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एसडीएम गुहला कार्यालय में कार्यरत क्लर्क को बर्खाश्त किया
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एसडीएम गुहला कार्यालय में कार्यरत क्लर्क को बर्खास्त
- न्यायालय द्वारा रिश्वत लेने के मामले में दोषी करार दिए जाने के बाद डीसी ने जारी किए आदेश
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। डीसी धर्मबीर सिंह ने एसडीएम कार्यालय गुहला के क्लर्क मानक राम को रिश्वत के मामले में दोषी करार दिए जाने के बाद बर्खास्त कर दिया है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 311 के उप अनुच्छेद (2) के प्रावधान व हरियाणा सिविल सेवाएं नियम 2016 के नियम 7 के उपनियम के तहत यह आदेश जारी किया है।
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुदीप गोयल की अदालत ने लिपिक/अहलमद मानक राम को एक दिसंबर 2018 को भ्रष्टाचार उन्मूलन अधिनियम 1988 की धारा 7 के तहत रिश्वत लेने का दोषी करार देते हुए तीन वर्ष कठोर कारावास व 5 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में उन्हेें अतिरिक्त 6 माह कठोर कारावास की सजा भी सुनाई गई थी। इसके अतिरिक्त इसी अधिनियम की धारा 13 (1) के तहत 4 वर्ष कठोर कारावास और 5 हजार रुपये की सजा सुनाई गई। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में अतिरिक्त 6 माह की कठोर कारावास की सजा सुनाई गई थी। यह दोनों सजाएं समानांतर चलेंगी।
मानक राम को 24 नवंबर 2017 को राज्य विजिलेंस ब्यूरो की टीम ने 400 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा था। इसके बाद गुहला पुलिस थाना में उनके खिलाफ भ्रष्टाचार उन्मूलन अधिनियम 1988 की धारा 7 व 13 के तहत 24 नवंबर 2017 को एफआईआर दर्ज की गई थी। जिसमें दोषी करार दिए जाने के बाद अब हरियाणा सरकार के कानून एवं विधायी विभाग द्वारा अनुशासनात्मक कार्रवाई संबंधित मामलों के पालन में धारा 14 के तहत जारी हिदायतों के अनुसार डीसी ने उक्त दोषी क्लर्क की सेवाएं 1 दिसंबर 2018 से बर्खास्त कर दी हैं।
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- न्यायालय द्वारा रिश्वत लेने के मामले में दोषी करार दिए जाने के बाद डीसी ने जारी किए आदेश
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। डीसी धर्मबीर सिंह ने एसडीएम कार्यालय गुहला के क्लर्क मानक राम को रिश्वत के मामले में दोषी करार दिए जाने के बाद बर्खास्त कर दिया है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 311 के उप अनुच्छेद (2) के प्रावधान व हरियाणा सिविल सेवाएं नियम 2016 के नियम 7 के उपनियम के तहत यह आदेश जारी किया है।
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुदीप गोयल की अदालत ने लिपिक/अहलमद मानक राम को एक दिसंबर 2018 को भ्रष्टाचार उन्मूलन अधिनियम 1988 की धारा 7 के तहत रिश्वत लेने का दोषी करार देते हुए तीन वर्ष कठोर कारावास व 5 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में उन्हेें अतिरिक्त 6 माह कठोर कारावास की सजा भी सुनाई गई थी। इसके अतिरिक्त इसी अधिनियम की धारा 13 (1) के तहत 4 वर्ष कठोर कारावास और 5 हजार रुपये की सजा सुनाई गई। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में अतिरिक्त 6 माह की कठोर कारावास की सजा सुनाई गई थी। यह दोनों सजाएं समानांतर चलेंगी।
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मानक राम को 24 नवंबर 2017 को राज्य विजिलेंस ब्यूरो की टीम ने 400 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा था। इसके बाद गुहला पुलिस थाना में उनके खिलाफ भ्रष्टाचार उन्मूलन अधिनियम 1988 की धारा 7 व 13 के तहत 24 नवंबर 2017 को एफआईआर दर्ज की गई थी। जिसमें दोषी करार दिए जाने के बाद अब हरियाणा सरकार के कानून एवं विधायी विभाग द्वारा अनुशासनात्मक कार्रवाई संबंधित मामलों के पालन में धारा 14 के तहत जारी हिदायतों के अनुसार डीसी ने उक्त दोषी क्लर्क की सेवाएं 1 दिसंबर 2018 से बर्खास्त कर दी हैं।
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