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Kaithal News: किसानों का सब्र रोष में बदल रहा, कब आएगा फसल का मुआवजा
Mon, 17 Nov 2025 03:36 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Mon, 17 Nov 2025 03:36 AM IST
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कैथल। फसल खराब होने का मुआवजा न मिलने के कारण किसानों का सब्र जवाब दे रहा है। वे रोजाना सरकारी दफ्तरों में चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें कोई सटीक जवाब नहीं मिल पा रहा है। वह परेशान हो चुके हैं पर कोई आशा की किरण नजर नहीं आ रही। मुआवजा राशि जारी न होने के चलते किसानों पर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। किसान सरकार से जल्द से जल्द मुआवजा राशि जारी करने की मांग कर रहे हैं।
कांगथली गांव के किसान महेंद्र सिंह ने बताया कि बारिश के चलते फसल बर्बाद हो गई थी। जिसके बाद उन्होंने मुआवजा राशि के लिए क्षतिपूर्ति पोर्टल पर अप्लाई किया था, लेकिन मुआवजा राशि न मिलने के कारण अब उनके सामने आर्थिक संकट आकर खड़ा हो गया है। परिवार का गुजर-बसर करना मुश्किल हो रहा है। क्योड़क गांव के किसान ऋषिपाल ने बताया कि उसने 5 एकड़ जमीन ठेके पर लेकर धान की फसल लगाई थी। लेकिन पहाड़ों से आए पानी और अत्यधिक बारिश के चलते उसकी सारी फसल बर्बाद हो गई। लंबे समय से मुआवजे का इंतजार करने के बाद भी उन्हें मुआवजा राशि नहीं मिल रही है।
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किसान नेता विक्रम कसाना ने बताया कि प्रति एकड़ धान तैयार करने पर 20-25 हजार रुपये खर्च आ जाता है। जमीन का ठेका भी 60 से 70 हजार एकड़ प्रति वर्ष का चल रहा है। अब खेतों में धान कम निकला है तथा सरकार ने अभी तक बाढ़ व बारिश के कारण जलभराव का मुआवजा नहीं दिया है इसी कारण जमीन ठेके पर लेने वाले किसान के हाथ तो कुछ नहीं आएगा। किसान घाटे में जा रहा है, लेकिन सरकार में बैठे लोगों के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है।
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कांगथली गांव के किसान महेंद्र सिंह ने बताया कि बारिश के चलते फसल बर्बाद हो गई थी। जिसके बाद उन्होंने मुआवजा राशि के लिए क्षतिपूर्ति पोर्टल पर अप्लाई किया था, लेकिन मुआवजा राशि न मिलने के कारण अब उनके सामने आर्थिक संकट आकर खड़ा हो गया है। परिवार का गुजर-बसर करना मुश्किल हो रहा है। क्योड़क गांव के किसान ऋषिपाल ने बताया कि उसने 5 एकड़ जमीन ठेके पर लेकर धान की फसल लगाई थी। लेकिन पहाड़ों से आए पानी और अत्यधिक बारिश के चलते उसकी सारी फसल बर्बाद हो गई। लंबे समय से मुआवजे का इंतजार करने के बाद भी उन्हें मुआवजा राशि नहीं मिल रही है।
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किसान नेता विक्रम कसाना ने बताया कि प्रति एकड़ धान तैयार करने पर 20-25 हजार रुपये खर्च आ जाता है। जमीन का ठेका भी 60 से 70 हजार एकड़ प्रति वर्ष का चल रहा है। अब खेतों में धान कम निकला है तथा सरकार ने अभी तक बाढ़ व बारिश के कारण जलभराव का मुआवजा नहीं दिया है इसी कारण जमीन ठेके पर लेने वाले किसान के हाथ तो कुछ नहीं आएगा। किसान घाटे में जा रहा है, लेकिन सरकार में बैठे लोगों के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है।
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