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क्लीनिकल एस्टॉब्लिशमेंट एक्ट के विरोध में बंद रहे जिला के 200 निजी अस्पताल
Updated Fri, 15 Dec 2017 11:58 PM IST
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निजी डॉक्टरों की हड़ताल से इलाज के लिए भटकते रहे मरीज
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। सरकार द्वारा क्लीनिकल एस्टाब्लिशमेंट एक्ट को लागू किए जाने के फैसले के विरोध में शुक्रवार को जिला भर के करीब 200 से अधिक निजी अस्पताल बंद रहे। जिस कारण इलाज के लिए प्राइवेट अस्पतालों में पहुंचने वाले सभी मरीजों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी। चिकित्सकों ने हड़ताल कर मौन प्रदर्शन करते हुए डीसी को ज्ञापन सौंपा।
सबसे पहले सभी निजी डॉक्टर जवाहर पार्क में एकत्रित हुए जिसके बाद वे प्रदर्शन करते हुए लघु सचिवालय में पहुंचे। जहां उन्होंने डीसी को सरकार के नाम एक ज्ञापन भी सौंपा। प्रदर्शन की अध्यक्षता आईएमए के जिला प्रधान डा विजय आर्या ने की। जिला प्रधान ने कहा कि सरकार दमनकारी एस्टाबलिस्ट एक्ट को ला रही है। जो डाक्टर व जनविरोधी है। इस एक्ट के लागू होने से मरीजों को कॉरपोरेट अस्पताल के महंगे इलाज की ओर धकेल रहे हैं। इस एक्ट के आने के बाद सस्ते में इलाज करने वाले अस्पतालों पर ताला लटक जाएगा। जिससे डाक्टरों का रोजगार भी छीना जाएगा और आम जनता को भी परेशानी होगी।
वरिष्ठ चिकित्सक एवं एनएचएम गैर सरकारी सदस्य डा. अशोक गर्ग ने कहा कि हरियाणा के मुख्यमंत्री के समक्ष इस संबंध में समस्या रखी गई है कि इस एक्ट के कारण अस्पताल चलाना मुश्किल हो जाएगा। इसलिए चिकित्सक इस एक्ट के विरोध में एकजुट हैं।
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चिकित्सकों ने डा. विजय आर्य अस्पताल के बाहर दिन भर धरना दिया और इस एक्ट को लेकर रोष जताया। इस मौके पर संगठन के सचिव दीपक गर्ग, डा नवीन बंसल, डा. संजीव जिंदल, डा. रमेश बंसल, डा. महेंद्र शाह, डा. एमसी गर्ग, डा. ओपी गोयल, डा. राज कीर्ति, डा. सोनी बंसल, डा. प्रवीन गर्ग, डा. डीपी गुप्ता, डा. ओपी गोयल, डा. छतवाल, डा. जसमेर, डा. आरके गोयल, डा. जसजीत व डा. देंवंद्र पवार मौजूद रहे।
प्रभावित रही स्वास्थ्य सेवाएं : निजी अस्पताल के डॉक्टरों की हड़ताल के कारण शुक्रवार को जिला भर के 200 निजी अस्पतालों सभी स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित रही। हड़ताल के कारण सभी निजी अस्पतालों में ताले लटके रहे। जिस कारण एक भी ओपीडी नहीं हुई। आईएमए से मिली जानकारी के अनुसार जिला के 200 अस्पतालों में 10 से 15 हजार ओपीडी होती है।
एक्सरे व अल्ट्रासाउंड की सेवाएं भी बंद, सरकारी अस्पताल में बढ़ी ओपीडी : निजी अस्पतालों की हड़ताल के बाद इलाज कराने आए मरीजों को इलाज नहीं मिला तो उन्हें सरकारी अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचना पड़ा। हड़ताल के कारण शुक्रवार को सरकारी अस्पताल में होने वाली ओपीडी में इजाफा हुआ। बता दें कि सरकारी अस्पताल में रोजाना करीब एक हजार ओपीडी होती है। लेकिन हड़ताल के कारण ओपीडी में इजाफा हुआ और इसकी संख्या डबल हुई। इसके साथ ही पूरे जिले के एक्सरे व अल्ट्रसाउंड केंद्र भी बंद रहे। जिससे कोई भी मरीज अपना एक्सरे और अल्ट्रसाउंड नहीं करवा सका। हिंदू स्कूल की प्रिंसिपल ममता कौशिक ने बताया कि वह अपनी बेटी का इलाज करवाने के लिए आई थी। लेकिन अस्पताल बंद मिलें। इसी प्रकार से भारत अस्पताल के बाहर पहुंची वीना ने बताया कि वह इलाज करवाने के लिए आई थी। लेकिन डॉक्टर नहीं है। इसी तरह से सौंगरी से विकास व उसकी पत्नी बच्चे का इलाज करवाने के लिए जीवन ज्योति अस्पताल में आए थे। उन्हें वापस लौटना पड़ा।
क्लीनिकल एस्टॉब्लिशमेंट एक्ट के विरोध में बंद रहे जिला के 200 निजी अस्पताल
एक्सरे व अल्ट्रासाउंड की सेवाएं भी रही बंद, हड़ताल के बाद सरकारी अस्पताल में बढ़ी ओपीडी, लोग पूरा दिन रहे परेशान
निजी अस्पतालों के डॉक्टरों ने प्रदर्शन कर डीसी को सौंपा ज्ञापन
फोटो नंबर-4 से 7
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अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। सरकार द्वारा क्लीनिकल एस्टाब्लिशमेंट एक्ट को लागू किए जाने के फैसले के विरोध में शुक्रवार को जिला भर के करीब 200 से अधिक निजी अस्पताल बंद रहे। जिस कारण इलाज के लिए प्राइवेट अस्पतालों में पहुंचने वाले सभी मरीजों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी। चिकित्सकों ने हड़ताल कर मौन प्रदर्शन करते हुए डीसी को ज्ञापन सौंपा।
सबसे पहले सभी निजी डॉक्टर जवाहर पार्क में एकत्रित हुए जिसके बाद वे प्रदर्शन करते हुए लघु सचिवालय में पहुंचे। जहां उन्होंने डीसी को सरकार के नाम एक ज्ञापन भी सौंपा। प्रदर्शन की अध्यक्षता आईएमए के जिला प्रधान डा विजय आर्या ने की। जिला प्रधान ने कहा कि सरकार दमनकारी एस्टाबलिस्ट एक्ट को ला रही है। जो डाक्टर व जनविरोधी है। इस एक्ट के लागू होने से मरीजों को कॉरपोरेट अस्पताल के महंगे इलाज की ओर धकेल रहे हैं। इस एक्ट के आने के बाद सस्ते में इलाज करने वाले अस्पतालों पर ताला लटक जाएगा। जिससे डाक्टरों का रोजगार भी छीना जाएगा और आम जनता को भी परेशानी होगी।
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वरिष्ठ चिकित्सक एवं एनएचएम गैर सरकारी सदस्य डा. अशोक गर्ग ने कहा कि हरियाणा के मुख्यमंत्री के समक्ष इस संबंध में समस्या रखी गई है कि इस एक्ट के कारण अस्पताल चलाना मुश्किल हो जाएगा। इसलिए चिकित्सक इस एक्ट के विरोध में एकजुट हैं।
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चिकित्सकों ने डा. विजय आर्य अस्पताल के बाहर दिन भर धरना दिया और इस एक्ट को लेकर रोष जताया। इस मौके पर संगठन के सचिव दीपक गर्ग, डा नवीन बंसल, डा. संजीव जिंदल, डा. रमेश बंसल, डा. महेंद्र शाह, डा. एमसी गर्ग, डा. ओपी गोयल, डा. राज कीर्ति, डा. सोनी बंसल, डा. प्रवीन गर्ग, डा. डीपी गुप्ता, डा. ओपी गोयल, डा. छतवाल, डा. जसमेर, डा. आरके गोयल, डा. जसजीत व डा. देंवंद्र पवार मौजूद रहे।
प्रभावित रही स्वास्थ्य सेवाएं : निजी अस्पताल के डॉक्टरों की हड़ताल के कारण शुक्रवार को जिला भर के 200 निजी अस्पतालों सभी स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित रही। हड़ताल के कारण सभी निजी अस्पतालों में ताले लटके रहे। जिस कारण एक भी ओपीडी नहीं हुई। आईएमए से मिली जानकारी के अनुसार जिला के 200 अस्पतालों में 10 से 15 हजार ओपीडी होती है।
एक्सरे व अल्ट्रासाउंड की सेवाएं भी बंद, सरकारी अस्पताल में बढ़ी ओपीडी : निजी अस्पतालों की हड़ताल के बाद इलाज कराने आए मरीजों को इलाज नहीं मिला तो उन्हें सरकारी अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचना पड़ा। हड़ताल के कारण शुक्रवार को सरकारी अस्पताल में होने वाली ओपीडी में इजाफा हुआ। बता दें कि सरकारी अस्पताल में रोजाना करीब एक हजार ओपीडी होती है। लेकिन हड़ताल के कारण ओपीडी में इजाफा हुआ और इसकी संख्या डबल हुई। इसके साथ ही पूरे जिले के एक्सरे व अल्ट्रसाउंड केंद्र भी बंद रहे। जिससे कोई भी मरीज अपना एक्सरे और अल्ट्रसाउंड नहीं करवा सका। हिंदू स्कूल की प्रिंसिपल ममता कौशिक ने बताया कि वह अपनी बेटी का इलाज करवाने के लिए आई थी। लेकिन अस्पताल बंद मिलें। इसी प्रकार से भारत अस्पताल के बाहर पहुंची वीना ने बताया कि वह इलाज करवाने के लिए आई थी। लेकिन डॉक्टर नहीं है। इसी तरह से सौंगरी से विकास व उसकी पत्नी बच्चे का इलाज करवाने के लिए जीवन ज्योति अस्पताल में आए थे। उन्हें वापस लौटना पड़ा।
क्लीनिकल एस्टॉब्लिशमेंट एक्ट के विरोध में बंद रहे जिला के 200 निजी अस्पताल
एक्सरे व अल्ट्रासाउंड की सेवाएं भी रही बंद, हड़ताल के बाद सरकारी अस्पताल में बढ़ी ओपीडी, लोग पूरा दिन रहे परेशान
निजी अस्पतालों के डॉक्टरों ने प्रदर्शन कर डीसी को सौंपा ज्ञापन
फोटो नंबर-4 से 7