{"_id":"5a6e154e4f1c1bcb268b6e6d","slug":"141517163854-kaithal-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"धूमधाम से मनाई गई संत शिरोमणी रविदास जयंती","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
धूमधाम से मनाई गई संत शिरोमणी रविदास जयंती
Updated Sun, 28 Jan 2018 11:54 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
कलायत। बाल विकास पब्लिक स्कूल में संत शिरोमणी रविदास जयंती पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। स्कूल प्रधानाचार्य बलवंत राविश ने संत शिरोमणी रविदास के जीवन पर प्रकाश डालते हुए छात्रों को संबोधित किया। उन्होने कहा कि संत रविदास का जन्म काशी के मंडुवाडीह नामक गांव में 1388 ईस्वी में हुआ था । लोक मान्यता के अनुसार उनका जन्म माघ मास की पूर्णिमा को रविवार को हुआ था। इसी दिन उनकी जयन्ती मनाई जाती है। रविदास जी एक महान समाज-सुधारक थे। उन्होंने ऊंच-नीच, जाति पाति, बाहरी आडंबरों व धार्मिक असहिष्णुता एवं भेदभाव का विरोध किया । उन्होंने अमीरी-गरीबी के भेदभाव को मिटाकर आपसी भाईचारे व सामाजिक सद्भाव पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सामाजिक सद्भाव की स्थापना करना और सुखी जीवन व्यतीत करना ही परमपद है। संत रविदास ने अपनी बाणियों में स्पष्ट कहा है कि चरण पखारने, नाचने-गाने, तप करने से भक्ति की प्राप्ति नहीं होती। केवल अहम भाव के त्याग से भक्ति द्वारा परम तत्व की प्राप्ति संभव है। उन्होंने सामाजिक सामंजस्य, सदाचारण, गुरू के महत्व, प्रेम-भावना, कर्तव्यपालन, सत्संगति की महिमा के साथ-साथ मानव धर्म के पालन का संदेश दिया है। कार्यक्रम में विद्यालय के छात्र व छात्रों द्वारा गणतंन्त्र दिवस कार्यक्रम में बेहतरीन प्रदर्शन करने पर प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर विद्यालय का पूरा स्टाफ भी उपस्थित था ।
धूमधाम से मनाई गई संत शिरोमणी रविदास जयंती
फोटो नंबर- 44
कलायत। बाल विकास पब्लिक स्कूल में संत शिरोमणी रविदास जयंती पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। स्कूल प्रधानाचार्य बलवंत राविश ने संत शिरोमणी रविदास के जीवन पर प्रकाश डालते हुए छात्रों को संबोधित किया। उन्होने कहा कि संत रविदास का जन्म काशी के मंडुवाडीह नामक गांव में 1388 ईस्वी में हुआ था । लोक मान्यता के अनुसार उनका जन्म माघ मास की पूर्णिमा को रविवार को हुआ था। इसी दिन उनकी जयन्ती मनाई जाती है। रविदास जी एक महान समाज-सुधारक थे। उन्होंने ऊंच-नीच, जाति पाति, बाहरी आडंबरों व धार्मिक असहिष्णुता एवं भेदभाव का विरोध किया । उन्होंने अमीरी-गरीबी के भेदभाव को मिटाकर आपसी भाईचारे व सामाजिक सद्भाव पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सामाजिक सद्भाव की स्थापना करना और सुखी जीवन व्यतीत करना ही परमपद है। संत रविदास ने अपनी बाणियों में स्पष्ट कहा है कि चरण पखारने, नाचने-गाने, तप करने से भक्ति की प्राप्ति नहीं होती। केवल अहम भाव के त्याग से भक्ति द्वारा परम तत्व की प्राप्ति संभव है। उन्होंने सामाजिक सामंजस्य, सदाचारण, गुरू के महत्व, प्रेम-भावना, कर्तव्यपालन, सत्संगति की महिमा के साथ-साथ मानव धर्म के पालन का संदेश दिया है। कार्यक्रम में विद्यालय के छात्र व छात्रों द्वारा गणतंन्त्र दिवस कार्यक्रम में बेहतरीन प्रदर्शन करने पर प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर विद्यालय का पूरा स्टाफ भी उपस्थित था ।
धूमधाम से मनाई गई संत शिरोमणी रविदास जयंती
फोटो नंबर- 44