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राजकीय कन्या स्कूल में अध्यापकों
Updated Tue, 12 Sep 2017 12:22 AM IST
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अध्यापकों की कमी से अधर में लटका छात्राओं का भविष्य
राजकीय कन्या स्कूल में अध्यापकों 8 पद रिक्त होने से छात्राएं परेशान
अमर उजाला ब्यूरो
राजौंद। राजकीय कन्या स्कूल में अध्यापकों व प्राध्यापकों के 18 पद रिक्त होने से 750 छात्राओं को भविष्य राम भरोसे है। शिक्षा विभाग की नई तबादला नीति के तहत इस स्कूल से 5 शिक्षकों का और स्थानांतरण करके छात्राओं की मुश्किलों को और बढ़ा दिया है।
नई तबादला नीति से इस स्कूल से पांच शिक्षकों का स्थानांतरण कर केवल दो शिक्षक ही वापस मिले। जिसमें अभी तक एक शिक्षक ने तो ज्वाइन भी नहीं किया। इससे सैकड़ों छात्राओं का भविष्य अधर में लटक गया है। छात्राओं के साथ साथ अभिभावक भी परेशान है। छात्राओं ने कहा कि पहले ही स्कूल में स्टाफ की भारी कमी थी ऊपर से नई तबादला नीति में अध्यापकों का तबादला करके उनकी पढ़ाई को बाधित किया है। स्कूल में पिछले 8 वर्ष के बाद प्रधानाचार्य के पद पर स्थाई नियुक्ति हुई थी। लेकिन नई तबादला नीति में फिर से प्रधानाचार्य का स्थानांतरण कर दिया गया है। इस समय स्कूल में हिंदी, अंग्रेजी, गणित, एस एस, संस्कृत, साइंस सहित 18 पद रिक्त पड़े है। ऐसे में शिक्षा विभाग के बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ व उच्च शिक्षा के दावे हवा में उड़ते नजर आ रहे है। जिससे छात्राएं स्कूल में खाली बैठकर घर आने को विवश है।
पूर्व सचिव रामकुमार ने कहा कि सरकार बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाने को कहती है लेकिन स्कूलों में शिक्षकों का भारी टोटा है ऐसे में वह बच्चों को सरकारी स्कूलों में दाखिल करवाकर बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ समझते है। सरकार की बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ दावे राजकीय स्कूल के 18 शिक्षकों के रिक्त पड़े पद ब्यान कर रहे है। क्या यही सरकार की बेहतर शिक्षा नीति है।
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राजकीय कन्या स्कूल में अध्यापकों 8 पद रिक्त होने से छात्राएं परेशान
अमर उजाला ब्यूरो
राजौंद। राजकीय कन्या स्कूल में अध्यापकों व प्राध्यापकों के 18 पद रिक्त होने से 750 छात्राओं को भविष्य राम भरोसे है। शिक्षा विभाग की नई तबादला नीति के तहत इस स्कूल से 5 शिक्षकों का और स्थानांतरण करके छात्राओं की मुश्किलों को और बढ़ा दिया है।
नई तबादला नीति से इस स्कूल से पांच शिक्षकों का स्थानांतरण कर केवल दो शिक्षक ही वापस मिले। जिसमें अभी तक एक शिक्षक ने तो ज्वाइन भी नहीं किया। इससे सैकड़ों छात्राओं का भविष्य अधर में लटक गया है। छात्राओं के साथ साथ अभिभावक भी परेशान है। छात्राओं ने कहा कि पहले ही स्कूल में स्टाफ की भारी कमी थी ऊपर से नई तबादला नीति में अध्यापकों का तबादला करके उनकी पढ़ाई को बाधित किया है। स्कूल में पिछले 8 वर्ष के बाद प्रधानाचार्य के पद पर स्थाई नियुक्ति हुई थी। लेकिन नई तबादला नीति में फिर से प्रधानाचार्य का स्थानांतरण कर दिया गया है। इस समय स्कूल में हिंदी, अंग्रेजी, गणित, एस एस, संस्कृत, साइंस सहित 18 पद रिक्त पड़े है। ऐसे में शिक्षा विभाग के बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ व उच्च शिक्षा के दावे हवा में उड़ते नजर आ रहे है। जिससे छात्राएं स्कूल में खाली बैठकर घर आने को विवश है।
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पूर्व सचिव रामकुमार ने कहा कि सरकार बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाने को कहती है लेकिन स्कूलों में शिक्षकों का भारी टोटा है ऐसे में वह बच्चों को सरकारी स्कूलों में दाखिल करवाकर बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ समझते है। सरकार की बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ दावे राजकीय स्कूल के 18 शिक्षकों के रिक्त पड़े पद ब्यान कर रहे है। क्या यही सरकार की बेहतर शिक्षा नीति है।
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