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श्री राम की चरण पादुका को अपने माथे पर लगा, राज सिहांसन का लेते प्रण
Updated Wed, 27 Sep 2017 12:19 AM IST
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श्रीराम की चरण पादुका माथे लगा भरत ने राज सिंहासन का लिया प्रण
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। चंदाना गेट स्थित श्री ग्यारह रुद्री मंदिर में श्री गणेश ड्रामाटिक क्लब की ओर से आयोजित रामलीला मंचन में सोमवार की रात को राम का भरत के साथ मिलाप का दृश्य दिखाया गया। सबसे पहले क्लब के सभी कलाकारों द्वारा मां सरस्वती की प्रार्थना की गई। राम का अवध से विदाई लेने के बाद सोमवंत और प्रजावासी उन्हें वन की ओर ले जाते हैै। जिसके बाद खेवट द्वारा गंगा पार करवाई जाती है। राजा निषादराज भरत से मिलते हैं। भरत अवध पहुंचने के बाद माता कैकेयी के संवाद होता है। इस दौरान दशरथ राम के विलाप में प्राण चले जाते हैं। उनका जब कैकेयी से संवाद होता है तो वह पूछते है मां ऐसा क्या कारण था कि पिताजी स्वर्ग सिधार गए। वे पूछते है भैया राम, लक्ष्मण और माता सीता कहां हैं। कैकेयी काफी लंबे समय तक भरत को कुछ नहीं बताती। बाद में वे उसे सारी बात बतला देती है। जिस पर भरत अफसोस करते है और वन की ओर श्री राम से मिलने के लिए चले आते है। श्रीराम से मिलकर भरत रो रो कर श्री राम को वापस अयोध्या चलने के लिए कहते है तो वे अपनी मर्यादा बनाए रखते है। भरत श्री राम के आगे फूट फूट कर रोते है। सारी बात बतला देते हैं। वे श्री राम की चरण पादुका को अपने माथे पर लगाते है और कहते है कि वे 14 वर्षों तक उन की चरण पादुका को राज सिहांसन पर बैठाएगें। मंचन में चन्नी ने राम, सोनू ने लक्ष्मण, अजय सैनी ने सीता, रमेश सैनी ने कैकेयी, विनोद ने भरत, जयप्रकाश ने शत्रुघ्न का रोल अदा किया। इस मौके पर क्लब प्रधान पुनीत चौधरी, महावीर गर्ग, निर्देशक धर्मबीर असीजा, रमेश चंद जांगड़ा, जगरूप सैनी, संजीवन शर्मा, पदम लटकानियां, जयप्रकाश गुप्ता व गौरव सहित अन्य मौजूद रहे।
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अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। चंदाना गेट स्थित श्री ग्यारह रुद्री मंदिर में श्री गणेश ड्रामाटिक क्लब की ओर से आयोजित रामलीला मंचन में सोमवार की रात को राम का भरत के साथ मिलाप का दृश्य दिखाया गया। सबसे पहले क्लब के सभी कलाकारों द्वारा मां सरस्वती की प्रार्थना की गई। राम का अवध से विदाई लेने के बाद सोमवंत और प्रजावासी उन्हें वन की ओर ले जाते हैै। जिसके बाद खेवट द्वारा गंगा पार करवाई जाती है। राजा निषादराज भरत से मिलते हैं। भरत अवध पहुंचने के बाद माता कैकेयी के संवाद होता है। इस दौरान दशरथ राम के विलाप में प्राण चले जाते हैं। उनका जब कैकेयी से संवाद होता है तो वह पूछते है मां ऐसा क्या कारण था कि पिताजी स्वर्ग सिधार गए। वे पूछते है भैया राम, लक्ष्मण और माता सीता कहां हैं। कैकेयी काफी लंबे समय तक भरत को कुछ नहीं बताती। बाद में वे उसे सारी बात बतला देती है। जिस पर भरत अफसोस करते है और वन की ओर श्री राम से मिलने के लिए चले आते है। श्रीराम से मिलकर भरत रो रो कर श्री राम को वापस अयोध्या चलने के लिए कहते है तो वे अपनी मर्यादा बनाए रखते है। भरत श्री राम के आगे फूट फूट कर रोते है। सारी बात बतला देते हैं। वे श्री राम की चरण पादुका को अपने माथे पर लगाते है और कहते है कि वे 14 वर्षों तक उन की चरण पादुका को राज सिहांसन पर बैठाएगें। मंचन में चन्नी ने राम, सोनू ने लक्ष्मण, अजय सैनी ने सीता, रमेश सैनी ने कैकेयी, विनोद ने भरत, जयप्रकाश ने शत्रुघ्न का रोल अदा किया। इस मौके पर क्लब प्रधान पुनीत चौधरी, महावीर गर्ग, निर्देशक धर्मबीर असीजा, रमेश चंद जांगड़ा, जगरूप सैनी, संजीवन शर्मा, पदम लटकानियां, जयप्रकाश गुप्ता व गौरव सहित अन्य मौजूद रहे।