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गांव बाबा लदाना में डेरा बाबा राजपुरी गद्दी का विवाद
Updated Thu, 23 Aug 2018 11:17 PM IST
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दोनों पक्षों ने रखा एसडीएम के सामने पक्ष
- गांव बाबा लदाना के राजपुरी डेरे की गद्दी का विवाद
फोटो संख्या-25
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। बाबा लदाना के राजपुरी डेरे की गद्दी को लेकर चल रहे विवाद में वीरवार को दोनों पक्षों ने एसडीएम कमलप्रीत कौर के सामने अपना-अपना पक्ष रखा। दोनों पक्ष दिन भर लघु सचिवालय में डटे रहे। शाम को हुई बैठक में एसडीएम की मौजूदगी में दोनों में तीखी नोक-झोंक हुई। दोनों पक्षों की सुनने के बाद एसडीएम ने एक दिन का समय लेते हुए शनिवार को फैसला करने की बात कही है।
विदित रहे कि यहां महंत दूजपुरी को डेरे की गद्दी से हटाए जाने व महंत प्रेमपुरी को डेरे का महंत बनाए जाने को लेकर विवाद चल रहा है। महंत दूजपूरी ने कहा कि वे इस डेरे में 30 वर्ष से रहे हैं। यह उनके गुरु का स्थान है। उनके विकास कार्यों को देखते हुए गांव के कुछ साधू लोगों को भड़का रहे हैं। इन साधुओं का डेरे से कोई लेना देना नहीं है और न ही बाबा राजपुरी के परिवार से है। उनके डेरे में 50 एकड़ की डिग्री हो चुकी है। उन्होंने बताया कि पट्टेदारों ने उन्हें आठ लाख रुपये देने की कोशिश की थी। लेकिन उन्होंने ऐसी किसी भी पेशकश को स्वीकार नहीं किया। इसी कारण उनके खिलाफ साजिश रची गई। एक 80 वर्षीय बुजुर्ग साधु को आगेे करके अज्ञात लोगों द्वारा डेरे में विवाद कराया गया। उस साधु को न तो आंखों से दिखाई देता है और न ही कानों से सुनाई देता है। इस मौके पर कर्मबीर, नरेश, बलजीत, सुरेश पूर्व सरपंच, राम ढुल, सुबे राम शर्मा, बीरा, भूरिया, ओमा, बजिंद्र, चमनगिरी, मोमन गिरी, रघबी सैनी मौजूद रहे।
वहीं महंत प्रेमपुरी के समर्थक ने बताया कि महंत दूजपुरी ने लिखित दिया कि वे डेरे को छोड़ कर जा रहे हैं। दोबारा डेरे में गद्दी पर नहीं बैठेंगे। बाबा के चले जाने के बाद गांव की सहमति से महंत प्रेमपुरी को गद्दी सौंपी गई। परंतु दूजपुरी के मन में डेरे की संपत्ति का लालच है। क्योंकि डेरे के पास बहुत जमीन है। हर साल डेरे की लाखों रुपये की फसल बिकती है। डेरे में दशहरे के त्योहार पर 12 लाख की आय है। जिसके कारण दूजपूरी ने प्रेमपुरी के समर्थकों से झगड़ा कर लिया।
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दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद एमडीएम ने कहा कि सबसे जरूरी गांव में शांत माहौल बनाए रखना है। उन्होंने एक दिन का समय लेते हुए शनिवार को फैसला सुनाने की बात कही। इस मौके पर महंत रूद्रपूरी प्यौदा, श्रीमंत डेरा बाबा राजपुरी मठ बात्ता, महंत हीरापुरी डेरा बाबा राजपुरी बड़ी देवी कैथल, श्रीमंत नरेश पुरी, महंत मूर्तिपुरी आदर्श गऊशाला बात्ता, कारोबारी मथुरापुरी डेरा बाबा राजपुरी बाबा लदाना, नरेश पुरी दूना बाबा राजपूरी पाड़ला, कल्याण पूरी न्यौली, केसर पूरी महंत डेरा बाबा दयालपुरी छछरौली, अष्ट कौशल मौजूद रहे।
एसडीएम के सामने हुई तीखी नोक-झोंक : डेरे की गद्दी को लेकर एसडीएम के सामने दोनों पक्ष जब अपनी-अपनी बात रख रहे थे। इस बीच कई अवसर ऐसे आए जब, दोनों पक्षों में तीखी नोक-झोंक हुई। एक बार तो एक पक्ष के लोग खड़े हो गए और अपनी बात रखने लगे। एसडीएम ने दोनों पक्षों को समझा-बुझाकर शांत किया।
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- गांव बाबा लदाना के राजपुरी डेरे की गद्दी का विवाद
फोटो संख्या-25
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। बाबा लदाना के राजपुरी डेरे की गद्दी को लेकर चल रहे विवाद में वीरवार को दोनों पक्षों ने एसडीएम कमलप्रीत कौर के सामने अपना-अपना पक्ष रखा। दोनों पक्ष दिन भर लघु सचिवालय में डटे रहे। शाम को हुई बैठक में एसडीएम की मौजूदगी में दोनों में तीखी नोक-झोंक हुई। दोनों पक्षों की सुनने के बाद एसडीएम ने एक दिन का समय लेते हुए शनिवार को फैसला करने की बात कही है।
विदित रहे कि यहां महंत दूजपुरी को डेरे की गद्दी से हटाए जाने व महंत प्रेमपुरी को डेरे का महंत बनाए जाने को लेकर विवाद चल रहा है। महंत दूजपूरी ने कहा कि वे इस डेरे में 30 वर्ष से रहे हैं। यह उनके गुरु का स्थान है। उनके विकास कार्यों को देखते हुए गांव के कुछ साधू लोगों को भड़का रहे हैं। इन साधुओं का डेरे से कोई लेना देना नहीं है और न ही बाबा राजपुरी के परिवार से है। उनके डेरे में 50 एकड़ की डिग्री हो चुकी है। उन्होंने बताया कि पट्टेदारों ने उन्हें आठ लाख रुपये देने की कोशिश की थी। लेकिन उन्होंने ऐसी किसी भी पेशकश को स्वीकार नहीं किया। इसी कारण उनके खिलाफ साजिश रची गई। एक 80 वर्षीय बुजुर्ग साधु को आगेे करके अज्ञात लोगों द्वारा डेरे में विवाद कराया गया। उस साधु को न तो आंखों से दिखाई देता है और न ही कानों से सुनाई देता है। इस मौके पर कर्मबीर, नरेश, बलजीत, सुरेश पूर्व सरपंच, राम ढुल, सुबे राम शर्मा, बीरा, भूरिया, ओमा, बजिंद्र, चमनगिरी, मोमन गिरी, रघबी सैनी मौजूद रहे।
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वहीं महंत प्रेमपुरी के समर्थक ने बताया कि महंत दूजपुरी ने लिखित दिया कि वे डेरे को छोड़ कर जा रहे हैं। दोबारा डेरे में गद्दी पर नहीं बैठेंगे। बाबा के चले जाने के बाद गांव की सहमति से महंत प्रेमपुरी को गद्दी सौंपी गई। परंतु दूजपुरी के मन में डेरे की संपत्ति का लालच है। क्योंकि डेरे के पास बहुत जमीन है। हर साल डेरे की लाखों रुपये की फसल बिकती है। डेरे में दशहरे के त्योहार पर 12 लाख की आय है। जिसके कारण दूजपूरी ने प्रेमपुरी के समर्थकों से झगड़ा कर लिया।
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दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद एमडीएम ने कहा कि सबसे जरूरी गांव में शांत माहौल बनाए रखना है। उन्होंने एक दिन का समय लेते हुए शनिवार को फैसला सुनाने की बात कही। इस मौके पर महंत रूद्रपूरी प्यौदा, श्रीमंत डेरा बाबा राजपुरी मठ बात्ता, महंत हीरापुरी डेरा बाबा राजपुरी बड़ी देवी कैथल, श्रीमंत नरेश पुरी, महंत मूर्तिपुरी आदर्श गऊशाला बात्ता, कारोबारी मथुरापुरी डेरा बाबा राजपुरी बाबा लदाना, नरेश पुरी दूना बाबा राजपूरी पाड़ला, कल्याण पूरी न्यौली, केसर पूरी महंत डेरा बाबा दयालपुरी छछरौली, अष्ट कौशल मौजूद रहे।
एसडीएम के सामने हुई तीखी नोक-झोंक : डेरे की गद्दी को लेकर एसडीएम के सामने दोनों पक्ष जब अपनी-अपनी बात रख रहे थे। इस बीच कई अवसर ऐसे आए जब, दोनों पक्षों में तीखी नोक-झोंक हुई। एक बार तो एक पक्ष के लोग खड़े हो गए और अपनी बात रखने लगे। एसडीएम ने दोनों पक्षों को समझा-बुझाकर शांत किया।