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जीएसटी - टैक्स से ज्यादा कागजी कार्रवाई से सहमे व्यापारी
Updated Sat, 01 Jul 2017 12:15 AM IST
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जीएसटी : टैक्स से ज्यादा कागजी कार्रवाई से सहमे हैं व्यापारी
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। शुक्रवार मध्यरात्रि से लागू होने वाले जीएसटी में टैक्स महंगे व सस्ते की बजाए व्यापारियों में कागजी कार्रवाई का भय ज्यादा है। एक साल में 37 आयकर रिटर्न भरने सहित कागजी कार्रवाई को लेकर मिल रही जानकारियों, आधी अधूरी सूचनाओं व नियमों पर उहापोह की स्थिति से बाजार में असमंजस है। व्यापारी देशहित में जीएसटी का स्वागत तो कर रहे हैं। लेकिन स्थिति स्पष्ट न होने के कारण असमंजस में हैं। अमर उजाला ने विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों से जीएसटी को लेकर बात की तो यही बात सामने आई कि अभी नियमों व पूरे एक्ट के सामने न आने के कारण तस्वीर साफ नहीं हैं। वहीं दो दिनों से होल सेले कपड़ा व्यापारियों की चल रही हड़ताल शुक्रवार को समाप्त हो गई।
इलेक्ट्रॉनिक्स पर नहीं पड़ेगा ज्यादा असर
प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक्स व्यापारी हरीश कालड़ा के अनुसार जीएसटी से टैक्स में ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा। सामान 2 प्रतिशत तक महंगा हो सकता है। यह देशहित में है। इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों के सस्ता होने की बात पर उन्होंने कहा कि जिन व्यापारियों के पास दो से तीन साल पुराना स्टॉक था, उसमें अपने मार्जिन को कम करके किसी तरह निकाला है। इससे ज्यादा कुछ नहीं है।
व्यापारी देशराज ने कहा कि जीएसटी देशहित में है। इससे पूरा व्यापार एक नंबर में आ जाएगा।
कागजी कार्रवाई से ज्यादा परेशानी
कैथल हार्डवेयर मशीनरी एसोसिएशन के अध्यक्ष सुमेर का कहना है कि टैक्स लगे अच्छी बात है। लेकिन हर दस दिन में रिटर्न भरने के कागजात तैयार करने हैं, ये कैसे होगा? इस बात को लेकर ज्यादा चिंता है। जो बड़े व्यापारी हैं। उनके लिए यह बड़ी परेशानी पैदा होने जा रही है। जीएसटी का सरलीकरण होना चाहिए था।
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खल पर 5 प्रतिशत जीएसटी से परेशानी
खल बिनौला एसोसिएशन के प्रधान शिव नारायण गोयल का कहना है कि बिनौले पर पहले महज 2 प्रतिशत सीएसटी लगता था। हरियाणा में बिनौला या खल पर टैक्स नहीं था। अब 5 प्रतिशत जीएसटी लगा दिया गया है। 37 रिटर्न भरना मुश्किल कार्य है।
कालाबाजारी रुकेगी
कैथल इलेक्ट्रिकल वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान प्रयाग राज बालू ने बताया कि जीएसटी लागू होने से काला बाजारी रुकेगी। सरकार को अधिक टैक्स मिलेगा। लेकिन व्यापारी जीएसटी व्यवस्था के लिए पूरी तरह से तैयार नहीं है। अधिकतर व्यापारी शिक्षित नहीं हैं, जिसके कारण जीएसटी के बारे में पूरी जानकारी नहीं है। पहले तीन महीने तक दिक्कतें रहेगी। इसके बाद सब सामान्य हो जाएगा।
व्यापारी बन जाएगा अकाउंटेंट
मेन बाजार एसोसिएशन के सचिव चंद्रगुप्त गोयल ने बताया कि जीएसटी के लागू होने से व्यापारी अकाउंटेंट बनकर रह जाएगा। छोटे दुकानदारों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि जूतों पर 500 तक टेक्स था। लेकिन जीएसटी लागू होने के बाद 500 रुपये तक 5 प्रतिशत टैक्स व 501 से आगे तक 18 प्रतिशत टैक्स कर दिया है।
सर्राफा व्यापार पर होगा असर
सर्राफा एसोसिएशन कैथल के प्रधान राजिंद्र कुमार ने बताया कि कम पढ़े लिखे दुकानदारों को काफी परेशानी होगी। जहां उन पर दो प्रतिशत का वैट लागू किया गया था। अब वह तीन प्रतिशत हो गया है। व्यापार करने के लिए कागजी कार्रवाई अधिक हो गई है। 37 बार रिटर्न भरना मुश्किल है।
5200 ने करवाया रजिस्ट्रेशन
डीईटीसी सेल्स एएस कटारिया ने कहा कि जिले में 7400 में से 5200 व्यापारी रजिस्ट्रेशन करवा चुके हैं। अभी व्यापारी आ ही रहे हैं। उनका रजिस्ट्रेशन किया जा रहा है। शुक्रवार को रजिस्ट्रेशन करवाने की अंतिम तिथि है। सरकार से इसके अलावा कोई आदेश नहीं आए हैं।
प्रदूषण रहित कारें होंगी ज्यादा महंगी
कैथल। सीए एवं एकांश मोटर्स के एमडी सतीश बंसल ने कहा कि अभी जीएसटी को लेकर नियम सामने नहीं आए हैं, जिस कारण असमंजस की स्थिति है। अभी तक जो जानकारी मिली है। उसके अनुसार ऑटोमोबाइल में पेट्रोल की छोटी गाड़ियों पर 28 प्रतिशत जीएसटी और 1 प्रतिशत सरचार्ज लगेगा। जो पहले की बजाए 2 से 3 प्रतिशत महंगा होगा। इसी प्रकार से डीजल की छोटी गाड़ी पर 28 प्रतिशत जीएसटी व 3 प्रतिशत सरचार्ज लगाया जा रहा है। बड़ी गाड़ियों पर 43 प्रतिशत टैक्स है। इसके साथ-साथ प्रदूषण रहित कारों पर ज्यादा टैक्स लगा दिया गया है। यह 27 से बढ़ाकर 43 प्रतिशत कर दिया गया है। जिससे ऐसी गाड़ियां डेढ़ लाख से लेकर 25 लाख रुपये तक महंगी हो जाएंगी। कुछेक राज्यों में 4 प्रतिशत चुंगी है। वहां कारें एक प्रतिशत सस्ती हो जाएंगी। कुछ राज्यों में सीएसटी खत्म हो गया। इससे भी कीमतें कम होने की संभावनाएं हैं। जीएसटी को एक दम से पूरे देश में लागू कर दिया गया है। इसे कुछ स्टेजेज में लागू करना चाहिए था। मसलन 1000 करोड़ तक वालों को एक 1 जुलाई से, 500 करोड़ वालों को कुछ समय बाद, इससे कम वालों के कुछ समय बाद लागू होना चाहिए था। जिससे लोग इसे पूरी तरह से समझ सकते और उन्हें तैयारी करने का समय मिल जाता।
18 प्रतिशत जीएसटी का पड़ेगा
सीए सतीश बंसल कहते हैं कि सर्विस टेक्स 15 प्रतिशत था। लेकिन सरकार ने जीएसटी 18 प्रतिशत कर दिया है। यह कुछ प्वाइंटस में बढ़ता था। एकदम से 3 प्रतिशत बढ़ा दिया गया है। जिससे आम जनता पर बड़ा बोझ पड़ेगा।
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अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। शुक्रवार मध्यरात्रि से लागू होने वाले जीएसटी में टैक्स महंगे व सस्ते की बजाए व्यापारियों में कागजी कार्रवाई का भय ज्यादा है। एक साल में 37 आयकर रिटर्न भरने सहित कागजी कार्रवाई को लेकर मिल रही जानकारियों, आधी अधूरी सूचनाओं व नियमों पर उहापोह की स्थिति से बाजार में असमंजस है। व्यापारी देशहित में जीएसटी का स्वागत तो कर रहे हैं। लेकिन स्थिति स्पष्ट न होने के कारण असमंजस में हैं। अमर उजाला ने विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों से जीएसटी को लेकर बात की तो यही बात सामने आई कि अभी नियमों व पूरे एक्ट के सामने न आने के कारण तस्वीर साफ नहीं हैं। वहीं दो दिनों से होल सेले कपड़ा व्यापारियों की चल रही हड़ताल शुक्रवार को समाप्त हो गई।
इलेक्ट्रॉनिक्स पर नहीं पड़ेगा ज्यादा असर
प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक्स व्यापारी हरीश कालड़ा के अनुसार जीएसटी से टैक्स में ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा। सामान 2 प्रतिशत तक महंगा हो सकता है। यह देशहित में है। इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों के सस्ता होने की बात पर उन्होंने कहा कि जिन व्यापारियों के पास दो से तीन साल पुराना स्टॉक था, उसमें अपने मार्जिन को कम करके किसी तरह निकाला है। इससे ज्यादा कुछ नहीं है।
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व्यापारी देशराज ने कहा कि जीएसटी देशहित में है। इससे पूरा व्यापार एक नंबर में आ जाएगा।
कागजी कार्रवाई से ज्यादा परेशानी
कैथल हार्डवेयर मशीनरी एसोसिएशन के अध्यक्ष सुमेर का कहना है कि टैक्स लगे अच्छी बात है। लेकिन हर दस दिन में रिटर्न भरने के कागजात तैयार करने हैं, ये कैसे होगा? इस बात को लेकर ज्यादा चिंता है। जो बड़े व्यापारी हैं। उनके लिए यह बड़ी परेशानी पैदा होने जा रही है। जीएसटी का सरलीकरण होना चाहिए था।
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खल पर 5 प्रतिशत जीएसटी से परेशानी
खल बिनौला एसोसिएशन के प्रधान शिव नारायण गोयल का कहना है कि बिनौले पर पहले महज 2 प्रतिशत सीएसटी लगता था। हरियाणा में बिनौला या खल पर टैक्स नहीं था। अब 5 प्रतिशत जीएसटी लगा दिया गया है। 37 रिटर्न भरना मुश्किल कार्य है।
कालाबाजारी रुकेगी
कैथल इलेक्ट्रिकल वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान प्रयाग राज बालू ने बताया कि जीएसटी लागू होने से काला बाजारी रुकेगी। सरकार को अधिक टैक्स मिलेगा। लेकिन व्यापारी जीएसटी व्यवस्था के लिए पूरी तरह से तैयार नहीं है। अधिकतर व्यापारी शिक्षित नहीं हैं, जिसके कारण जीएसटी के बारे में पूरी जानकारी नहीं है। पहले तीन महीने तक दिक्कतें रहेगी। इसके बाद सब सामान्य हो जाएगा।
व्यापारी बन जाएगा अकाउंटेंट
मेन बाजार एसोसिएशन के सचिव चंद्रगुप्त गोयल ने बताया कि जीएसटी के लागू होने से व्यापारी अकाउंटेंट बनकर रह जाएगा। छोटे दुकानदारों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि जूतों पर 500 तक टेक्स था। लेकिन जीएसटी लागू होने के बाद 500 रुपये तक 5 प्रतिशत टैक्स व 501 से आगे तक 18 प्रतिशत टैक्स कर दिया है।
सर्राफा व्यापार पर होगा असर
सर्राफा एसोसिएशन कैथल के प्रधान राजिंद्र कुमार ने बताया कि कम पढ़े लिखे दुकानदारों को काफी परेशानी होगी। जहां उन पर दो प्रतिशत का वैट लागू किया गया था। अब वह तीन प्रतिशत हो गया है। व्यापार करने के लिए कागजी कार्रवाई अधिक हो गई है। 37 बार रिटर्न भरना मुश्किल है।
5200 ने करवाया रजिस्ट्रेशन
डीईटीसी सेल्स एएस कटारिया ने कहा कि जिले में 7400 में से 5200 व्यापारी रजिस्ट्रेशन करवा चुके हैं। अभी व्यापारी आ ही रहे हैं। उनका रजिस्ट्रेशन किया जा रहा है। शुक्रवार को रजिस्ट्रेशन करवाने की अंतिम तिथि है। सरकार से इसके अलावा कोई आदेश नहीं आए हैं।
प्रदूषण रहित कारें होंगी ज्यादा महंगी
कैथल। सीए एवं एकांश मोटर्स के एमडी सतीश बंसल ने कहा कि अभी जीएसटी को लेकर नियम सामने नहीं आए हैं, जिस कारण असमंजस की स्थिति है। अभी तक जो जानकारी मिली है। उसके अनुसार ऑटोमोबाइल में पेट्रोल की छोटी गाड़ियों पर 28 प्रतिशत जीएसटी और 1 प्रतिशत सरचार्ज लगेगा। जो पहले की बजाए 2 से 3 प्रतिशत महंगा होगा। इसी प्रकार से डीजल की छोटी गाड़ी पर 28 प्रतिशत जीएसटी व 3 प्रतिशत सरचार्ज लगाया जा रहा है। बड़ी गाड़ियों पर 43 प्रतिशत टैक्स है। इसके साथ-साथ प्रदूषण रहित कारों पर ज्यादा टैक्स लगा दिया गया है। यह 27 से बढ़ाकर 43 प्रतिशत कर दिया गया है। जिससे ऐसी गाड़ियां डेढ़ लाख से लेकर 25 लाख रुपये तक महंगी हो जाएंगी। कुछेक राज्यों में 4 प्रतिशत चुंगी है। वहां कारें एक प्रतिशत सस्ती हो जाएंगी। कुछ राज्यों में सीएसटी खत्म हो गया। इससे भी कीमतें कम होने की संभावनाएं हैं। जीएसटी को एक दम से पूरे देश में लागू कर दिया गया है। इसे कुछ स्टेजेज में लागू करना चाहिए था। मसलन 1000 करोड़ तक वालों को एक 1 जुलाई से, 500 करोड़ वालों को कुछ समय बाद, इससे कम वालों के कुछ समय बाद लागू होना चाहिए था। जिससे लोग इसे पूरी तरह से समझ सकते और उन्हें तैयारी करने का समय मिल जाता।
18 प्रतिशत जीएसटी का पड़ेगा
सीए सतीश बंसल कहते हैं कि सर्विस टेक्स 15 प्रतिशत था। लेकिन सरकार ने जीएसटी 18 प्रतिशत कर दिया है। यह कुछ प्वाइंटस में बढ़ता था। एकदम से 3 प्रतिशत बढ़ा दिया गया है। जिससे आम जनता पर बड़ा बोझ पड़ेगा।