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पारंपरिक अनाज को छोड़ना पोषक तत्वों की कमी का कारण : डीसी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 19 Feb 2023 12:51 AM IST
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kaithalaAbandonment of traditional cereals causes nutritional deficiencies: DC
कैथल। पोषक तत्वों की कमी के लक्षण हर महिला और बच्चों में दिखाई दे रहे हैं, जिसका मुख्य कारण है कि हम अपने पारंपरिक मोटे अनाजों को छोड़कर गेहूं और धान तक सीमित हो गए हैं। मोटे अनाजों जैसे बाजरा के महत्व को देखते हुए वर्ष 2023 को अंतरराष्ट्रीय मिलेट वर्ष के रूप में मनाया जाएगा। डीसी डॉ. संगीता तेतरवाल ने बताया कि मोटे अनाज का अंतरराष्ट्रीय वर्ष मनाने की सहमति अन्य 70 देशों ने भी दी है। मोटे अनाज का मुख्य रूप बहुत गुण भरा है। मोटे अनाज के गुणों को फिर से जानने-समझने तथा जीवन में शामिल करने का समय आ गया है। मोटे अनाज वर्षों से परिचित हैं। मौसम बदलता है तो मक्के, ज्वार और बाजरे के रोटी को शौक से खाते हैं लेकिन आम जन-मानस इनके गुणों से अपरिचित है। इनके अलावा जईं, कोदो, कुटकी, रागी और समा भी मोटे अनाजों में शामिल हैं। ये सभी अनाज गुणों से भरपूर हैं। इनमें पाया जाने वाला रेशा और इस रेशे में घुलनशील और अघुलनशील दोनों ही रूप हमारे शरीर में पाचन तंत्र में वरदान की तरह काम करते हैं। घुलनशील रेशा पेट में कुदरती तौर पर मौजूद बैक्टिरिया को सहयोग करके पाचन को बेहतर बनाता है। व्यक्ति को मोटा अनाज खाने के बाद प्यास भी खूब लगती है जो पाचन तंत्र के लिए बहुत अच्छा है।
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कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उपनिदेशक डॉ. कर्मचंद ने बताया कि बाजरा उर्जा से भरपूर, प्रोटीन का उत्तम स्त्रोत, खनिज लवणों व रेशों से भरपूर और मोटापा, मधुमेह व दिल के मरीजों के लिए उत्तम अनाज है। इसमें उर्जा 350-370 कैलोरी, प्रोटीन 9-14 प्रतिशत, मिनिरल 2-3 प्रतिशत, व फाईबर 1-2 प्रतिशत पाए जाते हैं। बाजरा से बिस्कुट, पास्ता, नोडयूल, केक, सेवियां, नमकीन, लड्डू, शक्करपारा व बहुत सारे अन्य स्वादिष्ट व्यंजन बनाए जा सकते हैं। किसान ज्यादा से ज्यादा क्षेत्र में मोटे अनाज की खेती करें। कृषि विभाग द्वारा मोटे अनाज को उगाने के लिए किसानों को जागरूक करने के लिए साल भर के लिए जिला कार्य योजना बनाई है। इसमें प्रदर्शन प्लांट, किसान गोष्ठियां, जागरूकता कार्यक्रम व रैलियां निकाली जाएंगी।
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