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Kaithal News: मोहना की खिलाड़ी अलीशा ने कराटे में चमकाया नाम
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अलीशा
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कैथल। गांव मोहना की बेटी अलीशा ने कराटे के क्षेत्र में लगातार शानदार प्रदर्शन कर प्रदेश और देश का नाम रोशन किया है। राष्ट्रीय से लेकर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक उन्होंने कई पदक जीतकर अपनी अलग पहचान बनाई है। अलीशा ने बताया कि हाल ही में इंडोनेशिया के बाली में आयोजित 22वीं सीनियर एशियन कराटे चैंपियनशिप में जापान, चीन, ईरान और वियतनाम जैसी मजबूत टीमों के खिलाड़ियों को हराकर स्वर्ण पदक जीतना उनके लिए सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल है।
अलीशा ने बताया कि उनका सफर आसान नहीं रहा। उनके पिता जसमेर किसान हैं और माता संतोष गृहिणी हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति सामान्य होने के बावजूद माता-पिता ने कभी खेल छोड़ने का दबाव नहीं बनाया। शुरुआती दिनों में वह गांव से कई किलोमीटर दूर स्थित अकादमी तक साइकिल से प्रशिक्षण लेने जाती थीं। नियमित अभ्यास और दृढ़ संकल्प ने उन्हें लगातार आगे बढ़ने की ताकत दी। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष एशियन कराटे चैंपियनशिप में कांस्य पदक मिलने के बाद उन्होंने अपनी कमियों का गहराई से विश्लेषण किया। फिटनेस, तकनीक और मानसिक तैयारी पर विशेष मेहनत की। उसी मेहनत का परिणाम रहा कि एक वर्ष के भीतर उन्होंने कांस्य पदक को स्वर्ण में बदल दिया और एशियाई स्तर पर नया इतिहास रच दिया। वे सुबह-शाम दो घंटे अभ्यास करती हैं।
कोच ने गिनवाईं उपलब्धियां
कोच विकास ढलवाल ने कहा कि उनकी अब तक की उपलब्धियों में लगातार छह बार राष्ट्रीय कराटे चैंपियनशिप का स्वर्ण पदक, चार बार ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स का स्वर्ण पदक, दो बार कॉमनवेल्थ कराटे चैंपियनशिप का स्वर्ण पदक, साउथ एशियन कराटे चैंपियनशिप में एक स्वर्ण व एक कांस्य पदक, डब्ल्यूकेएफ कराटे सीरीज-ए में कांस्य पदक, 2025 एशियन कराटे चैंपियनशिप में कांस्य और 2026 की 22वीं सीनियर एशियन कराटे चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक शामिल हैं।
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हर प्रतियोगिता उन्हें कुछ नया सिखाती है : अलीशा
अलीशा का कहना है कि हर प्रतियोगिता उन्हें कुछ नया सिखाती है। जीत से आत्मविश्वास मिलता है, जबकि हार या कमतर प्रदर्शन आगे बेहतर करने की प्रेरणा देता है। उनका लक्ष्य भविष्य में विश्व स्तर की प्रतियोगिताओं में देश के लिए और अधिक पदक जीतना है। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों की बेटियों से भी खेलों में आगे आने की अपील करते हुए कहा कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत निरंतर की जाए तो सीमित संसाधन भी सफलता की राह में बाधा नहीं बनते। परिवार का सहयोग, अनुशासन और नियमित अभ्यास किसी भी खिलाड़ी को ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है।
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अलीशा ने बताया कि उनका सफर आसान नहीं रहा। उनके पिता जसमेर किसान हैं और माता संतोष गृहिणी हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति सामान्य होने के बावजूद माता-पिता ने कभी खेल छोड़ने का दबाव नहीं बनाया। शुरुआती दिनों में वह गांव से कई किलोमीटर दूर स्थित अकादमी तक साइकिल से प्रशिक्षण लेने जाती थीं। नियमित अभ्यास और दृढ़ संकल्प ने उन्हें लगातार आगे बढ़ने की ताकत दी। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष एशियन कराटे चैंपियनशिप में कांस्य पदक मिलने के बाद उन्होंने अपनी कमियों का गहराई से विश्लेषण किया। फिटनेस, तकनीक और मानसिक तैयारी पर विशेष मेहनत की। उसी मेहनत का परिणाम रहा कि एक वर्ष के भीतर उन्होंने कांस्य पदक को स्वर्ण में बदल दिया और एशियाई स्तर पर नया इतिहास रच दिया। वे सुबह-शाम दो घंटे अभ्यास करती हैं।
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कोच ने गिनवाईं उपलब्धियां
कोच विकास ढलवाल ने कहा कि उनकी अब तक की उपलब्धियों में लगातार छह बार राष्ट्रीय कराटे चैंपियनशिप का स्वर्ण पदक, चार बार ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स का स्वर्ण पदक, दो बार कॉमनवेल्थ कराटे चैंपियनशिप का स्वर्ण पदक, साउथ एशियन कराटे चैंपियनशिप में एक स्वर्ण व एक कांस्य पदक, डब्ल्यूकेएफ कराटे सीरीज-ए में कांस्य पदक, 2025 एशियन कराटे चैंपियनशिप में कांस्य और 2026 की 22वीं सीनियर एशियन कराटे चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक शामिल हैं।
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हर प्रतियोगिता उन्हें कुछ नया सिखाती है : अलीशा
अलीशा का कहना है कि हर प्रतियोगिता उन्हें कुछ नया सिखाती है। जीत से आत्मविश्वास मिलता है, जबकि हार या कमतर प्रदर्शन आगे बेहतर करने की प्रेरणा देता है। उनका लक्ष्य भविष्य में विश्व स्तर की प्रतियोगिताओं में देश के लिए और अधिक पदक जीतना है। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों की बेटियों से भी खेलों में आगे आने की अपील करते हुए कहा कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत निरंतर की जाए तो सीमित संसाधन भी सफलता की राह में बाधा नहीं बनते। परिवार का सहयोग, अनुशासन और नियमित अभ्यास किसी भी खिलाड़ी को ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है।

अलीशा