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फसल के अवशेष ना जलाएं किसान
Updated Sat, 10 Nov 2018 12:04 AM IST
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फसल के अवशेष ना जलाएं किसान
कैथल। डीसी धर्मवीर सिंह ने किसानों का आह्वान किया कि वे अपनी धान की फसल की कटाई के बाद शेष बचे अवशेषों को आग न लगाएं, बल्कि फसल अवशेष प्रबंधन कृषि यंत्रों की मदद से इन अवशेषों को मिट्टी में मिलाकर उपजाऊ शक्ति बढाएं। उन्होंने बताया कि फसल अवशेषों को जलाने से पर्यावरण प्रदूषित होता है तथा भूमि की उर्वरा शक्ति भी कमजोर होती है। जिला में कस्टम हायरिंग सैंटर स्थापित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त किसानों को व्यक्तिगत रूप से भी फसल अवशेष प्रबंधन कृषि यंत्र अनुदान पर प्रदान किए गए हैं। किसान अपनी धान की फसल के अवशेषों का इन फसल अवशेष प्रबंधन कृषि यंत्रों से बेहुर प्रबंधन कर सकते हैं। इन अवशेषों से पशुओं के लिए चारा भी बनाया जा सकता है। जिला प्रशासन द्वारा फसल अवशेषों को आग लगाने वाले किसानें के विरुद्घ सख्त कार्रवाई की जा रही है तथा इस निगरानी के लिए विशेष टीमों का गठन किया गया है। सैटेलाइट के माध्यम से भी फसलों के अवशेष जलाने पर विशेष नजर रखी जा रही है।
वर्तमान धान सीजन के दौरान गत वीरवार तक जिला की विभिन्न मंडियों एवं खरीद केंद्रो में 7 लाख 41 हजार 915 मीट्रिक टन धान की आवक हुई है। गत वर्ष इसी अवधि तक 8 लाख 13 हजार 653 मीट्रिक टन धान की आवक दर्ज की गई थी।
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कैथल। डीसी धर्मवीर सिंह ने किसानों का आह्वान किया कि वे अपनी धान की फसल की कटाई के बाद शेष बचे अवशेषों को आग न लगाएं, बल्कि फसल अवशेष प्रबंधन कृषि यंत्रों की मदद से इन अवशेषों को मिट्टी में मिलाकर उपजाऊ शक्ति बढाएं। उन्होंने बताया कि फसल अवशेषों को जलाने से पर्यावरण प्रदूषित होता है तथा भूमि की उर्वरा शक्ति भी कमजोर होती है। जिला में कस्टम हायरिंग सैंटर स्थापित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त किसानों को व्यक्तिगत रूप से भी फसल अवशेष प्रबंधन कृषि यंत्र अनुदान पर प्रदान किए गए हैं। किसान अपनी धान की फसल के अवशेषों का इन फसल अवशेष प्रबंधन कृषि यंत्रों से बेहुर प्रबंधन कर सकते हैं। इन अवशेषों से पशुओं के लिए चारा भी बनाया जा सकता है। जिला प्रशासन द्वारा फसल अवशेषों को आग लगाने वाले किसानें के विरुद्घ सख्त कार्रवाई की जा रही है तथा इस निगरानी के लिए विशेष टीमों का गठन किया गया है। सैटेलाइट के माध्यम से भी फसलों के अवशेष जलाने पर विशेष नजर रखी जा रही है।
वर्तमान धान सीजन के दौरान गत वीरवार तक जिला की विभिन्न मंडियों एवं खरीद केंद्रो में 7 लाख 41 हजार 915 मीट्रिक टन धान की आवक हुई है। गत वर्ष इसी अवधि तक 8 लाख 13 हजार 653 मीट्रिक टन धान की आवक दर्ज की गई थी।
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