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आखिर कब मिलेगी ऑनरूट होने की हरी झंडी
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सरकार की गाइड लाइनों के बाद अब सभी प्रकार की गतिविधियां खुल चुकी है। रोडवेज की बसों भी दूसरे राज्यों में आवागमन शुरू हो गया है। लेकिन रोडवेज बेड़े में शामिल 15 किलोमीटर स्कीम की बसें अभी भी चलने की अनुमति के इंतजार में है। पिछले करीब आठ महीने से बस अड्डा परिसर में खड़ी ये बसें धूल फांक रही है। आमदन न होने के बाद संचालकों द्वारा समय पर किस्तों सहित दूसरे खर्चों का भी बोझ पड़ रहा है। इसके साथ ही संचालकों पर आर्थिक नुकसान व मानसिक परेशानी भी हो रही है।
बता दें कि इसी साल के फरवरी माह है रोडवेज के बेड़े में किलोमीटर स्कीम के तहत बसों को शामिल करने का फैसला लिया गया था। इसके बाद कैथल डिपो में भी 15 बसें शामिल हुई थी। रोडवेज द्वारा इन बसों को 26.92 रुपये प्रति किलोमीटर के हिसाब से भुगतान किया जा रहा है। इन बसों पर चालक बस ऑपरेटर का है तो परिचालक रोडवेज का है।
चालक व मैनेजमेंट के लोगों के रोजगार पर संकट
जिले में 15 बसों पर दर्जनों कर्मचारी काम कर रहे है लेकिन इन बसों के संचालन के बिना मालिक सहित इन कर्मचारियों को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में मालिकों द्वारा कर्मचारियों को सैलरी देना चुनौती बन गया है। दर्जनों परिवारों पर रोजी-रोटी का संकट छाया हुआ है।
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15-20 करोड़ रुपये का हो चुका है आर्थिक नुकसान
किलोमीटर बस मालिकों के अनुसार हर महीने हजारों रुपये किस्तों के नाम जमा करवाए जा रहे है। लॉकडाउन के कारण गतिविधियां तो रुक गई थी लेकिन किस्तों पर किसी तरह से ब्रेक नहीं लगा। नियमित समय में किस्तें न भरे जाने फाइनेंसरों द्वारा बस मालिकों को चेताया गया। 10-15 लाख रुपये प्रति माह प्रति बस के हिसाब से आठ माह में लगभग 15-20 करोड़ रुपये अर्थिक नुकसान हो रहा है।
बार-बार मिल रहे बसें चलाए जाने के आश्वासन:
नटराज बस सर्विस संचालक अनिल ढूल ने बताया कि विभाग से कई बार बसें चलाए जाने को मिल चुके हैं। लेकिन हर बार आश्वासन दिए जाते है। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन के बाद भी दिल्ली खुलने का हवाला दिया जा रहा है। इसके बाद भी बसें नहीं चलाई जा रही।
विभाग की ओर से जल्द ही निर्णय आने की उम्मीद
जीएम अजय गर्ग ने बताया कि किलोमीटर स्कीम संचालकों की बात जायज है। जैसे ही विभाग के आदेश होंगे बसों का संचालन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा जल्द ही इस बारे में निर्णय आने की उम्मीद है।
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बता दें कि इसी साल के फरवरी माह है रोडवेज के बेड़े में किलोमीटर स्कीम के तहत बसों को शामिल करने का फैसला लिया गया था। इसके बाद कैथल डिपो में भी 15 बसें शामिल हुई थी। रोडवेज द्वारा इन बसों को 26.92 रुपये प्रति किलोमीटर के हिसाब से भुगतान किया जा रहा है। इन बसों पर चालक बस ऑपरेटर का है तो परिचालक रोडवेज का है।
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चालक व मैनेजमेंट के लोगों के रोजगार पर संकट
जिले में 15 बसों पर दर्जनों कर्मचारी काम कर रहे है लेकिन इन बसों के संचालन के बिना मालिक सहित इन कर्मचारियों को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में मालिकों द्वारा कर्मचारियों को सैलरी देना चुनौती बन गया है। दर्जनों परिवारों पर रोजी-रोटी का संकट छाया हुआ है।
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15-20 करोड़ रुपये का हो चुका है आर्थिक नुकसान
किलोमीटर बस मालिकों के अनुसार हर महीने हजारों रुपये किस्तों के नाम जमा करवाए जा रहे है। लॉकडाउन के कारण गतिविधियां तो रुक गई थी लेकिन किस्तों पर किसी तरह से ब्रेक नहीं लगा। नियमित समय में किस्तें न भरे जाने फाइनेंसरों द्वारा बस मालिकों को चेताया गया। 10-15 लाख रुपये प्रति माह प्रति बस के हिसाब से आठ माह में लगभग 15-20 करोड़ रुपये अर्थिक नुकसान हो रहा है।
बार-बार मिल रहे बसें चलाए जाने के आश्वासन:
नटराज बस सर्विस संचालक अनिल ढूल ने बताया कि विभाग से कई बार बसें चलाए जाने को मिल चुके हैं। लेकिन हर बार आश्वासन दिए जाते है। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन के बाद भी दिल्ली खुलने का हवाला दिया जा रहा है। इसके बाद भी बसें नहीं चलाई जा रही।
विभाग की ओर से जल्द ही निर्णय आने की उम्मीद
जीएम अजय गर्ग ने बताया कि किलोमीटर स्कीम संचालकों की बात जायज है। जैसे ही विभाग के आदेश होंगे बसों का संचालन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा जल्द ही इस बारे में निर्णय आने की उम्मीद है।