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जिले में डेंगू और वायरल का प्रकोप, अस्पतालों लगातार बढ़ रहे हैं मरीज
Updated Tue, 03 Oct 2017 11:59 PM IST
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जिले में डेंगू और वायरल का प्रकोप, अस्पतालों में लगातार बढ़ रहे हैं मरीज
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। जिले में डेंगू और वायरल बुखार का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। सरकारी आंकड़ों में 72 लोगों को डेंगू की पुष्टि हो चुकी है। लेकिन निजी अस्पतालों में मरीजों की संख्या इससे कहीं ज्यादा हैं। अधिकतर निजी अस्पताल इस समय डेंगू व वायरल बुखार के मरीजों से भरे हुए हैं। प्रशासन द्वारा लोगों को बार-बार घरों में खड़े पानी को साफ करने का आह्वान किया जा रहा है। कैथल शहर को छोड़कर किसी भी नगर पालिका द्वारा फॉगिंग नहीं करवाई जा रही। जिस कारण भी कस्बों में डेंगू बढ़ रहा है।
कैथल शहर में कई बस्तियों में भारी प्रकोप
कैथल शहर में अमरगढ़ गामड़ी, गुरु तेगबहादुर कालोनी, बैंक कालोनी, ढांड रोड पर न्यू मॉडल टाऊन सहित कई कालोनियों में डेंगू के डंक का कहर बढ़ता जा रहा है। शहर में कई निजी स्कूलों सहित खाली पड़ी जगहों में पानी खड़ा है। डॉ. प्रदीप शर्मा ने कहा कि हिंदू कन्या स्कूल के मैदान में न्यू मॉडल टाऊन अंबाला रोड के निकट पानी खड़ा है। जहां स्कूली बच्चों को भी यह रोग फैलने का डर है। लेकिन इस पानी व झाड़ियों को साफ नहीं किया जा रहा। वे स्वयं डेंगू से पीड़ित हैं।
कैथल नगर परिषद को छोड़कर कहीं नहीं हो रही फॉगिंग : स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार विभाग को नगर परिषद, नगर पालिकाओं व जरूरत पड़ने पर ग्राम पंचायतों को दवा देनी है। छिड़काव के लिए मशीनों व कर्मचारियों का प्रबंध स्थानीय निकायों द्वारा किया जाना है। कैथल नगर परिषद को विभाग ने 2 मशीनें दी हैं। जिनके माध्यम से फॉगिंग करवाई जा रही है। लेकिन गुहला-चीका, कलायत, राजौंद व पूंडरी में अभी तक फॉगिंग कार्य शुरू तक नहीं हुआ है और न ही कोई फॉगिंग मशीन खरीदे जाने की जानकारी। हालांकि 29 ग्राम पंचायतों ने अपनी मशीन खरीद कर फॉगिंग कार्य शुरू कर दिया है।
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निजी अस्पतालों में मरीजों की संख्या सैकड़ों में : स्वास्थ्य विभाग द्वारा अभी तक 72 लोगों को डेंगू की पुष्टि की गई है, जबकि निजी अस्पतालों मेें यह संख्या सैकड़ों में हैं। वहीं अनेक लोग एलीजा टेस्ट के लिए लाइन में लगे हैं। हर अस्पताल में डेंगू के मरीज दाखिल हैं।
वायरल ज्यादा है, लोग भयभीत न हो, 50 हजार से कम प्लेटलेट्स होने पर ही डेंगू की जांच करवाएं : डिप्टी सिविल सर्जन एवं जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. देवेंद्र शर्मा ने बताया कि इस समय वायरल ज्यादा है। डेंगू कम है। लेकिन लोग वायरल में कमजोरी आने पर ही उसे डेंगू समझ रहे हैं। इसलिए बुखार में ज्यादा कमजोरी आने पर पहले अपनी प्लेटलेट्स की जांच करवाएं। यदि ये 50 हजार से कम हैं, तभी डेंगू का इलाज करवाएं। अन्यथा आराम करें और बुखार की दवा लें। ज्यादा परेशानी हो तो चिकित्सक से भी सलाह जरूर ले लें। कैथल नगर परिषद को दवा उपलब्ध करवा दी गई है।
नारियल पानी, बकरी का दूध लें : डेंगू के चलते नारियल पानी, कीवी कास फल, बकरी का दूध, गिलोय बेल के जूस सहित ऐसी कई वस्तुओं की बिक्री बढ़ गई है। बताया जा रहा है कि इन खाद्य पदार्थों से प्लेटलेट्स जल्दी रिकवर हो रही हैं। लेकिन जिला मलेरिया अधिकारी का कहना है कि उक्त चीजें ले सकें तो ले लें। अन्यथा जरूरी नहीं हैं। इस बुखार में केवल तरल पदार्थ जिसमें पानी, कच्ची लस्सी, जूस, दूध ज्यादा लें। हल्का खाना खाएं। सबसे जरूरी है ज्यादा आराम करें।
7 से 8 दिन की प्रक्रिया है इस बुखार की : डॉ. देवेंद्र का कहना है कि डेंगू व वायरल बुखार की प्रक्रिया 7 से 8 दिन की है। पहले दो-तीन दिन इसमें बुखार रहता है। इसके बाद दो-तीन दिन में यह ठीक होता है। तब तक काफी कमजोरी आ जाती है। प्लेटलेट्स पहले दो-तीन दिन लगातार कम होंगी, इसके बाद बढ़ जाएंगी। इसलिए घबराने की बजाए इलाज करवाएं। ज्यादा परेशानी है तो डॉक्टर से समय-समय पर जरूर इलाज करवाते रहें।
अपने घरों में पानी खड़ा होने की जरूर करें जांच : डीसी सुनीता वर्मा ने कहा कि उनकी एक बार फिर अपील है कि लोग अपने घरों में साफ-सफाई बनाए रखें। क्योंकि बीमार होने पर शारीरिक नुकसान के साथ-साथ आर्थिक नुकसान होता है। इसलिए अपने घर या आस-पास पानी खड़ा न होने दें, ताकि यह मच्छर पनप ही न सके और बीमारी जड़ से ही खत्म हो। जिस घर में डेंगू का लारवा मिल रहा है, उसका चालान भी किया जा रहा है।
डेंगू की दहशत ऐसी कि वायरल बुखार में भी डेंगू के टेस्ट करवा रहे हैं लोग
फोटो संख्या-15, 16, 17 व 18
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अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। जिले में डेंगू और वायरल बुखार का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। सरकारी आंकड़ों में 72 लोगों को डेंगू की पुष्टि हो चुकी है। लेकिन निजी अस्पतालों में मरीजों की संख्या इससे कहीं ज्यादा हैं। अधिकतर निजी अस्पताल इस समय डेंगू व वायरल बुखार के मरीजों से भरे हुए हैं। प्रशासन द्वारा लोगों को बार-बार घरों में खड़े पानी को साफ करने का आह्वान किया जा रहा है। कैथल शहर को छोड़कर किसी भी नगर पालिका द्वारा फॉगिंग नहीं करवाई जा रही। जिस कारण भी कस्बों में डेंगू बढ़ रहा है।
कैथल शहर में कई बस्तियों में भारी प्रकोप
कैथल शहर में अमरगढ़ गामड़ी, गुरु तेगबहादुर कालोनी, बैंक कालोनी, ढांड रोड पर न्यू मॉडल टाऊन सहित कई कालोनियों में डेंगू के डंक का कहर बढ़ता जा रहा है। शहर में कई निजी स्कूलों सहित खाली पड़ी जगहों में पानी खड़ा है। डॉ. प्रदीप शर्मा ने कहा कि हिंदू कन्या स्कूल के मैदान में न्यू मॉडल टाऊन अंबाला रोड के निकट पानी खड़ा है। जहां स्कूली बच्चों को भी यह रोग फैलने का डर है। लेकिन इस पानी व झाड़ियों को साफ नहीं किया जा रहा। वे स्वयं डेंगू से पीड़ित हैं।
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कैथल नगर परिषद को छोड़कर कहीं नहीं हो रही फॉगिंग : स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार विभाग को नगर परिषद, नगर पालिकाओं व जरूरत पड़ने पर ग्राम पंचायतों को दवा देनी है। छिड़काव के लिए मशीनों व कर्मचारियों का प्रबंध स्थानीय निकायों द्वारा किया जाना है। कैथल नगर परिषद को विभाग ने 2 मशीनें दी हैं। जिनके माध्यम से फॉगिंग करवाई जा रही है। लेकिन गुहला-चीका, कलायत, राजौंद व पूंडरी में अभी तक फॉगिंग कार्य शुरू तक नहीं हुआ है और न ही कोई फॉगिंग मशीन खरीदे जाने की जानकारी। हालांकि 29 ग्राम पंचायतों ने अपनी मशीन खरीद कर फॉगिंग कार्य शुरू कर दिया है।
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निजी अस्पतालों में मरीजों की संख्या सैकड़ों में : स्वास्थ्य विभाग द्वारा अभी तक 72 लोगों को डेंगू की पुष्टि की गई है, जबकि निजी अस्पतालों मेें यह संख्या सैकड़ों में हैं। वहीं अनेक लोग एलीजा टेस्ट के लिए लाइन में लगे हैं। हर अस्पताल में डेंगू के मरीज दाखिल हैं।
वायरल ज्यादा है, लोग भयभीत न हो, 50 हजार से कम प्लेटलेट्स होने पर ही डेंगू की जांच करवाएं : डिप्टी सिविल सर्जन एवं जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. देवेंद्र शर्मा ने बताया कि इस समय वायरल ज्यादा है। डेंगू कम है। लेकिन लोग वायरल में कमजोरी आने पर ही उसे डेंगू समझ रहे हैं। इसलिए बुखार में ज्यादा कमजोरी आने पर पहले अपनी प्लेटलेट्स की जांच करवाएं। यदि ये 50 हजार से कम हैं, तभी डेंगू का इलाज करवाएं। अन्यथा आराम करें और बुखार की दवा लें। ज्यादा परेशानी हो तो चिकित्सक से भी सलाह जरूर ले लें। कैथल नगर परिषद को दवा उपलब्ध करवा दी गई है।
नारियल पानी, बकरी का दूध लें : डेंगू के चलते नारियल पानी, कीवी कास फल, बकरी का दूध, गिलोय बेल के जूस सहित ऐसी कई वस्तुओं की बिक्री बढ़ गई है। बताया जा रहा है कि इन खाद्य पदार्थों से प्लेटलेट्स जल्दी रिकवर हो रही हैं। लेकिन जिला मलेरिया अधिकारी का कहना है कि उक्त चीजें ले सकें तो ले लें। अन्यथा जरूरी नहीं हैं। इस बुखार में केवल तरल पदार्थ जिसमें पानी, कच्ची लस्सी, जूस, दूध ज्यादा लें। हल्का खाना खाएं। सबसे जरूरी है ज्यादा आराम करें।
7 से 8 दिन की प्रक्रिया है इस बुखार की : डॉ. देवेंद्र का कहना है कि डेंगू व वायरल बुखार की प्रक्रिया 7 से 8 दिन की है। पहले दो-तीन दिन इसमें बुखार रहता है। इसके बाद दो-तीन दिन में यह ठीक होता है। तब तक काफी कमजोरी आ जाती है। प्लेटलेट्स पहले दो-तीन दिन लगातार कम होंगी, इसके बाद बढ़ जाएंगी। इसलिए घबराने की बजाए इलाज करवाएं। ज्यादा परेशानी है तो डॉक्टर से समय-समय पर जरूर इलाज करवाते रहें।
अपने घरों में पानी खड़ा होने की जरूर करें जांच : डीसी सुनीता वर्मा ने कहा कि उनकी एक बार फिर अपील है कि लोग अपने घरों में साफ-सफाई बनाए रखें। क्योंकि बीमार होने पर शारीरिक नुकसान के साथ-साथ आर्थिक नुकसान होता है। इसलिए अपने घर या आस-पास पानी खड़ा न होने दें, ताकि यह मच्छर पनप ही न सके और बीमारी जड़ से ही खत्म हो। जिस घर में डेंगू का लारवा मिल रहा है, उसका चालान भी किया जा रहा है।
डेंगू की दहशत ऐसी कि वायरल बुखार में भी डेंगू के टेस्ट करवा रहे हैं लोग
फोटो संख्या-15, 16, 17 व 18