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अब जिले के उपमंडल स्तरीय अस्पतालों में भी बनवा सकेंगे दिव्यांगता प्रमाण पत्र
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21-कैथल। जिला नागरिक अस्पताल का दृश्य।
- फोटो : Kaithal
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जिला नागरिक अस्पताल में दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनवाने के लिए आने वाले लोगों को अब लाइनों में लगने से छुटकारा मिलेगा। स्वास्थ्य विभाग के निर्देशानुसार अब जिले के सभी उपमंडल स्तर के अस्पतालों में भी प्रमाण पत्र बनवाने की सुविधा की जाएगी। इस संबंध में विभाग मुख्यालय द्वारा सिविल सर्जन कार्यालय को पत्र जारी किया गया है।
फिलहाल जिला नागरिक अस्पताल में ही दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनवाने की सुविधा है। उसके लिए भी सप्ताह में केवल बुधवार का दिन निर्धारित किया गया है। सप्ताह में एक दिन ही प्रमाण पत्र बनने के कारण बुधवार को सुबह ही अस्पताल में लोगों की कतारें लग जाती हैं। कइयों का तो दिनभर इंतजार करने के बाद भी नंबर नहीं आता है। ऐसे में दिव्यांगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। प्रमाण पत्र के लिए उन्हें कई-कई सप्ताह अस्पताल के चक्कर लगाने पड़ते हैं। जो दिव्यांग ग्रामीण क्षेत्र से आते हैं, उन्हें परेशानी और ज्यादा रहती है। ऐसे में अब उपमंडल स्तरीय अस्पतालों में भी दिव्यांगता प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने की सुविधा प्रदान की जाएगी।
सिविल सर्जन डॉ. शैलेंद्र ममगाईं शैली ने कहा कि विभाग की ओर से इस संबंध में उनके पास निर्देश आए हैं। जल्द ही उपमंडल स्तर के अस्पतालों में यह सुविधा शुरू की जाएगी। उन्होंने बताया कि दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम 2016 के प्रावधानों के तहत इस निर्णय से दिव्यांग व्यक्तियों को उनके घरों के पास उनका मूल्यांकन कर प्रमाणित करने की सुविधा दी जाएगी।
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दूसरी ओर उपमंडल स्तर पर प्रमाण पत्र बनाने के निर्णय पर विकलांग अधिकार समिति ने स्वास्थ्य विभाग का आभार जताया है। समिति के प्रधान नरेश कुमार ने कहा कि जिले में सात हजार से ज्यादा दिव्यांग हैं। अपने क्षेत्र के अस्पताल में प्रमाण पत्र बनने और रिन्यू होने से लोगों को इसका काफी लाभ होगा। बार-बार लोगों को किराया लगाकर नागरिक अस्पताल नहीं जाना पड़ेगा और लाइनों में भी खड़ा नहीं होना पड़ेगा।
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फिलहाल जिला नागरिक अस्पताल में ही दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनवाने की सुविधा है। उसके लिए भी सप्ताह में केवल बुधवार का दिन निर्धारित किया गया है। सप्ताह में एक दिन ही प्रमाण पत्र बनने के कारण बुधवार को सुबह ही अस्पताल में लोगों की कतारें लग जाती हैं। कइयों का तो दिनभर इंतजार करने के बाद भी नंबर नहीं आता है। ऐसे में दिव्यांगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। प्रमाण पत्र के लिए उन्हें कई-कई सप्ताह अस्पताल के चक्कर लगाने पड़ते हैं। जो दिव्यांग ग्रामीण क्षेत्र से आते हैं, उन्हें परेशानी और ज्यादा रहती है। ऐसे में अब उपमंडल स्तरीय अस्पतालों में भी दिव्यांगता प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने की सुविधा प्रदान की जाएगी।
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सिविल सर्जन डॉ. शैलेंद्र ममगाईं शैली ने कहा कि विभाग की ओर से इस संबंध में उनके पास निर्देश आए हैं। जल्द ही उपमंडल स्तर के अस्पतालों में यह सुविधा शुरू की जाएगी। उन्होंने बताया कि दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम 2016 के प्रावधानों के तहत इस निर्णय से दिव्यांग व्यक्तियों को उनके घरों के पास उनका मूल्यांकन कर प्रमाणित करने की सुविधा दी जाएगी।
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दूसरी ओर उपमंडल स्तर पर प्रमाण पत्र बनाने के निर्णय पर विकलांग अधिकार समिति ने स्वास्थ्य विभाग का आभार जताया है। समिति के प्रधान नरेश कुमार ने कहा कि जिले में सात हजार से ज्यादा दिव्यांग हैं। अपने क्षेत्र के अस्पताल में प्रमाण पत्र बनने और रिन्यू होने से लोगों को इसका काफी लाभ होगा। बार-बार लोगों को किराया लगाकर नागरिक अस्पताल नहीं जाना पड़ेगा और लाइनों में भी खड़ा नहीं होना पड़ेगा।