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किसानों को घाव देने में जुटी मोदी सरकार -सुरजेवाला
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- फोटो : Kaithal
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जवाहर पार्क में भारतीय किसान यूनियन, सर्वजातीय-खाप पंचायत, आढ़ती, मजदूर व अन्य ट्रेड यूनियनों ने धरना दिया। जिसमें कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भी भाग लिया। कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव रणदीप सुरजेवाला भी पहुंचे और शहर की मार्केटों में पैदल मार्च किया।
उन्होंने कहा कि पिछले काफी दिनों से देश का किसान करो या मरो आंदोलन की राह पर है। किसान-मजदूर की आत्मा कराह रही है, देश की मिट्टी, खेत-खलिहान के लिए न्याय मांग रही है, अन्नदाता अपना अधिकार मांग रहा है और मोदी सरकार उन्हें घाव देने में जुटी है। क्या यह महात्मा गांधी का भारत है? क्या भाजपा सरकार के मालिक मुट्ठीभर उद्योगपति’ हैं या देश के 130 करोड़ लोग? क्या दिल्ली दरबार पूंजीपतियों की तिजोरी का गुलाम है या फिर देश के संविधान का? समय आ गया है कि हर देशवासी को यह सवाल पूछना पड़ेगा। चंद धन्ना सेठों को फायदा पहुंचाने के चक्कर में मोदी सरकार व देश के कृषि मंत्री ने विशेष कमेटी का जुमला पेश कर किसानों की आंख में धूल झोंकने का तरीका अपनाया। संविधान में खेती तो प्रांत का विशेषाधिकार है फिर मुट्ठी भर उद्योगपतियों को 25 लाख करोड़ की खेती उपज का कारोबार सौंपने के लिए तीन काले कानून जबरन क्यों पारित करवाए।
सुरजेवाला ने कहा कि किसान विरोध के खलनायक मोदी सरकार के साथ-साथ मनोहर लाल-दुष्यंत चौटाला भी हैं। उन्होंने कहा कि 73 साल के देश के इतिहास में पहली बार यह हुआ कि पूर्व घोषित कार्यक्रम में शांतिपूर्ण तरीके से धरना देने जा रहे किसानों का रास्ता रोकने के लिए सरकार ने हरियाणा में राष्ट्रीय राजमार्ग खुदवा दिए। अकाली दल बादल मजबूरी में भाजपा का साथ छोड़ चला गया। राजस्थान में एक पार्टी बीजेपी से समर्थन वापस लेने की घोषणा कर रही है। उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला पद से इस्तीफा कब देंगे? सरकार खुले मन से बात करे। तीनों कानूनों को बगैर विलंब के सस्पेंड कर दिया जाए। प्रधानमंत्री किसानों से खुद बात करें तथा सभी प्रकार का पूर्वाग्रह छोड़कर ही किसानों से बातचीत हो।
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उन्होंने कहा कि पिछले काफी दिनों से देश का किसान करो या मरो आंदोलन की राह पर है। किसान-मजदूर की आत्मा कराह रही है, देश की मिट्टी, खेत-खलिहान के लिए न्याय मांग रही है, अन्नदाता अपना अधिकार मांग रहा है और मोदी सरकार उन्हें घाव देने में जुटी है। क्या यह महात्मा गांधी का भारत है? क्या भाजपा सरकार के मालिक मुट्ठीभर उद्योगपति’ हैं या देश के 130 करोड़ लोग? क्या दिल्ली दरबार पूंजीपतियों की तिजोरी का गुलाम है या फिर देश के संविधान का? समय आ गया है कि हर देशवासी को यह सवाल पूछना पड़ेगा। चंद धन्ना सेठों को फायदा पहुंचाने के चक्कर में मोदी सरकार व देश के कृषि मंत्री ने विशेष कमेटी का जुमला पेश कर किसानों की आंख में धूल झोंकने का तरीका अपनाया। संविधान में खेती तो प्रांत का विशेषाधिकार है फिर मुट्ठी भर उद्योगपतियों को 25 लाख करोड़ की खेती उपज का कारोबार सौंपने के लिए तीन काले कानून जबरन क्यों पारित करवाए।
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सुरजेवाला ने कहा कि किसान विरोध के खलनायक मोदी सरकार के साथ-साथ मनोहर लाल-दुष्यंत चौटाला भी हैं। उन्होंने कहा कि 73 साल के देश के इतिहास में पहली बार यह हुआ कि पूर्व घोषित कार्यक्रम में शांतिपूर्ण तरीके से धरना देने जा रहे किसानों का रास्ता रोकने के लिए सरकार ने हरियाणा में राष्ट्रीय राजमार्ग खुदवा दिए। अकाली दल बादल मजबूरी में भाजपा का साथ छोड़ चला गया। राजस्थान में एक पार्टी बीजेपी से समर्थन वापस लेने की घोषणा कर रही है। उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला पद से इस्तीफा कब देंगे? सरकार खुले मन से बात करे। तीनों कानूनों को बगैर विलंब के सस्पेंड कर दिया जाए। प्रधानमंत्री किसानों से खुद बात करें तथा सभी प्रकार का पूर्वाग्रह छोड़कर ही किसानों से बातचीत हो।
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