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कलेक्टर रेट अधिक होने से सरकार के प्रति लोगों में बढ़ा रोष
Updated Tue, 08 Aug 2017 11:52 PM IST
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कलेक्टर रेट अधिक होने से सरकार के प्रति लोगों में रोष
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। प्लाटों के मार्केट रेट कम व कलेक्टर रेट अधिक होने के कारण सरकार के प्रति लोगों में काफी रोष है। हुड्डा निवासी अशोक, सुधीर, नरेश, सतीश, पवन, रोशनलाल, रामदिया ने बताया कि हुड्डा में जिस प्लाट का रेट 22 लाख रुपये का है उसकी रजिस्ट्री 45 से 50 लाख रुपये की करवानी पड़ती है। हुड्डा में इस समय जो मार्केट रेट चल रहे हैं वे 9 से 11 हजार रुपये प्रति गज के रेट हैं, जबकि अगर कोई हुड्डा का प्लाट लेता है तो उसे रजिस्ट्री फीस कलेक्टर रेट 19 हजार रुपये प्रति गज के हिसाब से भरनी पड़ती है जो सीधा-सीधा प्लाट धारकों का नुकसान है।
पिछले 4 वर्षों से जमीन के भाव काफी गिरे हैं। जिस कारण सरकार को भी कलेक्टर रेटों में कटौती करनी चाहिए। प्लाट लेने के इच्छुक लोगों को प्लाट लेने से ज्यादा रजिस्ट्री फीस की चिंता होती है, जिस बारे में स्थानीय कई संगठनों के प्रतिनिधि प्रशासनिक अधिकारियों से मिलकर अवगत करवा चुके हैं और अब भी उन्होंने सरकार से मांग कि है कि मार्केट रेट के अनुसार ही कलेक्टर रेट निर्धारित किए जाएं।
प्रदेश व्यापार सेल जिला उपप्रधान हरीश लाल ने बताया कि कलेक्टर रेट में वादे के अनुसार कमी न करने के कारण आम आदमी परेशान है। सरकार जब मार्केट रेट के अनुसार कलेक्टर रेट निर्धारित करती है तो अब जब प्लाटों के भाव पहले से आधे रह गए हैं तो ऐसे में सरकार रजिस्ट्री रेट भी कम करे।
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अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। प्लाटों के मार्केट रेट कम व कलेक्टर रेट अधिक होने के कारण सरकार के प्रति लोगों में काफी रोष है। हुड्डा निवासी अशोक, सुधीर, नरेश, सतीश, पवन, रोशनलाल, रामदिया ने बताया कि हुड्डा में जिस प्लाट का रेट 22 लाख रुपये का है उसकी रजिस्ट्री 45 से 50 लाख रुपये की करवानी पड़ती है। हुड्डा में इस समय जो मार्केट रेट चल रहे हैं वे 9 से 11 हजार रुपये प्रति गज के रेट हैं, जबकि अगर कोई हुड्डा का प्लाट लेता है तो उसे रजिस्ट्री फीस कलेक्टर रेट 19 हजार रुपये प्रति गज के हिसाब से भरनी पड़ती है जो सीधा-सीधा प्लाट धारकों का नुकसान है।
पिछले 4 वर्षों से जमीन के भाव काफी गिरे हैं। जिस कारण सरकार को भी कलेक्टर रेटों में कटौती करनी चाहिए। प्लाट लेने के इच्छुक लोगों को प्लाट लेने से ज्यादा रजिस्ट्री फीस की चिंता होती है, जिस बारे में स्थानीय कई संगठनों के प्रतिनिधि प्रशासनिक अधिकारियों से मिलकर अवगत करवा चुके हैं और अब भी उन्होंने सरकार से मांग कि है कि मार्केट रेट के अनुसार ही कलेक्टर रेट निर्धारित किए जाएं।
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प्रदेश व्यापार सेल जिला उपप्रधान हरीश लाल ने बताया कि कलेक्टर रेट में वादे के अनुसार कमी न करने के कारण आम आदमी परेशान है। सरकार जब मार्केट रेट के अनुसार कलेक्टर रेट निर्धारित करती है तो अब जब प्लाटों के भाव पहले से आधे रह गए हैं तो ऐसे में सरकार रजिस्ट्री रेट भी कम करे।
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