{"_id":"5bf3073ebdec2269960bc791","slug":"191542653758-kaithal-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"धन खरीददारों व आढ़तियों के बीच ब्याज की दर को लेकर विवाद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
धन खरीददारों व आढ़तियों के बीच ब्याज की दर को लेकर विवाद
Updated Tue, 20 Nov 2018 12:32 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
धान खरीदारों व आढ़तियों के बीच ब्याज की दर को लेकर ठनी
अनाज मंडी में धान की खरीद बंद, किसानों का किया आह्वान, हड़ताल जारी रहने तक न लेकर आएं मंडी में धान
खरीदारों द्वारा भुगतान में देरी से दिए जाने वाले ब्याज की दर कम करने को लेकर है आढ़तियों में रोष
फोटो संख्या-8 व 9
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। मंडी से धान खरीद करने वाले राइस मिलर्स व पक्का आढ़ती के बीच खरीद के बाद भुगतान में देरी होने पर दी जाने वाली ब्याज की दर को लेकर ठन गई है। आढ़तियों ने इस ब्याज दर को कम करने के विरोध में सोमवार को मंडी में धान की खरीद का काम बंद रखा। जिस कारण से किसानों की धान न बिकने के कारण किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
हड़ताल को लेकर मंडी स्थित लक्ष्मी नारायण मंदिर में दोनों मंडियों की फूड ग्रेन डीलर एसोसिएशन की एक बैठक हुई, जिसमें मंडी प्रधान कृष्ण मित्तल ने आढ़तियों को ब्याज दर की स्थिति से अवगत करवाया। इस पर आढ़तियों ने बैठक में कहा कि आढ़ती तो ब्याज मांगते ही नहीं। जैसे ही धान खरीदा जाता है, उसका भुगतान कर दिया जाए। इसके बावजूद उनको पहले ही कम ब्याज पर चार महीने तक दर की हुई है। यदि ब्याज ज्यादा दिखाई देता है तो वे मंडी के आढ़तियों को उनकी राशि दे दें। वैसे भी कुल मिलाकर कई दर्जन खरीदारों में मात्र चार पांच ही खरीददार देरी से ब्याज देते हैं और उनको ब्याज देना पड़ता है। यदि वे सब एकत्र होकर ब्याज घटवाना चाहते हैं तो वे उनके पैसे के जिम्मेवार भी बने। जो खरीदार चार महीने में पैसे नहीं दे सकते, उनकी ओर पैसे मरने का खतरा बन जाता है। कुछ लोग जिन्होंने पिछले साल के पैसे देने हैं, वे अब भी मंडी से धान की फसल खरीद कर रहे हैं। उनकी खरीद बंद होनी चाहिए और पिछले पैसे देने के बाद ही आगे फसल खरीद करनी चाहिए। ब्याज दर घटवाने वाले पहले उनके पैसे दें फिर आगे ब्याज दर कम करने बारे में विचार करें। उन्होंने बताया कि इस समय मंडी से खरीद की गई फसल की अदायगी देरी से करने पर 50 दिन तक दस दिन की छूट व ब्याज दर 1.5 प्रतिशत तथा उसके बाद छूट समाप्त ब्याज दर 1.5 प्रतिशत और 120 दिनों के बाद ब्याज दर शुरू से 1.65 प्रतिशत की दर से लगता है। लेकिन अब कई मिलर्स दोनों अवधियों में घटाकर 1.20 व 1.50 करने की मांग कर रहे हैं। मंडी के आढ़तियों ने उनकी इस मांग को ठुकरा दिया और कहा कि बेशक हड़ताल अनिश्चितकालीन कर लें, परंतु ब्याज दर पहले की तरह रहेगी। बैठक पुरानी मंडी प्रधान जोग ध्यान गोयल, श्याम लाल नोच, समाज सेवी लाजपत सिंगला, श्रवण क्योंडक, बिरभान, जय किशन मान, धनी राम, सतवीर, ईश्वर जैन, पवन बंसल, राजेश भी उपस्थित थे।
वहीं इस संबंध में मिलर्स एसोसिएशन के प्रधान देवी दयाल गर्ग ने कहा कि जो भी बात सामने आई है, उसका मिल बैठकर समाधान कर लिया जाएगा। कोई विवाद नहीं हैं। आढ़तियों व मिलर्स के बीच आपसी तालमेल है और यह बना रहेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
अनाज मंडी में धान की खरीद बंद, किसानों का किया आह्वान, हड़ताल जारी रहने तक न लेकर आएं मंडी में धान
खरीदारों द्वारा भुगतान में देरी से दिए जाने वाले ब्याज की दर कम करने को लेकर है आढ़तियों में रोष
फोटो संख्या-8 व 9
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। मंडी से धान खरीद करने वाले राइस मिलर्स व पक्का आढ़ती के बीच खरीद के बाद भुगतान में देरी होने पर दी जाने वाली ब्याज की दर को लेकर ठन गई है। आढ़तियों ने इस ब्याज दर को कम करने के विरोध में सोमवार को मंडी में धान की खरीद का काम बंद रखा। जिस कारण से किसानों की धान न बिकने के कारण किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
हड़ताल को लेकर मंडी स्थित लक्ष्मी नारायण मंदिर में दोनों मंडियों की फूड ग्रेन डीलर एसोसिएशन की एक बैठक हुई, जिसमें मंडी प्रधान कृष्ण मित्तल ने आढ़तियों को ब्याज दर की स्थिति से अवगत करवाया। इस पर आढ़तियों ने बैठक में कहा कि आढ़ती तो ब्याज मांगते ही नहीं। जैसे ही धान खरीदा जाता है, उसका भुगतान कर दिया जाए। इसके बावजूद उनको पहले ही कम ब्याज पर चार महीने तक दर की हुई है। यदि ब्याज ज्यादा दिखाई देता है तो वे मंडी के आढ़तियों को उनकी राशि दे दें। वैसे भी कुल मिलाकर कई दर्जन खरीदारों में मात्र चार पांच ही खरीददार देरी से ब्याज देते हैं और उनको ब्याज देना पड़ता है। यदि वे सब एकत्र होकर ब्याज घटवाना चाहते हैं तो वे उनके पैसे के जिम्मेवार भी बने। जो खरीदार चार महीने में पैसे नहीं दे सकते, उनकी ओर पैसे मरने का खतरा बन जाता है। कुछ लोग जिन्होंने पिछले साल के पैसे देने हैं, वे अब भी मंडी से धान की फसल खरीद कर रहे हैं। उनकी खरीद बंद होनी चाहिए और पिछले पैसे देने के बाद ही आगे फसल खरीद करनी चाहिए। ब्याज दर घटवाने वाले पहले उनके पैसे दें फिर आगे ब्याज दर कम करने बारे में विचार करें। उन्होंने बताया कि इस समय मंडी से खरीद की गई फसल की अदायगी देरी से करने पर 50 दिन तक दस दिन की छूट व ब्याज दर 1.5 प्रतिशत तथा उसके बाद छूट समाप्त ब्याज दर 1.5 प्रतिशत और 120 दिनों के बाद ब्याज दर शुरू से 1.65 प्रतिशत की दर से लगता है। लेकिन अब कई मिलर्स दोनों अवधियों में घटाकर 1.20 व 1.50 करने की मांग कर रहे हैं। मंडी के आढ़तियों ने उनकी इस मांग को ठुकरा दिया और कहा कि बेशक हड़ताल अनिश्चितकालीन कर लें, परंतु ब्याज दर पहले की तरह रहेगी। बैठक पुरानी मंडी प्रधान जोग ध्यान गोयल, श्याम लाल नोच, समाज सेवी लाजपत सिंगला, श्रवण क्योंडक, बिरभान, जय किशन मान, धनी राम, सतवीर, ईश्वर जैन, पवन बंसल, राजेश भी उपस्थित थे।
विज्ञापन
वहीं इस संबंध में मिलर्स एसोसिएशन के प्रधान देवी दयाल गर्ग ने कहा कि जो भी बात सामने आई है, उसका मिल बैठकर समाधान कर लिया जाएगा। कोई विवाद नहीं हैं। आढ़तियों व मिलर्स के बीच आपसी तालमेल है और यह बना रहेगा।
विज्ञापन