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गेहूं की फसल के लिए वरदान साबित होगी यह बारिश, बंपर होगा उत्पादन
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गेहूं की फसल के लिए वरदान साबित होगी यह बारिश, बंपर होगा उत्पादन
पूरे प्रदेश में बरसे बदरा...प्रति एकड़ किसानों की 1 हजार रुपये की बचत
पूरे प्रदेश में करोड़ों रुपये बचेंगे किसानों के
हरियाणा में करीब 25.80 लाख हेक्टेयर में गेहूं का उत्पादन
अन्य फसलों में भी इस बार बारिश से बचत
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। सिंचाई की जरूरत के समय हुई बारिश से पूरे प्रदेश में गेहूं की फसल में प्रति एकड़ करीब एक हजार रुपये की किसानों की लागत पर बचत होगी। गेहूं के इस सीजन में तीन बार बारिश हुई है। जिसमें तीनों ही समय सिंचाई का समय था।
मौसम विभाग द्वारा जारी की गई एडवाइजरी के बाद किसानों को समय पर बारिश की सूचना मिल जाती है। जिस कारण वे सिंचाई करने से बचते हैं और इस बार भी काफी किसानों ने मौसम विभाग की एडवाइजरी का पालन किया और सिंचाई नहीं की। वीरवार को हुई बारिश से ही खेतों की सिंचाई हो गई। किसानों का कहना है कि यदि अगले दस दिन तक भी सिंचाई न की जाए तो फसल में कोई परेशानी नहीं होगी। किसान गांव भानपुरा निवासी विक्रम सिंह ने बताया कि यह बारिश किसी वरदान से कम नहीं हैं। इससे फसल को उसके विकास के लिए आवश्यक तापमान मिलेगा। पिछले कई सालों में फरवरी माह में तापमान बढ़ जाता है। लेकिन इस बार बारिश के चलते तापमान में वृद्धि की कम ही संभावनाएं हैं। गेहूं की बंपर फसल के लिए फरवरी के अंत तक ठंड रहना जरूरी है। ताकि फसल को विकास के लिए आवश्यक तापमान मिल सके। कुछेक जगह ओले जरूर गिरे हैं। जिससे नुकसान हो सकता है। अन्यथा बारिश से फसल को कोई नुकसान नहीं हैं।
किसानों की प्रति एकड़ करीब एक हजार की बचत : किसान पंकज कुमार ने बताया कि जिस फसल में सिंचाई डीजल इंजन के माध्यम से होती है, उसमें एक एकड़ पर करीब एक हजार रुपये खर्च होते हैं। इस बारिश से यह पूरी की पूरी बचत हुई है। इसके अलावा जो किसान बिजली से ट्यूबवेल व सबमर्सीबल पंप चलाते हैं, उनकी भू-जल की बचत हुई है। यदि जरूरत से ज्यादा बारिश नहीं होती है तो इस बारिश का कोई नुकसान नहीं है।
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कृषि उप-निदेशक डॉ. पवन शर्मा ने कहा कि जिले में ओले गिरने की जानकारी तो मिली है। लेकिन ये इतने ज्यादा नहीं थे कि नुकसान हो। इसके अलावा गेहूं सहित सब्जियों की फसल में भी इस बारिश का लाभ है।
मौसम विशेषज्ञ डॉ. चंद्रशेखर डागर ने बताया कि सात व आठ फरवरी को पूरे प्रदेश में बारिश व कहीं-कहीं ओलावृष्टि की संभावनाएं हैं। यदि वीरवार को ज्यादा बारिश हो जाती है तो शुक्रवार को उससे कम बारिश रहेगी। अभी तक फसल में नुकसान की संभावनाएं नहीं हैं। इस बार जो स्थिति अभी तक मौसम की रही है, वह गेहूं की फसल के लिए अभी तक अनुकूल है और इससे पिछले साल से ज्यादा उत्पादन होने का अनुमान है।
प्रदेश में फसल के क्षेत्र का ब्योरा :
पूरे प्रदेश में करीब 25.80 लाख हेक्टेयर में गेहूं की बीजाई की गई है।
सरसों -6.1 लाख हेक्टेयर
चना-1 लाख हेक्टेयर
गन्ना-1.15 लाख हेक्टेयर
दालें-10000 हेक्टेयर
जौ-44000 हेक्टेयर
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पूरे प्रदेश में बरसे बदरा...प्रति एकड़ किसानों की 1 हजार रुपये की बचत
पूरे प्रदेश में करोड़ों रुपये बचेंगे किसानों के
हरियाणा में करीब 25.80 लाख हेक्टेयर में गेहूं का उत्पादन
अन्य फसलों में भी इस बार बारिश से बचत
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। सिंचाई की जरूरत के समय हुई बारिश से पूरे प्रदेश में गेहूं की फसल में प्रति एकड़ करीब एक हजार रुपये की किसानों की लागत पर बचत होगी। गेहूं के इस सीजन में तीन बार बारिश हुई है। जिसमें तीनों ही समय सिंचाई का समय था।
मौसम विभाग द्वारा जारी की गई एडवाइजरी के बाद किसानों को समय पर बारिश की सूचना मिल जाती है। जिस कारण वे सिंचाई करने से बचते हैं और इस बार भी काफी किसानों ने मौसम विभाग की एडवाइजरी का पालन किया और सिंचाई नहीं की। वीरवार को हुई बारिश से ही खेतों की सिंचाई हो गई। किसानों का कहना है कि यदि अगले दस दिन तक भी सिंचाई न की जाए तो फसल में कोई परेशानी नहीं होगी। किसान गांव भानपुरा निवासी विक्रम सिंह ने बताया कि यह बारिश किसी वरदान से कम नहीं हैं। इससे फसल को उसके विकास के लिए आवश्यक तापमान मिलेगा। पिछले कई सालों में फरवरी माह में तापमान बढ़ जाता है। लेकिन इस बार बारिश के चलते तापमान में वृद्धि की कम ही संभावनाएं हैं। गेहूं की बंपर फसल के लिए फरवरी के अंत तक ठंड रहना जरूरी है। ताकि फसल को विकास के लिए आवश्यक तापमान मिल सके। कुछेक जगह ओले जरूर गिरे हैं। जिससे नुकसान हो सकता है। अन्यथा बारिश से फसल को कोई नुकसान नहीं हैं।
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किसानों की प्रति एकड़ करीब एक हजार की बचत : किसान पंकज कुमार ने बताया कि जिस फसल में सिंचाई डीजल इंजन के माध्यम से होती है, उसमें एक एकड़ पर करीब एक हजार रुपये खर्च होते हैं। इस बारिश से यह पूरी की पूरी बचत हुई है। इसके अलावा जो किसान बिजली से ट्यूबवेल व सबमर्सीबल पंप चलाते हैं, उनकी भू-जल की बचत हुई है। यदि जरूरत से ज्यादा बारिश नहीं होती है तो इस बारिश का कोई नुकसान नहीं है।
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कृषि उप-निदेशक डॉ. पवन शर्मा ने कहा कि जिले में ओले गिरने की जानकारी तो मिली है। लेकिन ये इतने ज्यादा नहीं थे कि नुकसान हो। इसके अलावा गेहूं सहित सब्जियों की फसल में भी इस बारिश का लाभ है।
मौसम विशेषज्ञ डॉ. चंद्रशेखर डागर ने बताया कि सात व आठ फरवरी को पूरे प्रदेश में बारिश व कहीं-कहीं ओलावृष्टि की संभावनाएं हैं। यदि वीरवार को ज्यादा बारिश हो जाती है तो शुक्रवार को उससे कम बारिश रहेगी। अभी तक फसल में नुकसान की संभावनाएं नहीं हैं। इस बार जो स्थिति अभी तक मौसम की रही है, वह गेहूं की फसल के लिए अभी तक अनुकूल है और इससे पिछले साल से ज्यादा उत्पादन होने का अनुमान है।
प्रदेश में फसल के क्षेत्र का ब्योरा :
पूरे प्रदेश में करीब 25.80 लाख हेक्टेयर में गेहूं की बीजाई की गई है।
सरसों -6.1 लाख हेक्टेयर
चना-1 लाख हेक्टेयर
गन्ना-1.15 लाख हेक्टेयर
दालें-10000 हेक्टेयर
जौ-44000 हेक्टेयर