में कई बार राष्ट्रीय स्तर पर पदक प्राप्त कर चुकी हैं। बतौर प्रशिक्षक कई खिलाड़ियों को तरास चुकी हैं।
रीता रानी ने बताया कि पांच भाई बहनों के परिवार में आर्थिक तंगी इस कदर संघर्ष में आड़े आई की कई कई महीनों स्कूल की फीस भी नहीं दे पाते थे, लेकिन इसके बावजूद भी पढ़ाई नहीं छोड़ी। इसी प्रकार खेल प्रशिक्षण के दौरान भी बहुत सारी मुश्किलों का सामना किया। कोचिंग फीस के लिए पैसे नहीं होते थे, फिर भी प्रशिक्षण नहीं छोड़ा। बहुत बार आर्थिक तंगी के चलते खेल प्रतियोगिताओं को छोड़ना पड़ा। पढ़ाई और खेल के दौरान पार्ट टाइम जॉब भी किया। बहुत बार ऐसी समस्याएं भी आईं कि खेल छोड़ने की स्थिति भी आ गई। फिर भी लगातार संघर्ष करती रहीं। रीता रानी ने बीते चार साल से जिला कैथल में खेल विभाग में वुशु कोच के पद पर कार्यरत है।
रीता ने बताया कि उसने 2015 में पटियाला एनआईएस से वुशु में एक साल का कोचिंग डिप्लोमा कोर्स किया। दो बार वुशु नेशनल जज का कोर्स किया है। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षक दीपक कुमार और परिवार के सहयोग से इस वह मुकाम तक पहुंचीं है। इस दौरान बहुत सी महिला खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देकर उनको राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने में कामयाब किया। हाल ही में उसके प्रशिक्षण में रजनी राणा ने वुशु खेल में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीता। बहुत बार महिलाओं को स्कूल कॉलेज में आत्म रक्षा के शिविर लगाकर उनको प्रशिक्षण दिया व दिशा निर्देश दिया। हमेशा से यही सपना रहा कि देश, समाज और माता-पिता और अपने प्रशिक्षक का नाम रोशन करना है। जिनके सहयोग से आज अपने पैरों पर खड़ा होने में कामयाबी मिली है।
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रीता रानी ने बताया कि पांच भाई बहनों के परिवार में आर्थिक तंगी इस कदर संघर्ष में आड़े आई की कई कई महीनों स्कूल की फीस भी नहीं दे पाते थे, लेकिन इसके बावजूद भी पढ़ाई नहीं छोड़ी। इसी प्रकार खेल प्रशिक्षण के दौरान भी बहुत सारी मुश्किलों का सामना किया। कोचिंग फीस के लिए पैसे नहीं होते थे, फिर भी प्रशिक्षण नहीं छोड़ा। बहुत बार आर्थिक तंगी के चलते खेल प्रतियोगिताओं को छोड़ना पड़ा। पढ़ाई और खेल के दौरान पार्ट टाइम जॉब भी किया। बहुत बार ऐसी समस्याएं भी आईं कि खेल छोड़ने की स्थिति भी आ गई। फिर भी लगातार संघर्ष करती रहीं। रीता रानी ने बीते चार साल से जिला कैथल में खेल विभाग में वुशु कोच के पद पर कार्यरत है।
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रीता ने बताया कि उसने 2015 में पटियाला एनआईएस से वुशु में एक साल का कोचिंग डिप्लोमा कोर्स किया। दो बार वुशु नेशनल जज का कोर्स किया है। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षक दीपक कुमार और परिवार के सहयोग से इस वह मुकाम तक पहुंचीं है। इस दौरान बहुत सी महिला खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देकर उनको राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने में कामयाब किया। हाल ही में उसके प्रशिक्षण में रजनी राणा ने वुशु खेल में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीता। बहुत बार महिलाओं को स्कूल कॉलेज में आत्म रक्षा के शिविर लगाकर उनको प्रशिक्षण दिया व दिशा निर्देश दिया। हमेशा से यही सपना रहा कि देश, समाज और माता-पिता और अपने प्रशिक्षक का नाम रोशन करना है। जिनके सहयोग से आज अपने पैरों पर खड़ा होने में कामयाबी मिली है।
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