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Kaithal News: कैथल का करीब 40 करोड़ रुपये का चावल बंदरगाहों पर अटका

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 18 Jul 2026 11:07 PM IST
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Kaithal's rice worth approximately 40 crore is stuck at ports.
कैथल। ईरान-अमेरिका की तनातनी के कारण चावल निर्यात पटरी पर नहीं लौट पा रहा है। अब फिर से समुद्री जहाजों की रफ्तार थम गई है। इसका सीधा असर चावल उद्योग पर दिखने लगा है। चावल के नए सौदे लगभग ठप हो गए हैं। वहीं पुराना माल भी अटक गया है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ती तनातनी के कारण अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापारिक मार्ग बाधित हो गए हैं। निर्यातकों के अनुसार कैथल का करीब 40 करोड़ रुपये की कीमत का चावल विभिन्न बंदरगाहों पर फंस गया है।
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भुगतान रुकने और माल अटकने से व्यापारियों की पूंजी अटक गई है। होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह असुरक्षित हो गया है। ईरान ने इस मार्ग से होने वाले व्यापारिक जहाजों के आवागमन को रोक दिया है जिससे ईरान को होने वाला चावल निर्यात पूरी तरह बंद है। इसके जहाजों का आगे बढ़ना नामुमकिन हो गया है जिससे समुद्री जहाजों की रफ्तार पूरी तरह थम गई है।
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ईराक ने बढ़ाया 77,028 रुपये भाड़ा
इस संकट के बीच ईराक और अन्य खाड़ी देशों के आयातकों व शिपिंग लाइनों ने जोखिम का हवाला देते हुए प्रति कंटेनर 77,028 रुपये तक समुद्री भाड़ा (फ्रेट चार्ज) बढ़ा दिया है। जो कुछ दिन पहले 4,33,285 रुपये प्रति कंटेनर था, वो अब 5,10,313 रुपये पहुंच गया है और भी पूर्ण रूप से सुचारु नहीं है। माल ढुलाई की लागत में अचानक आई इस भारी वृद्धि और कंटेनरों की भारी किल्लत के कारण नए सौदे पूरी तरह ठप हो गए हैं। जो चावल पहले से ही बंदरगाहों पर या समुद्र में जहाजों पर लदा हुआ है, उसके खराब होने का खतरा भी मंडरा रहा है।
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असमंजस : ऑर्डर के लिए शिपमेंट भेजें या नहीं
निर्यात की इस गंभीर स्थिति के लिए कैथल और आसपास के क्षेत्रों के व्यापारी गहरे असमंजस में हैं। मिलर्स यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि वे आगामी ऑर्डर के लिए चावल की शिपमेंट भेजें या मिलों में ही स्टॉक रोककर रखें। कई निर्यातक अब बैक टू टाउन प्रक्रिया के जरिये बंदरगाहों पर फंसे अपने माल को वापस घरेलू बाजार में लाने पर विचार कर रहे हैं। हालांकि इसमें भी अतिरिक्त कागजी कार्रवाई और भारी वित्तीय घाटा उठाना पड़ सकता है।

ये कहते निर्यातक
- राइस एक्सपोर्टर नरेंद्र मिगलानी का कहना है कि हालात कुछ सामान्य होने लगे थे लेकिन फिर से हालात मुश्किल होने लगे हैं। भाड़ा भी कम होने का नाम नहीं ले रहा। इससे आर्थिक बोझ बढ़ा है। उम्मीद है कि जल्द ही हालात सामान्य हों।


- राइस एक्सपोर्टर सुमित गर्ग ने बताया कि कैथल का करीब 40 करोड़ का चावल अटक गया है। अमेरिका-ईरान का यह गतिरोध जल्द नहीं सुलझा, तो स्थानीय राइस मिलिंग उद्योग को आने वाले दिनों में क्षति उठानी पड़ सकती है।
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