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252 हेक्टेयर अधिग्रहित जमीन पर नहीं मिलेगा किसानों को रॉयल्टी का पैसा
Updated Wed, 12 Dec 2018 12:32 AM IST
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230 हेक्टेयर अधिग्रहित जमीन पर नहीं मिलेगा किसानों को रॉयल्टी का पैसा
केंद्र सरकार ने एनएचआई एक्ट के तहत अधिग्रहण किया है जमीन का
जिले के 16 गांवों के किसानों के लिए सुनवाई जनसुनवाई का आयोजन
पर्यावरण संबंधी चिंताओं को लेकर की गई किसानों के साथ चर्चा
किसानों ने रास्ते के कारण प्रभावित होने वाले अपने खेतों के रास्तों, बिजली कनेक्शन सहित फसलों व प्रति एकड़ मिलने वाले मुआवजे की दर के बारे में किए सवाल
प्रोजेक्ट डायरेक्टर ने कहा-शीघ्र फाइनल किया जाएगा जमीनों का रेट
डीसी ने कहा- रास्तों के लिए लिखित में शिकायत दें किसान, एनएचएआई को भेज दिया जाएगा
कई किसानों ने कहा-नहीं हुई उनकी सुनवाई
फोटो संख्या-3 व 4
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। कुरुक्षेत्र से नारनौल तक बनाए जाने वाले नेशनल हाईवे-152 के लिए जिले में अधिग्रहण की गई 35 किलोमीटर लंबाई के लिए 252 हेक्टेयर भूमि के लिए रॉयल्टी नहीं मिलेगी। साथ ही बिजली कनेक्शन यदि इस मार्ग के बीच में आते हैं, उन्हें स्थानांतरित करने के लिए जिला प्रशासन से आग्रह करना पड़ेगा और रास्तों के लिए किसान एनएचएआई व डीआरओ कार्यालय में प्रार्थना पत्र दे सकते हैं। यह जानकारी एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर व अन्य अधिकारियों ने किसानों को दी। अधिकारी मंगलवार को लघु सचिवालय में आयोजित जिला मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में पर्यावरण स्वीकृति के लिए जनसुनवाई में दी। जनसुनवाई हालांकि पर्यावरण के संबंध में थीं, लेकिन किसानों ने इस सुनवाई में अपने रास्तों, बिजली के कनेक्शनों, रॉयल्टी व मुआवजे की राशि के संबंध में सवाल किए। अधिग्रहित होने वाली करीब 252 हेक्टेयर जमीन के लिए अभी मुआवजा राशि का निर्धारण नहीं हुआ है। लेकिन अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि शीघ्र ही जमीन की मुआवजा राशि की दर तय कर दी जाएगी।
क्या है प्रोजेक्ट : सरकार द्वारा 5100 करोड़ रुपये की लागत से कुरुक्षेत्र से नारनौल तक एनएच 152 बनाया जा रहा है। जिसके लिए जिले के गांव सलेमपुर, पबनावा, चंदलाना, कौल, संरौली, खेड़ी मटरवा, डुलियाणी, मोहना, जांबा, पंडरी, थेह बनहेड़ा, बरसाना, हजवाना, करोड़ा व मंडवाल की लगभग 252 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया गया है। कैथल जिले से इस मुख्य मार्ग का 35 किलोमीटर हिस्सा गुजरेगा। इसके लिए मंगलवार को पर्यावरण के संबंध में जनसुनवाई का आयोजन किया गया।
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जनसुनवाई में प्रोजेक्ट मैनेजर केएम शर्मा, डीसी धर्मवीर सिंह, पर्यावरण सलाहकार ऋषभ सहगल, प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड से रिजनल ऑफिसर विनय गौतम सहित अन्य अधिकारियों ने जनसुनवाई शुरू की।
किसानों ने उठाए रास्तों, बिजली कनेक्शन व मुआवजा राशि सहित रॉयल्टी के मुद्दे : गांव मोहना निवासी धर्मबीर ने कहा कि जमीन मुआवजा की राशि कितनी मिलेगी। तो उन्हें बताया गया कि डीआरओ द्वारा एनएचएआई एक्ट 1956 के तहत यह जमीन का अधिग्रहण हो रहा है। मौजूदा कलेक्टर रेट का यह करीब-करीब ढाई गुणा हो जाता है। शीघ्र ही डीआरओ आवश्यक फार्मूले के माध्यम से मुआवजा राशि की घोषणा कर देंगे।
गांव चंदलाना निवासी अमरीक सिंह, बरसाना के रणबीर सिंह, ट्योंठा निवासी जसबीर सिंह, बलवंत करोड़ा, रणधीर करोड़ा ने कहा कि इस मार्ग के कारण उनके खेतों, घरों व दूसरी जगह जाने वाले कई तरह के रास्ते बंद हो गए हैं या हाईवे में इन रास्तों की जमीन चली गई है। इनका क्या होगा? इस पर प्रोजेक्ट डायरेक्टर ने कहा कि जहां आवश्यक हुआ है, वहां अंडर ब्रिज बनाए गए हैं। डीसी ने भी एनएचएआई अधिकारियों से कहा कि जो रास्ते राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में हैं, उनके लिए प्रावधान करें। बाद में किसानों को कहा गया कि रास्तों के लिए किसान लिखित में डीआरओ कार्यालय या एनएचएआई को आवेदन करें। उन पर विचार किया जाएगा।
शीघ्र हो मुआवजा राशि का फैसला : किसान संघ की ओर से गुलतान सिंह नैन ने कहा कि पूर्व में किसानों के साथ मुआवजा राशि को लेकर भेदभाव होता आया है। अधिकारी इस मामले में ऐसा न करें, एक समान मुआवजा राशि किसानों को शीघ्रता से दी जाए। ताकि किसानों को मुआवजे के लिए आंदोलन न करना पड़े।
पवन कुमार खेड़ी मटरवा ने कहा कि खेत में ट्यूबवेल कनेक्शन के मुआवजे के बारे में पूछा तो उन्हें बताया गया कि ट्यूबवेल का मुआवजा उन्हें ही दिया जाएगा।
सतपाल करोड़ा ने कहा कि नहर के पानी के खाल की क्या व्यवस्था की है। इसे बंद न किया जाए।
तीन साल पहले लगाई थी गन्ने की फसल, अब बीच में कैसे काटें : गांव मोहना निवासी धर्मबीर सिंह ने बताया कि उसने तीन साल से खेत में गन्ना उगाया हुआ है। अब जमीन अधिग्रहण कर ली गई। लेकिन जब तक उनकी फसल नहीं उठती, तब तक वे इसे कैसे खाली कर सकते हैं। उन्हें पूर्व में इसके लिए बताया जाना चाहिए था।
हमें बुलाया गया, हमारी सुनवाई नहीं हुई : जनसुनवाई के बाद पहुंचे रणबीर सिंह बरसाना ने कहा कि उनका पाई व बरसाना के बीच में रास्ता है। उसकी मांग कच्चे रास्ते की थी। लेकिन उनकी सुनवाई ही नहीं हुई। उनके पहुंचने से पहले अधिकारी उठकर चले गए। जब उन्हें बुलाया गया था तो उनकी सुनवाई भी की जानी चाहिए थी।
बिजली कनेक्शन का काम जिला प्रशासन देखेगा : एक किसान ने कहा कि अधिग्रहण के कारण उनकी जमीन कई हिस्सों में बंट गई। खेत का बिजली का कनेक्शन भी बदलना पड़ेगा। इस पर डीपी ने कहा कि यह काम जिला प्रशासन द्वारा पूरा करवाया जाएगा। डीसी ने भी कहा कि किसान लिखित में दें। उनकी मदद की जाएगी।
रॉयल्टी का प्रावधान नहीं : गांव टयोंठा के जसबीर ने कहा कि उनकी जमीन मोहना में है। सरकार द्वारा घोषित 33 साल तक रॉयल्टी उन्हें मिलेगी क्या? इस पर अधिकारियों ने बताया कि रॉयल्टी की राशि प्रदेश सरकार द्वारा अधिग्रहित जमीन पर मिलती है। यह केंद्र सरकार की एनएचएआई द्वारा अधिग्रहण किया जा रहा है। इस पर रॉयल्टी की सुविधा नहीं हैं। एनएचएआई एक्ट के तहत यह अधिग्रहण हो रहा है।
स्टांप ड्यूटी में मिलेगी छूट : किसान मनमोहन ने पूछा कि यदि इस जमीन के अधिग्रहण से मिली राशि से किसान दूसरी जगह जमीन खरीदता है तो क्या उसे स्टांप ड्यूटी से छूट मिलेगी। तो अधिकारियों ने बताया कि एक किसान को जमीन के अधिग्रहण पर जितनी राशि मिलेगी, अगले दो साल तक यदि किसान उतनी ही राशि से कहीं दूसरी जगह जमीन खरीदता है तो उसे अधिग्रहण के बदले मिली पूरी की पूरी राशि पर स्टांप शुल्क से छूट मिलेगी।
किसानों ने अपनी आपत्तियां दर्ज करवाईं, पर्यावरण को लेकर नहीं हुई ज्यादा चर्चा : किसानों ने जनसुनवाई में अपनी आपत्तियां ही दर्ज करवाईं, उन्होंने पर्यावरण को लेकर ज्यादा चर्चा नहीं की। अधिकारियों ने इतना जरूर बताया कि इस हाईवे के लिए करीब तीन हजार पेड़ काटे जा रहे हैं। उसके बदले में हाईवे पर एक लाख 36 हजार 200 पौधे लगाए जाएंगे। निर्माण के दौरान पर्यावरण जागरूकता के लिए 50 लाख, हवा, मिट्टी, पानी, शोर व मृदा की निगरानी और टेस्टिंग पर 4 करोड़ 66 लाख, वायु प्रदूषण रोकने के लिए पानी छिड़काव पर 3 करोड़ 44 लाख, वन्य जीवों के लिए 10 लाख, डिवाइडर में वृक्षारोपण के लिए एक करोड़ रुपये पेड़ों के लिए पेड़ गार्ड पर 20 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। अंत में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के रीजनल अधिकारी ने एनएचएआई के अधिकारियों को कहा कि वे धूल मिट्टी के उड़ने सहित प्रदूषण न हो, इस बात पर विशेष ध्यान रखने की बात कहकर जनसुनवाई की कार्रवाई की समाप्ति का एलान कर दिया।
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केंद्र सरकार ने एनएचआई एक्ट के तहत अधिग्रहण किया है जमीन का
जिले के 16 गांवों के किसानों के लिए सुनवाई जनसुनवाई का आयोजन
पर्यावरण संबंधी चिंताओं को लेकर की गई किसानों के साथ चर्चा
किसानों ने रास्ते के कारण प्रभावित होने वाले अपने खेतों के रास्तों, बिजली कनेक्शन सहित फसलों व प्रति एकड़ मिलने वाले मुआवजे की दर के बारे में किए सवाल
प्रोजेक्ट डायरेक्टर ने कहा-शीघ्र फाइनल किया जाएगा जमीनों का रेट
डीसी ने कहा- रास्तों के लिए लिखित में शिकायत दें किसान, एनएचएआई को भेज दिया जाएगा
कई किसानों ने कहा-नहीं हुई उनकी सुनवाई
फोटो संख्या-3 व 4
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। कुरुक्षेत्र से नारनौल तक बनाए जाने वाले नेशनल हाईवे-152 के लिए जिले में अधिग्रहण की गई 35 किलोमीटर लंबाई के लिए 252 हेक्टेयर भूमि के लिए रॉयल्टी नहीं मिलेगी। साथ ही बिजली कनेक्शन यदि इस मार्ग के बीच में आते हैं, उन्हें स्थानांतरित करने के लिए जिला प्रशासन से आग्रह करना पड़ेगा और रास्तों के लिए किसान एनएचएआई व डीआरओ कार्यालय में प्रार्थना पत्र दे सकते हैं। यह जानकारी एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर व अन्य अधिकारियों ने किसानों को दी। अधिकारी मंगलवार को लघु सचिवालय में आयोजित जिला मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में पर्यावरण स्वीकृति के लिए जनसुनवाई में दी। जनसुनवाई हालांकि पर्यावरण के संबंध में थीं, लेकिन किसानों ने इस सुनवाई में अपने रास्तों, बिजली के कनेक्शनों, रॉयल्टी व मुआवजे की राशि के संबंध में सवाल किए। अधिग्रहित होने वाली करीब 252 हेक्टेयर जमीन के लिए अभी मुआवजा राशि का निर्धारण नहीं हुआ है। लेकिन अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि शीघ्र ही जमीन की मुआवजा राशि की दर तय कर दी जाएगी।
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क्या है प्रोजेक्ट : सरकार द्वारा 5100 करोड़ रुपये की लागत से कुरुक्षेत्र से नारनौल तक एनएच 152 बनाया जा रहा है। जिसके लिए जिले के गांव सलेमपुर, पबनावा, चंदलाना, कौल, संरौली, खेड़ी मटरवा, डुलियाणी, मोहना, जांबा, पंडरी, थेह बनहेड़ा, बरसाना, हजवाना, करोड़ा व मंडवाल की लगभग 252 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया गया है। कैथल जिले से इस मुख्य मार्ग का 35 किलोमीटर हिस्सा गुजरेगा। इसके लिए मंगलवार को पर्यावरण के संबंध में जनसुनवाई का आयोजन किया गया।
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जनसुनवाई में प्रोजेक्ट मैनेजर केएम शर्मा, डीसी धर्मवीर सिंह, पर्यावरण सलाहकार ऋषभ सहगल, प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड से रिजनल ऑफिसर विनय गौतम सहित अन्य अधिकारियों ने जनसुनवाई शुरू की।
किसानों ने उठाए रास्तों, बिजली कनेक्शन व मुआवजा राशि सहित रॉयल्टी के मुद्दे : गांव मोहना निवासी धर्मबीर ने कहा कि जमीन मुआवजा की राशि कितनी मिलेगी। तो उन्हें बताया गया कि डीआरओ द्वारा एनएचएआई एक्ट 1956 के तहत यह जमीन का अधिग्रहण हो रहा है। मौजूदा कलेक्टर रेट का यह करीब-करीब ढाई गुणा हो जाता है। शीघ्र ही डीआरओ आवश्यक फार्मूले के माध्यम से मुआवजा राशि की घोषणा कर देंगे।
गांव चंदलाना निवासी अमरीक सिंह, बरसाना के रणबीर सिंह, ट्योंठा निवासी जसबीर सिंह, बलवंत करोड़ा, रणधीर करोड़ा ने कहा कि इस मार्ग के कारण उनके खेतों, घरों व दूसरी जगह जाने वाले कई तरह के रास्ते बंद हो गए हैं या हाईवे में इन रास्तों की जमीन चली गई है। इनका क्या होगा? इस पर प्रोजेक्ट डायरेक्टर ने कहा कि जहां आवश्यक हुआ है, वहां अंडर ब्रिज बनाए गए हैं। डीसी ने भी एनएचएआई अधिकारियों से कहा कि जो रास्ते राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में हैं, उनके लिए प्रावधान करें। बाद में किसानों को कहा गया कि रास्तों के लिए किसान लिखित में डीआरओ कार्यालय या एनएचएआई को आवेदन करें। उन पर विचार किया जाएगा।
शीघ्र हो मुआवजा राशि का फैसला : किसान संघ की ओर से गुलतान सिंह नैन ने कहा कि पूर्व में किसानों के साथ मुआवजा राशि को लेकर भेदभाव होता आया है। अधिकारी इस मामले में ऐसा न करें, एक समान मुआवजा राशि किसानों को शीघ्रता से दी जाए। ताकि किसानों को मुआवजे के लिए आंदोलन न करना पड़े।
पवन कुमार खेड़ी मटरवा ने कहा कि खेत में ट्यूबवेल कनेक्शन के मुआवजे के बारे में पूछा तो उन्हें बताया गया कि ट्यूबवेल का मुआवजा उन्हें ही दिया जाएगा।
सतपाल करोड़ा ने कहा कि नहर के पानी के खाल की क्या व्यवस्था की है। इसे बंद न किया जाए।
तीन साल पहले लगाई थी गन्ने की फसल, अब बीच में कैसे काटें : गांव मोहना निवासी धर्मबीर सिंह ने बताया कि उसने तीन साल से खेत में गन्ना उगाया हुआ है। अब जमीन अधिग्रहण कर ली गई। लेकिन जब तक उनकी फसल नहीं उठती, तब तक वे इसे कैसे खाली कर सकते हैं। उन्हें पूर्व में इसके लिए बताया जाना चाहिए था।
हमें बुलाया गया, हमारी सुनवाई नहीं हुई : जनसुनवाई के बाद पहुंचे रणबीर सिंह बरसाना ने कहा कि उनका पाई व बरसाना के बीच में रास्ता है। उसकी मांग कच्चे रास्ते की थी। लेकिन उनकी सुनवाई ही नहीं हुई। उनके पहुंचने से पहले अधिकारी उठकर चले गए। जब उन्हें बुलाया गया था तो उनकी सुनवाई भी की जानी चाहिए थी।
बिजली कनेक्शन का काम जिला प्रशासन देखेगा : एक किसान ने कहा कि अधिग्रहण के कारण उनकी जमीन कई हिस्सों में बंट गई। खेत का बिजली का कनेक्शन भी बदलना पड़ेगा। इस पर डीपी ने कहा कि यह काम जिला प्रशासन द्वारा पूरा करवाया जाएगा। डीसी ने भी कहा कि किसान लिखित में दें। उनकी मदद की जाएगी।
रॉयल्टी का प्रावधान नहीं : गांव टयोंठा के जसबीर ने कहा कि उनकी जमीन मोहना में है। सरकार द्वारा घोषित 33 साल तक रॉयल्टी उन्हें मिलेगी क्या? इस पर अधिकारियों ने बताया कि रॉयल्टी की राशि प्रदेश सरकार द्वारा अधिग्रहित जमीन पर मिलती है। यह केंद्र सरकार की एनएचएआई द्वारा अधिग्रहण किया जा रहा है। इस पर रॉयल्टी की सुविधा नहीं हैं। एनएचएआई एक्ट के तहत यह अधिग्रहण हो रहा है।
स्टांप ड्यूटी में मिलेगी छूट : किसान मनमोहन ने पूछा कि यदि इस जमीन के अधिग्रहण से मिली राशि से किसान दूसरी जगह जमीन खरीदता है तो क्या उसे स्टांप ड्यूटी से छूट मिलेगी। तो अधिकारियों ने बताया कि एक किसान को जमीन के अधिग्रहण पर जितनी राशि मिलेगी, अगले दो साल तक यदि किसान उतनी ही राशि से कहीं दूसरी जगह जमीन खरीदता है तो उसे अधिग्रहण के बदले मिली पूरी की पूरी राशि पर स्टांप शुल्क से छूट मिलेगी।
किसानों ने अपनी आपत्तियां दर्ज करवाईं, पर्यावरण को लेकर नहीं हुई ज्यादा चर्चा : किसानों ने जनसुनवाई में अपनी आपत्तियां ही दर्ज करवाईं, उन्होंने पर्यावरण को लेकर ज्यादा चर्चा नहीं की। अधिकारियों ने इतना जरूर बताया कि इस हाईवे के लिए करीब तीन हजार पेड़ काटे जा रहे हैं। उसके बदले में हाईवे पर एक लाख 36 हजार 200 पौधे लगाए जाएंगे। निर्माण के दौरान पर्यावरण जागरूकता के लिए 50 लाख, हवा, मिट्टी, पानी, शोर व मृदा की निगरानी और टेस्टिंग पर 4 करोड़ 66 लाख, वायु प्रदूषण रोकने के लिए पानी छिड़काव पर 3 करोड़ 44 लाख, वन्य जीवों के लिए 10 लाख, डिवाइडर में वृक्षारोपण के लिए एक करोड़ रुपये पेड़ों के लिए पेड़ गार्ड पर 20 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। अंत में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के रीजनल अधिकारी ने एनएचएआई के अधिकारियों को कहा कि वे धूल मिट्टी के उड़ने सहित प्रदूषण न हो, इस बात पर विशेष ध्यान रखने की बात कहकर जनसुनवाई की कार्रवाई की समाप्ति का एलान कर दिया।