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8 प्राइवेट अस्पताल ब्लड घोटाले की जद में
ब्यूरो कैथ्ाल
Updated Fri, 10 Mar 2017 12:50 AM IST
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निजी अस्पतालों कर रिकॉर्ड खंगालती रही स्वास्थ्य विभाग की टीम
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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जिला अस्पताल के ब्लड बैंक से ब्लड बेचे जाने के मामले में जांच के दायरे में 8 प्राइवेट अस्पताल भी आ गए हैं। विभाग द्वारा अधिकारियों के बाद एक अन्य टीम का गठन कर दिया गया है। जो इन अस्पतालों का रिकॉर्ड खंगाल रही है। विभागीय सूत्रों ने इस बात की पुष्टि की है कि ब्लड बेचे जान का काम प्राइवेट अस्पतालों के कर्मचारियों व सरकारी अस्पताल में ब्लड बैंक में कार्यरत कर्मचारियों की मिलीभगत से हो रहा था। फिलहाल इस जांच का दायरा और भी बढ़ सकता है।
ब्लड बैंक से फर्जी नामों से निकलवाया गया है ब्लड
जिला अस्पताल में स्थित ब्लड बैंक से फर्जी मरीजों के नाम से ब्लड की यूनिट जारी करवाकर उन्हें बाजार में बेचे जाने की बात सामने आई थी। जिस पर सीएमओ डा. मनीष बंसल ने करीब पंद्रह दिन पहले टीम का गठन किया था। इस टीम ने जिला अस्पताल से रिकॉर्ड हासिल किया। जिसमें प्रारंभिक जांच में गंभीर गड़बड़ी पाए जाने पर जांच का दायरा अब बढ़ा दिया गया है।
शहर के 8 बड़े प्राइवेट अस्पताल आए जांच की जद में
विभागीय सूत्रों ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई कि फर्जी नाम से ब्लड यूनिट जारी करवाने के बाद उन्हें प्राइवेट अस्पतालों को बेच दिया जाता था, जहां ब्लड की खपत ज्यादा होती है। इन 8 अस्पतालों में वे अस्पताल शामिल हैं, जहां गर्भवती महिलाओं के ऑपरेशन होते हैं। साथ ही अन्य प्रकार की सर्जरी होती है। जिसमें खून की जरूरत पड़ती है। बताया तो यह भी जा रहा है कि एक प्राइवेट अस्पताल का कर्मचारी इस गिरोह में अहम भूमिका निभाता था, जो सरकारी अस्पताल के एक बड़े कर्मचारी से सीधा मिला हुआ है। लेकिन जांच अधूरी होने के चलते अभी कोई इस बारे में बोलने को तैयार नहीं हैं।
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वीरवार को कई अस्पतालों से तलब किया गया रिकॉर्ड
वीरवार को स्वास्थ्य विभाग द्वारा गठित की गई चिकित्सकों की टीम के अलावे कर्मचारियों को शामिल करते हुए एक और टीम का गठन किया गया है। इस टीम ने दो बड़े अस्पतालों में पहुंच कर पिछले छह माह का उन मरीजों का रिकॉर्ड खंगाला, जिन्हें ब्लड यूनिट चढ़ाई गई थी। कर्मचारी उन लोगों की सूची बना रहे हैं, जिन्हें इस अवधि में सरकारी अस्पताल से ब्लड यूनिट लाकर चढ़ाई गई थी। ताकि पता लगाया जा सके कि यह ब्लड यूनिट अस्पताल से नियमानुसार जारी करवाई गई थी या फिर उसके फर्जी कागजात थे। मुख्य जांच अधिकारी डा. देवेंद्र ने भी इस टीम के साथ एक प्राइवेट अस्पताल में जाकर जानकारी जुटाई।
जांच अधिकारी डा. देवेंद्र सिंह ने बताया कि कर्मचारियों की टीम को भी जांच में शामिल किया गया है। ताकि बारीकि से रिकॉर्ड देखा जा सके। वीरवार को प्राइवेट अस्पतालों के रिकॉर्ड का मिलान किया गया है। अभी यह जांच जारी है। जांच पूरी होने के बाद ही कुछ बता सकेंगे।
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ब्लड बैंक से फर्जी नामों से निकलवाया गया है ब्लड
जिला अस्पताल में स्थित ब्लड बैंक से फर्जी मरीजों के नाम से ब्लड की यूनिट जारी करवाकर उन्हें बाजार में बेचे जाने की बात सामने आई थी। जिस पर सीएमओ डा. मनीष बंसल ने करीब पंद्रह दिन पहले टीम का गठन किया था। इस टीम ने जिला अस्पताल से रिकॉर्ड हासिल किया। जिसमें प्रारंभिक जांच में गंभीर गड़बड़ी पाए जाने पर जांच का दायरा अब बढ़ा दिया गया है।
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शहर के 8 बड़े प्राइवेट अस्पताल आए जांच की जद में
विभागीय सूत्रों ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई कि फर्जी नाम से ब्लड यूनिट जारी करवाने के बाद उन्हें प्राइवेट अस्पतालों को बेच दिया जाता था, जहां ब्लड की खपत ज्यादा होती है। इन 8 अस्पतालों में वे अस्पताल शामिल हैं, जहां गर्भवती महिलाओं के ऑपरेशन होते हैं। साथ ही अन्य प्रकार की सर्जरी होती है। जिसमें खून की जरूरत पड़ती है। बताया तो यह भी जा रहा है कि एक प्राइवेट अस्पताल का कर्मचारी इस गिरोह में अहम भूमिका निभाता था, जो सरकारी अस्पताल के एक बड़े कर्मचारी से सीधा मिला हुआ है। लेकिन जांच अधूरी होने के चलते अभी कोई इस बारे में बोलने को तैयार नहीं हैं।
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वीरवार को कई अस्पतालों से तलब किया गया रिकॉर्ड
वीरवार को स्वास्थ्य विभाग द्वारा गठित की गई चिकित्सकों की टीम के अलावे कर्मचारियों को शामिल करते हुए एक और टीम का गठन किया गया है। इस टीम ने दो बड़े अस्पतालों में पहुंच कर पिछले छह माह का उन मरीजों का रिकॉर्ड खंगाला, जिन्हें ब्लड यूनिट चढ़ाई गई थी। कर्मचारी उन लोगों की सूची बना रहे हैं, जिन्हें इस अवधि में सरकारी अस्पताल से ब्लड यूनिट लाकर चढ़ाई गई थी। ताकि पता लगाया जा सके कि यह ब्लड यूनिट अस्पताल से नियमानुसार जारी करवाई गई थी या फिर उसके फर्जी कागजात थे। मुख्य जांच अधिकारी डा. देवेंद्र ने भी इस टीम के साथ एक प्राइवेट अस्पताल में जाकर जानकारी जुटाई।
जांच अधिकारी डा. देवेंद्र सिंह ने बताया कि कर्मचारियों की टीम को भी जांच में शामिल किया गया है। ताकि बारीकि से रिकॉर्ड देखा जा सके। वीरवार को प्राइवेट अस्पतालों के रिकॉर्ड का मिलान किया गया है। अभी यह जांच जारी है। जांच पूरी होने के बाद ही कुछ बता सकेंगे।