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स्मैक तस्करी के दोषी को 8 साल के कठोर कारावास की सजा
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कैथल। जिला एवं सत्र न्यायाधीश एमएम धौंचक ने स्मैक रखने के आरोपी एक व्यक्ति को दोषी करार देते हुए आठ साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। दोषी को 1 लाख 50 हजार रुपये जुर्माना भी अदा करना होगा।
बतौर विशेष न्यायाधीश सत्र न्यायाधीश एमएम धौंचक ने नार्कोटिक ड्रग्स एंड साईकोट्रोपिक सबस्टैंसिज अधिनियम 1985 की धारा 21 बी के तहत किठाना निवासी रामनिवास उर्फ नवासा पुत्र मेवा राम को 100 ग्राम स्मैक रखने का दोषी करार देते हुए उन्हें 8 वर्ष कठोर कारावास एवं 1 लाख 50 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई है। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में दोषी व्यक्ति को एक वर्ष अतिरिक्त सामान्य कारावास की सजा भुगतनी होगी। न्यायालय द्वारा इस मामले का फैसला केवल 36 दिन में सुना दिया गया है। पुलिस ने उसके पास से 100 ग्रासम स्मैक बरामद करते हुए एनडीपीएस अधिनियम की धारा 21 के तहत मामला दर्ज किया गया। पुलिस द्वारा 31 मई 2019 को न्यायालय में चालान पेश किया गया तथा उन्हें 3 जून 2019 को चार्जशीट किया गया। इस मुकदमे का केवल 36 दिन में फैसला सुना दिया गया। न्यायाधीश द्वारा मामले के आंकड़ों व परिस्थितियों विशेषकर इस रतथ्य को ध्यान में रखते हुए कि अभियुक्त को इससे पूर्व भी इस अधिनियम के तहत दोषी ठहराया जा चुका है और वह खुद को सुधारने में असफल रहने पर उन्हें कठोर सजा सुनाई गई है। इस मामले की पैरवी पब्लिक प्रोसिक्यूटर जनक राज ने की।
न्यायाधीश ने फैसला सुनाते हुए कहा कि आज विश्व का कोई भी हिस्सा मादक पदार्थों की तस्करी एवं मादक पदार्थों की लत के अभिशाप से अछूता नहीं रह गया है। दुर्भाग्य से हमारा देश भी मादक पदार्थों की तस्करी के जाल में फंस चुका है तथा मादक पदार्थों की लत से ग्रसित लोगों की संख्या तेज गति से बढ़ रही है।
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बतौर विशेष न्यायाधीश सत्र न्यायाधीश एमएम धौंचक ने नार्कोटिक ड्रग्स एंड साईकोट्रोपिक सबस्टैंसिज अधिनियम 1985 की धारा 21 बी के तहत किठाना निवासी रामनिवास उर्फ नवासा पुत्र मेवा राम को 100 ग्राम स्मैक रखने का दोषी करार देते हुए उन्हें 8 वर्ष कठोर कारावास एवं 1 लाख 50 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई है। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में दोषी व्यक्ति को एक वर्ष अतिरिक्त सामान्य कारावास की सजा भुगतनी होगी। न्यायालय द्वारा इस मामले का फैसला केवल 36 दिन में सुना दिया गया है। पुलिस ने उसके पास से 100 ग्रासम स्मैक बरामद करते हुए एनडीपीएस अधिनियम की धारा 21 के तहत मामला दर्ज किया गया। पुलिस द्वारा 31 मई 2019 को न्यायालय में चालान पेश किया गया तथा उन्हें 3 जून 2019 को चार्जशीट किया गया। इस मुकदमे का केवल 36 दिन में फैसला सुना दिया गया। न्यायाधीश द्वारा मामले के आंकड़ों व परिस्थितियों विशेषकर इस रतथ्य को ध्यान में रखते हुए कि अभियुक्त को इससे पूर्व भी इस अधिनियम के तहत दोषी ठहराया जा चुका है और वह खुद को सुधारने में असफल रहने पर उन्हें कठोर सजा सुनाई गई है। इस मामले की पैरवी पब्लिक प्रोसिक्यूटर जनक राज ने की।
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न्यायाधीश ने फैसला सुनाते हुए कहा कि आज विश्व का कोई भी हिस्सा मादक पदार्थों की तस्करी एवं मादक पदार्थों की लत के अभिशाप से अछूता नहीं रह गया है। दुर्भाग्य से हमारा देश भी मादक पदार्थों की तस्करी के जाल में फंस चुका है तथा मादक पदार्थों की लत से ग्रसित लोगों की संख्या तेज गति से बढ़ रही है।
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