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प्रति एकड़ 2200 रुपये जमीन काश्त पर....कई पंचायतों में 3 से 4 हजार रुपये सालाना
Updated Wed, 21 Jun 2017 12:05 AM IST
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प्रति एकड़ 2200 रुपये जमीन काश्त पर....कई पंचायतों में 3 से 4 हजार रुपये सालाना
नसीब सैनी
कैथल। गुहला-चीका और सीवन ब्लॉक सहित जिले भर में मामूली दरों पर काश्त के लिए ठेके पर छोड़ी जा रही पंचायतों की बोली पर डीसी संजय जून ने रोक लगा दी है। कई गांवों में महज 2 या 3 हजार रुपये सालाना प्रति एकड़ के हिसाब से पिछले साल तक जमीन काश्त पर जमीन दी जा रही है। इस बार मामूली बढ़त के साथ डीसी तक जब ये फाइलें पहुंची तो डीसी का माथा ठनक गया। डीसी ने पूरे जिले की ऐसी पंचायतों की रिपोर्ट मंगवाई और गुहला-चीका व सीवन ब्लॉकों में पंचायती भूमि की बोली पर रोक लगा दी है। इस बार मार्केट रेट के हिसाब से सरकारी दायरे में रहकर जमीनों की बोली होगी।
22 रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से छोड़ी गई है बोली
जिले में कई ऐसी पंचायतें हैं। जहां पिछले साल तक 2200 से लेकर 3 से 4 हजार रुपये तक पंचायती जमीन ठेके पर छोड़ी गई है। कई पंचायतों में तो जमीन भी 100 एकड़ से भी ज्यादा हैं। इतने कम दामों पर कैसे जमीन ठेके पर जा रही है। यह जानकारी मिलने पर डीसी ने ऐसी पंचायतों की जमीन की बोली पर रोक लगा दी है।
पिछले साल रही हैं काफी कम काश्त दरें
जिला विकास एवं पंचायत विभाग से मिली जानकारी के अनुसार पिछले साल कवारतन में 135 एकड़ 6074 रुपये प्रति एकड़, प्रेमपुरा में 6360 रुपये प्रति एकड़ में 137 एकड़, कांगथली में 93 एकड़ 3900 रुपये प्रति एकड़, ककहेड़ी में 398 एकड़ 3560 रुपये के हिसाब से तो लदाना चक्कू की 153 एकड़ 2200 रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से पिछले साल तक ठेके पर दी जा चुकी है। इसके अलावा पपराला, कल्लर माजरा, बलबेहड़ा, थेह नेवल, रिवाड़ जागिर, डंडौता, भूसला, अरनौली, छन्ना जाटान, सींह, मेंगड़ा, खरकड़ा, चानचक, सदरहेड़ी व दुसैरपुर पंचायतों की जमीन के रेट भी पिछले सालों तक काफी कम बताए जा रहे हैं।
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इस बार 4 पंचायतों द्वारा छोड़ दी गई है बोली पर जमीन
इस बार गांव भूना में 3800 रुपये के हिसाब से, गांव डेरा बाजीगर में 3100 रुपये, कमहेड़ी में 4200 रुपये प्रति एकड़ व टटियाणा में 3100 रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से जमीन बोली पर छोड़ी गई है। लेकिन इनमें भी जिस जमीन के लिए पैसे जमा नहीं हुए हैं। उसके पैसे जमा करवाने पर भी रोक लगा दी गई है।
पंचायती भूमि की बोली पर रोक
कम कीमत पर ठेके के लिए छोड़ी जा रही जमीन को देखते हुए डीसी ने सीवन व गुहला ब्लॉक सहित जिले भर में ऐसी पंचायती जमीन को ठेके पर देने पर फिलहाल पूरी तरह से रोक लगा दी है। जिले में मार्केट रेट के हिसाब से जमीन ठेके पर दी जा सकती है। फिलहाल सरकार से इस बारे में मार्गदर्शन भी लिया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार माननीय सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसले में पंचायती जमीन के लिए 8000 रुपये सालाना प्रति एकड़ का रेट न्यूनतम निर्धारित किया हुआ है। इस फैसले पर भी विचार चल रहा है।
40 से 50 हजार रुपये प्रति एकड़ का है रेट
इस समय यदि किसान की जमीन काश्त पर ली जाती है तो समाज में 40 से 50 हजार रुपये प्रति एकड़ सालाना का रेट है। हालांकि पिछले साल यह 50 हजार रुपये से भी ऊपर पहुंच गया था। लेकिन पिछले साल कुछ नुकसान होने के कारण और फसलों की कीमत कम होने के कारण इस बार पानी की सुविधा वाले खेतों की 40 से 50 हजार प्रति एकड़ की दर से ठेका दिया जा रहा है। जबकि बिना पानी वाले भी 25 से 30 हजार प्रति एकड़ के हिसाब से ठेके पर जमीन दी जा रही है।
कई पंचायतें एसी, जहां बोली की महज खानापूर्ति
जिले के गुहला व सीवन ब्लॉक में दूसरा पहलू यह भी है कि कई पंचायतें ऐसी हैं। जहां बोली की महज खानापूर्ती की जाती है। इन गांवों में पंचायती चुनाव ही इस मुद्दे पर होता है कि सरपंच सरकारी जमीन नहीं छुड़वाएगा। इन गांवों में आजादी के बाद दशकों पहले उबड़-खाबड़, जंगलात की जमीन को कृषि योग्य बनाकर कई बुजुर्गों ने अपनी जिंदगी खपा दी थी। अब उनके परिवार लगातार उन जमीनों पर काश्त करते आ रहे हैं। हर साल सहमति के तौर पर उन्हीं के नाम पर पट्टा छोड़ दिया जाता है। लगातार पट्टेदार चले आ रहे किसानों के लिए पूर्व कांग्रेस सरकार ने 99 साल का पट्टा नाम करने की योजना चलाई थी। लेकिन अभी तक यह सिरे नहीं चढ़ पाई है। लेकिन प्रशासनिक दृष्टि से प्रति एकड़ 8000 रुपये की दर भी ज्यादा बड़ी राशि नहीं है।
जमीन ठेके पर लेकर काश्त करने का मार्केट रेट काफी ज्यादा है। कई पंचायतों में महज खानापूर्ती हो रही है। इसलिए इस बार मार्केट रेट के हिसाब से ही बोली पर जमीन छोड़ी जाएगी। ताकि पंचायतों की आमदनी बढ़े और गांव का विकास हो सके।
संजय जून, डीसी, कैथल।
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नसीब सैनी
कैथल। गुहला-चीका और सीवन ब्लॉक सहित जिले भर में मामूली दरों पर काश्त के लिए ठेके पर छोड़ी जा रही पंचायतों की बोली पर डीसी संजय जून ने रोक लगा दी है। कई गांवों में महज 2 या 3 हजार रुपये सालाना प्रति एकड़ के हिसाब से पिछले साल तक जमीन काश्त पर जमीन दी जा रही है। इस बार मामूली बढ़त के साथ डीसी तक जब ये फाइलें पहुंची तो डीसी का माथा ठनक गया। डीसी ने पूरे जिले की ऐसी पंचायतों की रिपोर्ट मंगवाई और गुहला-चीका व सीवन ब्लॉकों में पंचायती भूमि की बोली पर रोक लगा दी है। इस बार मार्केट रेट के हिसाब से सरकारी दायरे में रहकर जमीनों की बोली होगी।
22 रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से छोड़ी गई है बोली
जिले में कई ऐसी पंचायतें हैं। जहां पिछले साल तक 2200 से लेकर 3 से 4 हजार रुपये तक पंचायती जमीन ठेके पर छोड़ी गई है। कई पंचायतों में तो जमीन भी 100 एकड़ से भी ज्यादा हैं। इतने कम दामों पर कैसे जमीन ठेके पर जा रही है। यह जानकारी मिलने पर डीसी ने ऐसी पंचायतों की जमीन की बोली पर रोक लगा दी है।
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पिछले साल रही हैं काफी कम काश्त दरें
जिला विकास एवं पंचायत विभाग से मिली जानकारी के अनुसार पिछले साल कवारतन में 135 एकड़ 6074 रुपये प्रति एकड़, प्रेमपुरा में 6360 रुपये प्रति एकड़ में 137 एकड़, कांगथली में 93 एकड़ 3900 रुपये प्रति एकड़, ककहेड़ी में 398 एकड़ 3560 रुपये के हिसाब से तो लदाना चक्कू की 153 एकड़ 2200 रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से पिछले साल तक ठेके पर दी जा चुकी है। इसके अलावा पपराला, कल्लर माजरा, बलबेहड़ा, थेह नेवल, रिवाड़ जागिर, डंडौता, भूसला, अरनौली, छन्ना जाटान, सींह, मेंगड़ा, खरकड़ा, चानचक, सदरहेड़ी व दुसैरपुर पंचायतों की जमीन के रेट भी पिछले सालों तक काफी कम बताए जा रहे हैं।
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इस बार 4 पंचायतों द्वारा छोड़ दी गई है बोली पर जमीन
इस बार गांव भूना में 3800 रुपये के हिसाब से, गांव डेरा बाजीगर में 3100 रुपये, कमहेड़ी में 4200 रुपये प्रति एकड़ व टटियाणा में 3100 रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से जमीन बोली पर छोड़ी गई है। लेकिन इनमें भी जिस जमीन के लिए पैसे जमा नहीं हुए हैं। उसके पैसे जमा करवाने पर भी रोक लगा दी गई है।
पंचायती भूमि की बोली पर रोक
कम कीमत पर ठेके के लिए छोड़ी जा रही जमीन को देखते हुए डीसी ने सीवन व गुहला ब्लॉक सहित जिले भर में ऐसी पंचायती जमीन को ठेके पर देने पर फिलहाल पूरी तरह से रोक लगा दी है। जिले में मार्केट रेट के हिसाब से जमीन ठेके पर दी जा सकती है। फिलहाल सरकार से इस बारे में मार्गदर्शन भी लिया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार माननीय सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसले में पंचायती जमीन के लिए 8000 रुपये सालाना प्रति एकड़ का रेट न्यूनतम निर्धारित किया हुआ है। इस फैसले पर भी विचार चल रहा है।
40 से 50 हजार रुपये प्रति एकड़ का है रेट
इस समय यदि किसान की जमीन काश्त पर ली जाती है तो समाज में 40 से 50 हजार रुपये प्रति एकड़ सालाना का रेट है। हालांकि पिछले साल यह 50 हजार रुपये से भी ऊपर पहुंच गया था। लेकिन पिछले साल कुछ नुकसान होने के कारण और फसलों की कीमत कम होने के कारण इस बार पानी की सुविधा वाले खेतों की 40 से 50 हजार प्रति एकड़ की दर से ठेका दिया जा रहा है। जबकि बिना पानी वाले भी 25 से 30 हजार प्रति एकड़ के हिसाब से ठेके पर जमीन दी जा रही है।
कई पंचायतें एसी, जहां बोली की महज खानापूर्ति
जिले के गुहला व सीवन ब्लॉक में दूसरा पहलू यह भी है कि कई पंचायतें ऐसी हैं। जहां बोली की महज खानापूर्ती की जाती है। इन गांवों में पंचायती चुनाव ही इस मुद्दे पर होता है कि सरपंच सरकारी जमीन नहीं छुड़वाएगा। इन गांवों में आजादी के बाद दशकों पहले उबड़-खाबड़, जंगलात की जमीन को कृषि योग्य बनाकर कई बुजुर्गों ने अपनी जिंदगी खपा दी थी। अब उनके परिवार लगातार उन जमीनों पर काश्त करते आ रहे हैं। हर साल सहमति के तौर पर उन्हीं के नाम पर पट्टा छोड़ दिया जाता है। लगातार पट्टेदार चले आ रहे किसानों के लिए पूर्व कांग्रेस सरकार ने 99 साल का पट्टा नाम करने की योजना चलाई थी। लेकिन अभी तक यह सिरे नहीं चढ़ पाई है। लेकिन प्रशासनिक दृष्टि से प्रति एकड़ 8000 रुपये की दर भी ज्यादा बड़ी राशि नहीं है।
जमीन ठेके पर लेकर काश्त करने का मार्केट रेट काफी ज्यादा है। कई पंचायतों में महज खानापूर्ती हो रही है। इसलिए इस बार मार्केट रेट के हिसाब से ही बोली पर जमीन छोड़ी जाएगी। ताकि पंचायतों की आमदनी बढ़े और गांव का विकास हो सके।
संजय जून, डीसी, कैथल।